श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर पूरा देश भक्ति के रंग में रंगा हुआ है। मंदिरों को बेहद भव्य तरीके से सजाया गया है और कान्हा के जन्मोत्सव को लेकर विशेष तैयारियां देखने को मिल रही हैं। मथुरा और वृंदावन से लेकर देश के तमाम हिस्सों में उत्सव का माहौल है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को मथुरा पहुंचे। उन्होंने प्रसिद्ध श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में जाकर भगवान श्रीकृष्ण की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों को पर्व की शुभकामनाएं दीं। मंदिर परिसर में करीब 30 मिनट बिताने के दौरान उन्होंने वहां मौजूद श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा भी की। हालांकि उनका यह दौरा केवल धार्मिक अनुष्ठान तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके राजनीतिक और विकासात्मक मायने भी काफी गहरे रहे।
कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मामले पर योगी का पुराना रुख
मथुरा और कृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का रुख लंबे समय से काफी स्पष्ट रहा है। इससे पहले 26 मार्च 2025 को एक मीडिया साक्षात्कार के दौरान उनसे कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद को लेकर तीखे सवाल पूछे गए थे। उस बातचीत में उन्होंने एक बड़ा सवाल उठाया था कि आखिर मथुरा का मुद्दा क्यों नहीं उठाया जाना चाहिए और क्या यह जगह भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि नहीं है? इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि मौजूदा सरकार पूरी तरह से अदालत के आदेशों का पालन कर रही है, वरना उस स्थान पर अब तक बहुत कुछ हो चुका होता। उनका यह बयान सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक काफी चर्चा का विषय बना रहा था।
ब्रज के चौतरफा विकास का संकल्प
मथुरा पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री ने केवल दर्शन-पूजन पर ही जोर नहीं दिया, बल्कि उन्होंने ब्रज क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ इसके समग्र विकास के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि मथुरा, वृंदावन, नंदगांव, बरसाना और गोवर्धन समेत पूरे ब्रज क्षेत्र को आम लोगों की भावनाओं के अनुरूप ही विकसित किया जाएगा। इस प्रकार जन्माष्टमी के मंच से एक बार फिर आस्था के साथ-साथ विकास का एजेंडा भी जनता के सामने रखा गया। उनका कहना था कि इन सभी तीर्थ स्थलों का कायाकल्प उसी तर्ज पर किया जाएगा जैसे अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों का किया जा रहा है।
विपक्ष पर हमला और सनातन आस्था का जिक्र
जन्माष्टमी के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने मुगल शासकों बाबर और औरंगजेब का हवाला देते हुए विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग बाबर और औरंगजेब जैसी शख्सियतों में आस्था रखते हैं, वे देश की मूल सनातन संस्कृति और परंपराओं का सम्मान नहीं कर सकते। इसके विपरीत उन्होंने अपनी सरकार की प्राथमिकताओं को गिनाते हुए कहा कि उनकी सरकार श्रीकृष्ण कन्हैया, प्रभु श्रीराम, बाबा विश्वनाथ और मां विंध्यवासिनी जैसी महान आस्थाओं में विश्वास रखती है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कुछ लोग समाज में जानबूझकर नफरत और जहर घोलने की कोशिश कर रहे हैं जिससे युवाओं, महिलाओं, किसानों और कारोबारियों के हितों को ठेस पहुंच सकती है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि डबल इंजन की सरकार ऐसे किसी भी मंसूबे को कभी कामयाब नहीं होने देगी।
अयोध्या और काशी की तर्ज पर मथुरा का कायाकल्प
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में इस बात पर विशेष जोर दिया कि जिस तरह से अयोध्या और काशी का अभूतपूर्व विकास किया गया है, उसी तर्ज पर मथुरा और वृंदावन का भी कायाकल्प किया जाएगा। उन्होंने ब्रज के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए कहा कि अतीत में मंदिरों पर विदेशी ताकतों ने कई आक्रमण किए, लेकिन देश की अटूट आस्था को कभी समाप्त नहीं किया जा सका। उनके भाषण में इस बात की साफ झलक दिखाई दे रही थी कि वे धार्मिक पहचान और आधुनिक विकास को एक ही रथ के दो पहियों की तरह आगे बढ़ाना चाहते हैं, जिससे क्षेत्र की सांस्कृतिक गरिमा भी बनी रहे और पर्यटकों तथा श्रद्धालुओं को बेहतरीन सुविधाएं मिल सकें।


















