सिंधु जल समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को घेरने की पाकिस्तान की नई कूटनीतिक चाल पूरी तरह विफल साबित हुई है। पाकिस्तान ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों के बीच एक पत्र वितरित करवाया, जिसमें तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले का हवाला देते हुए खुद के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की गई थी। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान पर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली का दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए कहा कि जिस मध्यस्थता न्यायाधिकरण के आदेश को पाकिस्तान प्रचारित कर रहा है, भारत उसके अधिकार क्षेत्र और उसके गठन को ही पूरी तरह अमान्य मानता है।
संयुक्त राष्ट्र में बांटे गए पत्र पर नई दिल्ली की दो टूक
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तान वैश्विक मंच पर सच्चाई को गलत तरीके से पेश कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान जिस दस्तावेज को स्थायी मध्यस्थता न्यायालय का आधिकारिक फैसला बताकर सुरक्षा परिषद में सर्कुलेट कर रहा है, वह वास्तव में वैसा फैसला नहीं है। भारत के अनुसार यह एक ऐसे न्यायाधिकरण का वक्तव्य है, जिसे भारत ने शुरू से ही अवैध माना है और कभी मान्यता नहीं दी है। नई दिल्ली पहले भी दोहरा चुकी है कि ऐसे किसी भी निकाय के पास भारत के संप्रभु निर्णयों पर समीक्षा करने या निर्देश देने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है, लिहाजा इस तरह के फैसलों का भारत के कदमों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले के बाद संधि रोकने की पृष्ठभूमि
यह विवाद केवल एक पत्राचार या कागजी फैसले तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार लंबे समय से जारी सीमा पार आतंकवाद से सीधे जुड़े हैं। भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि के क्रियान्वयन को स्थगित कर दिया था। उस कायराना आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। भारत सरकार ने उस वक्त स्पष्ट घोषणा कर दी थी कि जब तक इस्लामाबाद सीमा पार आतंकवाद को समाप्त करने के लिए जमीन पर ठोस, दृश्यमान और विश्वसनीय कदम नहीं उठाता, तब तक जल बंटवारे की यह व्यवस्था स्थगित ही रहेगी। दूसरी तरफ, 31 अगस्त को कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि जल संधि प्रभावी बनी हुई है और भारत इसे एकतरफा ढंग से निलंबित नहीं कर सकता। भारत ने इस टिप्पणी को तत्काल प्रभाव से ठुकरा दिया था क्योंकि न्यायाधिकरण का गठन अवैध है।
सीमा पार आतंकवाद पर कथनी नहीं, करनी दिखाए पाकिस्तान
रणधीर जायसवाल ने प्रेस वार्ता में यह बात भी रेखांकित की कि पाकिस्तान को आतंकवाद के खात्मे पर कोरी बयानबाजी छोड़कर वास्तविक कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि महज कागजी बयानों और औपचारिक घोषणाओं से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कभी संतुष्ट नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान को अपनी नीयत और प्रतिबद्धता जमीनी स्तर पर साबित करनी होगी। भारत ने लगातार यह अडिग रुख अपनाया है कि पानी और आतंकवाद एक साथ नहीं बह सकते, और सिंधु जल संधि को निलंबित रखने का भारत का संप्रभु निर्णय पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाने को बताया महज दिखावा
इसी संदर्भ में भारत ने जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को लेकर भी पाकिस्तान की नीयत पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। हाल ही में पाकिस्तान ने अपनी वांटेड आतंकवादियों की सूची में संशोधन करते हुए अजहर पर घोषित इनाम की राशि में 20 लाख पाकिस्तानी रुपये की बढ़ोतरी कर उसे कुल 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दिया। भारत ने इस कदम को पूरी तरह दिखावटी और दुनिया की आंखों में धूल झोंकने वाला बताया है। भारत का कहना है कि सिर्फ इनाम का आंकड़ा बढ़ाने के बजाय पाकिस्तान को अजहर के खिलाफ वास्तविक कानूनी और सुरक्षात्मक कार्रवाई करनी चाहिए। पाकिस्तान का दावा है कि अजहर अब उसके क्षेत्र में नहीं है और अफगानिस्तान में छुपा हुआ है, जबकि भारतीय खुफिया एजेंसियों के सटीक आकलन के अनुसार वह पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नवाबशाह में सुरक्षित शरण लिए हुए हो सकता है। मसूद अजहर भारतीय संसद पर हमले और पुलवामा आतंकी हमले सहित कई घातक आतंकी साजिशों का मुख्य वांछित अपराधी है।























