सूरत के सिविल हॉस्पिटल के परिसर में एक रेजिडेंट डॉक्टर की दुखद आत्महत्या का मामला सामने आने के बाद चिकित्सा महकमे में हड़कंप मच गया है। इस पूरे मामले में रैगिंग के गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने तुरंत कड़ा कदम उठाते हुए चार सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को छह महीने के लिए निलंबित कर दिया है। जान गंवाने वाले डॉक्टर की पहचान 30 वर्षीय हर्ष पांड्या के रूप में हुई है, जिनका शव हॉस्टल की बिल्डिंग-बी के कमरा नंबर 1005 में संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटका हुआ पाया गया था। शुरुआती जांच में जब पुलिस और प्रशासन ने मामले की तह तक जाने की कोशिश की, तो मृतक डॉक्टर के साथ कथित रूप से मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किए जाने की बातें सामने आईं।
घटना की गंभीरता को भांपते हुए एंटी-रैगिंग टीम ने देर रात हॉस्टल का रुख किया और वहां रहने वाले करीब नौ छात्रों से गहन पूछताछ की। इस दौरान हॉस्टल के माहौल और सीनियर छात्रों के बर्ताव को लेकर कई तरह की जानकारियां जुटाई गईं। जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के दायरे में आए कुछ छात्रों ने खुलकर इन चार सीनियर डॉक्टरों के खिलाफ लिखित शिकायतें भी दर्ज कराई हैं। जिन सीनियर डॉक्टरों पर यह गाज गिरी है, उनमें डॉ. निराली वसावा, डॉ. अनुज महेश्वरी, डॉ. दीक्षिता सेसरियन और डॉ. हिना भूत के नाम शामिल हैं। इन सभी को फिलहाल छह महीने की अवधि के लिए सस्पेंड कर दिया गया है।
प्रशासनिक कार्रवाई के अलावा इस मामले में कानूनी शिकंजा कसने की पूरी तैयारी चल रही है। सामने आ रही जानकारियों के मुताबिक, रैगिंग के इन पुख्ता आरोपों के आधार पर चारों आरोपी सीनियर डॉक्टरों के खिलाफ औपचारिक तौर पर पुलिस में शिकायत दर्ज की जाएगी। इसके बाद पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां इस कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगी। वर्तमान में पुलिस इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि आखिर किन परिस्थितियों के दबाव में आकर डॉक्टर हर्ष पांड्या को इतना खौफनाक कदम उठाना पड़ा और क्या रैगिंग इसके पीछे की मुख्य वजह थी।
मूल रूप से अरावली जिले के मोडासा कस्बे के रहने वाले हर्ष पांड्या के असमय निधन से उनके पूरे परिवार और परिचितों में भारी शोक की लहर दौड़ गई है। सोमवार की सुबह उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दर्दनाक हादसे के बाद मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार ने तीखे सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि मेडिकल संस्थानों में छात्रों के साथ हद दर्जे की रैगिंग की जाती है और इस पूरी घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। परिजनों ने प्रशासन से यह भी पुरजोर मांग की है कि कागजों में दर्ज रैगिंग विरोधी कानूनों को सिर्फ औपचारिकता न समझा जाए, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर बेहद सख्ती के साथ लागू किया जाए ताकि किसी और परिवार को यह दर्द न झेलना पड़े।
स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर जांच कमेटी गठित
इस पूरी घटना ने प्रशासनिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है, जिसके बाद सरकार ने मोर्चे पर कड़ाई दिखाई है। गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए त्वरित और सख्त जांच के आदेश जारी किए हैं। मंत्री की ओर से मिले निर्देशों का पालन करते हुए एक विशेष जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है। इस कमेटी को सख्त हिदायत दी गई है कि वह महज 24 घंटे के भीतर अपनी पूरी रिपोर्ट तैयार करके सौंपे। फिलहाल पुलिस और जांच दल उन तमाम कड़ियों को जोड़ने में जुटे हैं जो इस ट्रेजिक घटना के पीछे की असली वजहों से पर्दा उठा सकें।



















