नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर 26 दिनों तक आमरण अनशन करने के बाद अस्पताल में अनशन समाप्त करने की घटना अब एक बड़े विवाद का रूप ले चुकी है। अस्पताल के कमरे में केंद्रीय मंत्रियों के साथ हुई आधी रात की बैठक के बाद अनशन समाप्त करने की तस्वीरें सार्वजनिक होने पर सवाल उठाए गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम में आरोप लगाया गया है कि मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई स्पष्ट सहमति के बावजूद अनशन खत्म होने की तस्वीरें सहमति के बिना मीडिया में प्रसारित कर दी गईं, जबकि इस संबंध में पहले से कुछ शर्तें तय की गई थीं।
गुरुग्राम के अस्पताल में आधी रात को हुई उच्च स्तरीय मुलाकात
यह पूरा मामला दिल्ली के जंतर मंतर पर शुरू हुए विरोध प्रदर्शन और बाद में बिगड़े स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। 28 जून को नीट-यूजी पेपर लीक के विरोध में अभिजीत दिपके के नेतृत्व वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन का समर्थन करते हुए जंतर मंतर पर 26 दिन लंबा आमरण अनशन शुरू किया गया था। अनशन के दौरान स्वास्थ्य स्थिति लगातार गंभीर होने के कारण पहले प्राथमिक अस्पताल में इलाज कराया गया और बाद में गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसी अस्पताल में इलाज के दौरान देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह मुलाकात करने पहुंचे थे।
अस्पताल परिसर में आधी रात के बाद पहुंचे दोनों केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में अनशन समाप्त करने की प्रक्रिया पर चर्चा हुई थी। इस दौरान स्वास्थ्य देखभाल और अनशन की समाप्ति के तरीकों पर विस्तार से बातचीत की गई। मंत्रियों के साथ आधिकारिक फोटोग्राफर भी अस्पताल के कमरे में मौजूद थे, जिन्होंने अनशन समाप्त करने के दौरान की तस्वीरें खींची थीं। हालांकि, अनशन खत्म करने के साथ ही यह बात भी सामने आई कि तस्वीरों के इस्तेमाल को लेकर एक खास रणनीति तय की गई थी।
तस्वीरों के प्रसारण को रोकने की शर्त और आईबी अधिकारियों की गवाही
बैठक के दौरान यह साफ तौर पर तय किया गया था कि अनशन खत्म होने की तस्वीरों और किसी भी आधिकारिक जानकारी को तुरंत सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। इस बातचीत के समय मौके पर मौजूद इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के वरिष्ठ अधिकारियों को भी साक्षी बनाया गया था। यह सहमति बनी थी कि तस्वीरों को तब तक रोककर रखा जाएगा जब तक कि सभी संबंधित पक्षों को इस प्रक्रिया में शामिल नहीं कर लिया जाता।
आरोप है कि यह लिखित और मौखिक सहमति केवल कुछ ही मिनटों तक टिक सकी। जिस समय विपक्षी दलों के नेताओं की तस्वीरें जुटाने और उन्हें इस घोषणा का हिस्सा बनाने की तैयारी चल रही थी, ठीक उसी समय अस्पताल में मौजूद एक वरिष्ठ आईबी अधिकारी ने आकर सूचना दी कि अनशन खत्म होने के दृश्य विभिन्न समाचार टीवी चैनलों पर प्रसारित होने शुरू हो चुके हैं। इस घटना से तय शर्तों का सीधा उल्लंघन हुआ।
लद्दाख की परंपरा और सर्वदलीय घोषणा का प्रस्ताव
घटनाक्रम की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए यह बताया गया कि लद्दाख की सांस्कृतिक परंपरा के अनुसार, जब सरकार या प्रशासन प्रदर्शनकारियों की मांग स्वीकार करता है, तो सरकारी प्रतिनिधि स्वयं जूस या सूप पिलाकर अनशन समाप्त करवाते हैं। लेकिन इस विशेष मामले में यह इच्छा जताई गई थी कि इस घटनाक्रम को केवल किसी एक सत्तारूढ़ दल की पहल या सफलता के रूप में प्रदर्शित न किया जाए, बल्कि इसमें सभी पक्षों का प्रतिनिधित्व नजर आना चाहिए।
इसी सोच के तहत यह प्रस्ताव दिया गया था कि विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं तथा छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में एक संयुक्त घोषणा की जाए। चूंकि केंद्रीय मंत्री आधी रात के बाद अस्पताल पहुंचे थे, इसलिए यह तय हुआ था कि शारीरिक रूप से अनशन उसी समय खत्म कर दिया जाएगा, लेकिन सार्वजनिक घोषणा और तस्वीरों का आधिकारिक जारी होना बाद में सभी पक्षों के एक साथ आने पर ही किया जाएगा।
गोपनीय डील के आरोपों का खंडन और भविष्य के रुख पर बयान
सरकार के साथ किसी भी प्रकार की गुप्त या बैकडोर डील करने के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है। यह स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी प्रकार का राजनीतिक या प्रशासनिक समझौता ही करना होता, तो 26 दिनों तक लगातार कड़ा अनशन करने और स्वास्थ्य को जोखिम में डालने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। इससे पहले भी समझौते के कई अवसर सामने आए थे, लेकिन सिद्धांतों से हटकर कोई कदम नहीं उठाया गया।
अनशन की पूरी अवधि के दौरान नीट-यूजी परीक्षा प्रणाली में सुधार और धांधली के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग प्रमुखता से उठाई गई थी। जंतर मंतर से शुरू हुआ यह आंदोलन कई छात्र समूहों और राजनीतिक दलों के ध्यान का केंद्र बना था। 26 दिनों के इस लंबे संघर्ष के बाद मेदांता अस्पताल में अनशन तो तोड़ा गया, लेकिन जिस तरह से तस्वीरों का प्रसारण हुआ, उसने प्रशासनिक भरोसे और आपसी सहमति की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



















