सूरत स्थित न्यू सिविल अस्पताल में 29 वर्षीय रेजिडेंट डॉक्टर की हॉस्टल के कमरे में हुई आत्महत्या के मामले ने पूरे चिकित्सा जगत को झकझोर कर रख दिया है। मामले की जांच में वरिष्ठ डॉक्टरों द्वारा की जा रही प्रताड़ना और रैगिंग की बात सामने आने के बाद राज्य स्तर पर सख्त रुख अपनाया गया है। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर चार सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि चार वरिष्ठ संकाय सदस्यों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
पीजी हॉस्टल में इस तरह हुआ घटना का खुलासा
गुजरात के अरवल्ली जिले के मोडासा शहर के रहने वाले 29 वर्षीय डॉ. हर्ष पांड्या न्यू सिविल अस्पताल में माइक्रोबायोलॉजी विभाग में प्रथम वर्ष के पोस्ट ग्रेजुएट छात्र थे और साथ ही रेजिडेंट डॉक्टर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। शनिवार को जब वह अपनी तय ड्यूटी पर नहीं पहुंचे, तो अस्पताल प्रबंधन और सहयोगियों को चिंता हुई। वरिष्ठ डॉक्टरों ने उनके मोबाइल फोन पर लगातार संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनका फोन लगातार बंद आ रहा था।
किसी अनहोनी की आशंका के चलते अन्य रेजिडेंट डॉक्टरों को पीजी हॉस्टल के कमरा नंबर 1005 में भेजा गया, जहां हर्ष रहते थे। कमरे का दरवाजा अंदर से पूरी तरह बंद था। काफी देर तक खटखटाने और आवाजें देने के बाद भी जब अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, तो सुरक्षा कर्मचारियों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया। कमरे के भीतर का नजारा देखकर सब हैरान रह गए, क्योंकि डॉक्टर हर्ष का शव पंखे से लटका हुआ मिला। इस घटना के बाद तुरंत अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय पुलिस को सूचित किया गया।
स्वास्थ्य मंत्री का हस्तक्षेप और रात भर चली जांच
घटना की गंभीरता को देखते हुए गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप किया और आत्महत्या के कारणों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति के गठन का निर्देश दिया। स्वास्थ्य मंत्री ने मृतक डॉक्टर के सर्जन पिता से फोन पर सीधी बातचीत कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और उन्हें पारदर्शी न्याय का आश्वासन दिया। इसके साथ ही उन्होंने जांच टीम को निर्देश दिए कि रैगिंग, मानसिक उत्पीड़न या किसी भी प्रकार की प्रताड़ना के पहलू की गहनता से पड़ताल की जाए।
अस्पताल के डीन और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट की देखरेख में एंटी रैगिंग स्क्वाड ने माइक्रोबायोलॉजी विभाग में व्यापक जांच शुरू की। इस दौरान विभाग के सीनियर डॉक्टरों, फैकल्टी सदस्यों, लैब टेक्नीशियनों और सफाई कर्मचारियों से कड़ी पूछताछ की गई। रात 8:30 बजे शुरू हुई यह मैराथन पूछताछ सुबह 4:00 बजे तक जारी रही। इसके बाद तैयार की गई विस्तृत जांच रिपोर्ट डीन और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को सौंपी गई।
चार सीनियर डॉक्टर निलंबित, चार को शोकॉज नोटिस
जांच रिपोर्ट में रैगिंग और प्रताड़ना की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने कड़ा एक्शन लिया। चार सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को छह महीने के लिए निलंबित कर दिया गया। निलंबित किए गए डॉक्टरों में डॉ. निराली वसावे, डॉ. अनुज महेश्वरी, डॉ. दीक्षित घेवरिया और डॉ. हीना भूत शामिल हैं। इन सभी को तुरंत हॉस्टल खाली करने, शैक्षणिक गतिविधियों में भाग न लेने और अस्पताल परिसर छोड़कर जाने का सख्त फरमान जारी किया गया है।
इसके साथ ही प्रशासनिक लापरवाही और विभागीय निगरानी के मुद्दे पर चार वरिष्ठ डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। इनमें माइक्रोबायोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सुमैया मुल्ला, डॉ. लतिका पुरोहित, डॉ. संगीता राजडे और डॉ. योगिता मिस्त्री शामिल हैं।
परिवार की शंकाएं और फॉरेंसिक जांच की पुष्टि
डॉ. हर्ष पांड्या अपने परिवार के इकलौते बेटे थे और महज छह महीने पहले ही उनकी सगाई हुई थी। उनके पिता स्वयं एक सर्जन हैं। हर्ष के पिता ने बताया कि उन्होंने हाल ही में सीनियर डॉक्टरों द्वारा पैदा की जा रही परेशानियों और दबाव का जिक्र किया था, हालांकि किसी बड़ी समस्या की बात उस समय सामने नहीं आई थी।
मौत की परिस्थितियों को लेकर परिवार द्वारा जताई गई शंकाओं के बाद फॉरेंसिक पोस्टमार्टम कराने का निर्णय लिया गया। फॉरेंसिक विशेषज्ञों के एक विशेष पैनल ने जांच की और आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि मौत फांसी लगाने की वजह से हुई थी। पुलिस अब इस मामले में रैगिंग और मानसिक दबाव से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं की आगे की जांच कर रही है।



















