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स्वतंत्रता दिवस पर ₹5000 देने वाली योजना का सच: पीआईबी ने फर्जी बताया पीएम मोदी के नाम का वायरल दावाभारत
15 अग॰ 2026, 3:03 pm (47 दिन पहले)· 2

स्वतंत्रता दिवस पर ₹5000 देने वाली योजना का सच: पीआईबी ने फर्जी बताया पीएम मोदी के नाम का वायरल दावा

सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ₹5,000 की नकद राशि देने का दावा किया जा रहा है। पीआईबी फैक्ट चेक ने इस दावे की पड़ताल कर इसे पूरी तरह फर्जी और साइबर ठगी का प्रयास करार दिया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर स्वतंत्रता दिवस के मौके पर केंद्र सरकार की ओर से नकद राशि बांटे जाने की खबर तेजी से फैल रही है। कई वायरल विज्ञापनों और मैसेज में दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के नागरिकों को ₹5,000 की वित्तीय सहायता प्रदान कर रहे हैं। इस कथित नकद सहायता को प्राप्त करने के लिए उपयोगकर्ताओं से एक संदिग्ध लिंक के जरिए अपने बैंक खाते की संवेदनशील जानकारी दर्ज करने को कहा जा रहा है। हालांकि, सरकार की आधिकारिक तथ्य जांच इकाई पीआईबी फैक्ट चेक ने इस पूरे मामले की जांच करने के बाद साफ कर दिया है कि केंद्र सरकार ने ऐसी कोई योजना शुरू नहीं की है।

फर्जी निकला ₹5,000 कैश ग्रांट का वायरल मैसेज

पीआईबी फैक्ट चेक द्वारा की गई पड़ताल के अनुसार, इंटरनेट पर प्रसारित किया जा रहा यह विज्ञापन पूरी तरह धोखाधड़ी पर आधारित है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर केंद्र सरकार अथवा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से ₹5,000 का कोई कैश ग्रांट स्वीकृत नहीं किया गया है और न ही ऐसी किसी योजना का समर्थन किया गया है। साइबर अपराधियों द्वारा तैयार किए गए इस फर्जी विज्ञापन का मुख्य उद्देश्य लोगों को वित्तीय लाभ का लालच देना है। आकर्षक ऑफर का झांसा देकर लोगों को अनजान लिंक पर क्लिक करने के लिए उकसाया जा रहा है, ताकि उनसे बैंक खाते का विवरण, ओटीपी और अन्य निजी डेटा हासिल किया जा सके।

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साइबर ठगी के नए पैंतरे से रहें सावधान

विशेषज्ञों और पीआईबी फैक्ट चेक ने चेतावनी दी है कि इस प्रकार की भ्रामक पोस्ट साइबर क्राइम का हिस्सा हैं। जब कोई यूजर इन विज्ञापनों में दिए गए असत्यापित लिंक पर अपनी बैंकिंग डिटेल्स या व्यक्तिगत जानकारी भरता है, तो उसके खाते से पैसे गायब होने और डेटा के दुरुपयोग का गंभीर खतरा उत्पन्न हो जाता है। डिजिटल धोखाधड़ी करने वाले गिरोह अक्सर राष्ट्रीय पर्वों, त्यौहारों या लोकप्रिय सरकारी योजनाओं का सहारा लेकर आम जनता को अपने जाल में फंसाते हैं। इस फर्जी ऑफर के माध्यम से भी लोगों से आधार कार्ड, बैंक अकाउंट नंबर, पासवर्ड और सुरक्षा पिन जैसी गोपनीय जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है।

सुरक्षित रहने के लिए अपनाएं ये जरूरी कदम

सरकारी एजेंसियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस तरह के किसी भी अनधिकृत दावे पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। किसी भी अज्ञात नंबर या सोशल मीडिया पेज से प्राप्त होने वाले संदिग्ध लिंक को ओपन करने से बचें। इसके अलावा, किसी भी अज्ञात व्यक्ति, पोर्टल या फॉर्म में अपनी बैंकिंग डिटेल, क्रेडिट या डेबिट कार्ड की जानकारी, ओटीपी, पासवर्ड या आधार कार्ड नंबर साझा न करें। यदि आपको केंद्र सरकार की किसी योजना के बारे में कोई जानकारी मिलती है, तो उसकी सत्यता जांचने के लिए संबंधित मंत्रालयों की आधिकारिक वेबसाइट्स और पीआईबी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल का ही सहारा लें। बिना पुष्टि किए किसी भी वायरल मैसेज को आगे फॉरवर्ड करने से बचें, ताकि साइबर अपराधियों के मंसूबों को नाकाम किया जा सके।

सवाल-जवाब

क्या स्वतंत्रता दिवस पर सरकार ₹5,000 की कैश मदद दे रही है?
नहीं, केंद्र सरकार या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ₹5,000 देने की कोई योजना शुरू नहीं की गई है।
₹5,000 वाले वायरल मैसेज की सच्चाई क्या है?
पीआईबी फैक्ट चेक की जांच में यह दावा पूरी तरह फर्जी और धोखाधड़ी वाला पाया गया है, जिसे साइबर ठगों द्वारा बैंकिंग जानकारी चुराने के उद्देश्य से फैलाया जा रहा है।
ऐसे वायरल मैसेज पर अपनी जानकारी दर्ज करने से क्या नुकसान हो सकता है?
अज्ञात लिंक पर बैंक खाता नंबर, ओटीपी, पासवर्ड या आधार दर्ज करने पर साइबर फ्रॉड का शिकार होने और बैंक खाते से पैसे कटने का खतरा रहता है।
सरकारी योजनाओं की सही जानकारी कहां से प्राप्त करें?
सरकारी योजनाओं और घोषणाओं की प्रामाणिक जानकारी के लिए केवल संबंधित मंत्रालयों की आधिकारिक वेबसाइटों और पीआईबी के अधिकृत हैंडल्स पर ही भरोसा करें।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·46 दिन पहले

राष्ट्रीय पर्वों के समय साइबर अपराधियों द्वारा इस तरह के वित्तीय प्रलोभन देने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह संगठित डिजिटल धोखाधड़ी का हिस्सा है, जहां नागरिकों का व्यक्तिगत डेटा चुराकर खातों को खाली किया जाता है। जनता को सतर्क रहने और किसी भी अनधिकृत लिंक पर अपनी संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचने की सख्त आवश्यकता है, अन्यथा गंभीर कानूनी और आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·46 दिन पहले

राष्ट्रीय पर्वों के समय इस तरह के साइबर धोखे न सिर्फ नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता को भी आहत करते हैं। इस प्रकार की संगठित डिजिटल धोखाधड़ी दर्शाती है कि अपराधियों द्वारा लोकलुभावन दावों का इस्तेमाल करके जनता के डेटा की सेंधमारी की जा रही है। ऐसी घटनाओं पर लगाम कसने के लिए कड़े प्रशासनिक और तकनीकी कदमों की आवश्यकता है, ताकि राष्ट्रीय उत्सवों के माहौल को दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों से सुरक्षित रखा जा सके।

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