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उत्तराखंड के सुंदरढूंगा ग्लेशियर की ओर बढ़ रहे ट्रेकर्स, दुर्गम घाटी में यात्रा शुरू करने से पहले समझें पूरा रास्ताउत्तराखंड
30 सित॰ 2026, 9:26 pm (2 मिनट पहले)· 0

उत्तराखंड के सुंदरढूंगा ग्लेशियर की ओर बढ़ रहे ट्रेकर्स, दुर्गम घाटी में यात्रा शुरू करने से पहले समझें पूरा रास्ता

बागेश्वर जिले में स्थित सुंदरढूंगा ग्लेशियर ट्रेक 15 सितंबर से खुल चुका है, जहां देश-विदेश से ट्रेकर्स पहुंच रहे हैं। काठगोदाम से जातोली होकर शुरू होने वाले इस सफर के लिए गाइड, टेंट और मेडिकल जांच बेहद जरूरी हैं।

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित सुंदरढूंगा ग्लेशियर ट्रेक रोमांच के शौकीनों के लिए 15 सितंबर से खोल दिया गया है। घने जंगलों, बहती नदियों, प्राकृतिक झरनों, हरे-भरे अल्पाइन बुग्यालों और बर्फ से ढकी हिमालयी चोटियों के बीच बसा यह रास्ता कुमाऊं क्षेत्र के सबसे प्रमुख ट्रेक्स में गिना जाता है। मार्ग खुलते ही देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशी ट्रेकर्स भी इस खूबसूरत घाटी की ओर रुख करने लगे हैं।

ट्रेक के पहले पड़ाव तक कैसे पहुंचें

इस प्राकृतिक यात्रा पर निकलने वाले पर्यटकों के लिए निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन काठगोदाम है। स्थानीय जानकार और वरिष्ठ पत्रकार रमेश कृषक पांडे के अनुसार, काठगोदाम पहुंचने के बाद पर्यटकों को सड़क मार्ग का रुख करना होता है। यहां से अल्मोड़ा होते हुए बागेश्वर और फिर सड़क के अंतिम छोर पर बसे जातोली गांव तक पहुंचा जा सकता है।

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लंबी सड़क यात्रा की थकान मिटाने के लिए पहले दिन जातोली गांव में ही रात बिताने की सलाह दी जाती है। इसके बाद अगले दिन सुबह 6:00 से 7:00 बजे के बीच वास्तविक पैदल ट्रेकिंग की शुरुआत करना सबसे मुफीद माना जाता है, ताकि दिन की रोशनी में सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ा जा सके।

चार से पांच दिन का रूट और मुख्य पड़ाव

सुंदरढूंगा ग्लेशियर का यह पूरा सफर आमतौर पर चार से पांच दिनों में पूरा होता है। पैदल यात्रा जातोली गांव से शुरू होती है और विभिन्न प्राकृतिक पड़ावों से गुजरती है। पहले दिन जातोली से चलकर घने जंगलों के बीच से गुजरते हुए दुधिया धौंग अथवा लेह बग के रास्ते कठलिया बेस कैंप तक की चढ़ाई पूरी की जाती है।

दूसरे दिन का सफर कठलिया से आगे बढ़ता है, जहां ट्रेकर्स बलुनी टॉप, ऐतिहासिक सुखराम गुफा और सुंदरढूंगा व्यू प्वाइंट अथवा ग्लेशियर के दर्शन करते हैं। तीसरे दिन के कार्यक्रम में देवीकुंड और नागकुंड के मनोरम स्थलों का भ्रमण शामिल रहता है, जिसके बाद दल वापस कठलिया लौट आता है। चौथे दिन कठलिया से चलकर जातोली गांव वापसी होती है। जातोली से सुंदरढूंगा व्यू प्वाइंट तक की एकतरफा दूरी लगभग 17 से 22 किलोमीटर के बीच बैठती है। यात्रा की कुल अवधि ट्रेकर्स के चलने की गति, शारीरिक क्षमता, स्थानीय गाइड और साथ जा रही ट्रेकिंग एजेंसी की व्यवस्था पर निर्भर करती है।

स्थानीय गाइड का महत्व और बदलते मौसम की चुनौतियां

जातोली गांव पार करते ही पगडंडियां काफी संकरी, पथरीली और धुंधली होने लगती हैं। रास्ते के कई हिस्से उफनती नदियों, बड़े बोल्डर्स और बेहद ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होकर निकलते हैं, जहां रास्ता भटकने का जोखिम रहता है। इसी वजह से इस पूरे ट्रेक पर एक अनुभवी स्थानीय गाइड का साथ होना अनिवार्य माना जाता है।

स्थानीय गाइड न केवल सुरक्षित राह दिखाते हैं, बल्कि रास्ते में पीने के पानी के प्राकृतिक स्रोतों, रात में ठहरने लायक सुरक्षित स्थानों और मौसम के मिजाज से भी अच्छी तरह वाकिफ होते हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्र होने के कारण सुंदरढूंगा में मौसम बहुत अप्रत्याशित रहता है। यदि अचानक तेज बारिश शुरू हो जाए, घना कोहरा छा जाए, कड़ाके की ठंड बढ़ जाए या पगडंडी पर पानी का बहाव आ जाए, तो आगे बढ़ने के बजाय किसी सुरक्षित जगह पर रुक जाना ही समझदारी है। साथ ही पूरे सफर के दौरान खाने-पीने और रहने की पुख्ता योजना पहले से बनाना जरूरी है।

टेंट, मेडिकल जांच और सुंदर पत्थरों की घाटी

सफर शुरू करने से पहले मौसम का ताजा पूर्वानुमान देखना बेहद आवश्यक है। सामान में उच्च गुणवत्ता का रेनकोट, पर्याप्त गर्म कपड़े, प्राथमिक उपचार की जरूरी दवाइयां, पीने का पानी और सूखा पौष्टिक भोजन जरूर शामिल होना चाहिए। अधिक ऊंचाई पर ऑक्सीजन के कम दबाव को देखते हुए बागेश्वर जिला प्रशासन भी ट्रेक पर जाने से पहले अनिवार्य स्वास्थ्य जांच कराने का सुझाव देता है।

कठलिया और उसके आगे स्थायी होटल या लॉज की कोई व्यवस्था नहीं है, इसलिए ट्रेकर्स को अपने स्लीपिंग टेंट साथ लेकर चलने पड़ते हैं। यदि किसी अधिकृत ट्रेकिंग कंपनी के जरिए बुकिंग की गई है, तो टेंट लगाने और प्रबंध करने का जिम्मा एजेंसी खुद संभालती है। सुंदरढूंगा नाम का शाब्दिक अर्थ ही 'सुंदर पत्थरों की घाटी' होता है। इस पूरे मार्ग से मक्तोली, मृगथुनी और पवालीद्वार जैसी विशाल और चमचमाती चोटियों के भव्य दृश्य दिखाई देते हैं, जो हर साल पर्वतारोहियों को अपनी ओर खींचते हैं।

सवाल-जवाब

सुंदरढूंगा ग्लेशियर ट्रेक उत्तराखंड के किस जिले में स्थित है?
यह प्रसिद्ध ग्लेशियर ट्रेक उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित है और कुमाऊं के प्रमुख ट्रेक्स में गिना जाता है।
सुंदरढूंगा ट्रेक के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन कौन सा है?
इस ट्रेक के लिए सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम है, जहां से सड़क मार्ग द्वारा अल्मोड़ा और बागेश्वर होते हुए जातोली गांव पहुंचा जाता है।
जातोली गांव से सुंदरढूंगा व्यू प्वाइंट की दूरी कितनी है?
जातोली गांव से सुंदरढूंगा व्यू प्वाइंट तक की एकतरफा पैदल दूरी लगभग 17 से 22 किलोमीटर के बीच है।
इस ट्रेक को पूरा करने में कितने दिनों का समय लगता है?
यह ट्रेक आमतौर पर चार से पांच दिनों में पूरा होता है, जो ट्रेकर्स की चलने की क्षमता और मौसम पर निर्भर करता है।
सुंदरढूंगा का शाब्दिक अर्थ क्या होता है?
सुंदरढूंगा का शाब्दिक अर्थ 'सुंदर पत्थरों की घाटी' बताया जाता है।
इस मार्ग से किन प्रमुख हिमालयी चोटियों के नजारे दिखाई देते हैं?
इस ट्रेक के दौरान मक्तोली, मृगथुनी और पवालीद्वार जैसी ऊंची और खूबसूरत पर्वत चोटियों के नजारे देखने को मिलते हैं।
रास्ते में ठहरने के लिए क्या व्यवस्था रखनी होती है?
ऊंचाई वाले पड़ावों पर स्थायी लॉज या होटल नहीं हैं, इसलिए ट्रेकर्स को अपने टेंट साथ ले जाने होते हैं या ट्रेकिंग एजेंसी इनकी व्यवस्था करती है।
ट्रेक पर जाने से पहले बागेश्वर जिला प्रशासन क्या सलाह देता है?
जिला प्रशासन अधिक ऊंचाई वाले इस ट्रेक पर जाने से पहले अनिवार्य रूप से मेडिकल जांच कराने की सलाह देता है।
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