पितृ पक्ष के समापन के ठीक बाद देश भर में त्योहारी मौसम का आगाज हो जाता है, लेकिन इसके शुरू होने से पहले ही भारतीय रेल के विभिन्न मार्गों पर टिकटों और आरक्षित सीटों के लिए भारी जद्दोजहद शुरू हो चुकी है। लंबी दूरी तय करने वाली अधिकांश प्रमुख गाड़ियों में प्रतीक्षा सूची यानी वेटिंग लिस्ट का आंकड़ा 100 के पार पहुंच चुका है। कई व्यस्त मार्गों पर हालात इतने गंभीर हैं कि प्रमुख तिथियों के आसपास आरक्षण प्रणाली में रीग्रेट दिखाई देने लगा है, जिसका सीधा मतलब है कि अब उन ट्रेनों में साधारण वेटिंग टिकट लेने की सुविधा भी पूरी तरह बंद हो चुकी है। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में यात्रियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या इतनी लंबी वेटिंग के बावजूद कंफर्म सीट हासिल की जा सकती है और ऐसे कौन से व्यावहारिक उपाय हैं जिनसे घर वापसी का सफर सुगम बन सके।
आईआरसीटीसी पोर्टल के आंकड़े और वैकल्पिक स्टेशनों का चुनाव
आईआरसीटीसी के डिजिटल आरक्षण सिस्टम के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि आगामी त्योहारों के समय चलने वाली नियमित गाड़ियों में नाममात्र की सीटें बची हैं। मुख्य तिथियों पर सीधी और लोकप्रिय गाड़ियों में कंफर्म टिकट मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है। हालांकि, टिकट आरक्षण प्रणाली के बारीकी से अध्ययन से यह जानकारी मिलती है कि यदि यात्री अपने मुख्य बोर्डिंग या गंतव्य स्टेशन के बजाय रूट के थोड़ा आगे या पीछे स्थित किसी स्टेशन से टिकट बुक करते हैं, तो कंफर्म सीट मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। आईआरसीटीसी पोर्टल पर हर गाड़ी और मार्ग के अनुसार वेटिंग टिकट के कंफर्म होने की अनुमानित संभावना भी प्रदर्शित की जाती है, जिसे देखकर यात्री योजना बना सकते हैं।
100 से अधिक स्पेशल ट्रेनों का सहारा
त्योहारों के दौरान नियमित गाड़ियों में होने वाली जबरदस्त भीड़ और सीट संकट को देखते हुए केवल जानी-मानी नियमित ट्रेनों पर निर्भर रहने से बचना चाहिए। इस व्यस्त अवधि में सरकार और रेलवे प्रशासन द्वारा बड़े पैमाने पर विशेष रेलगाड़ियों का संचालन किया जाता है। यदि यात्री मुख्य ट्रेनों के बजाय इन स्पेशल ट्रेनों की आरक्षण सूची पर नजर रखें और समय पर प्रयास करें, तो त्योहारों के चरम दिनों में भी कंफर्म सीट मिल सकती है। इस वर्ष भी त्योहारी आवाजाही को संभालने के लिए सरकार ने 100 से अधिक विशेष रेलगाड़ियां चलाने की घोषणा की है, जो लगभग सभी प्रमुख और लंबी दूरी के रेल मार्गों पर सेवाएं देंगी। विशेषकर उत्तर प्रदेश और बिहार की ओर जाने वाले यात्रियों की भारी तादाद को देखते हुए हर साल दर्जनों त्योहारी ट्रेनें पटरियों पर उतारी जाती हैं।
वेटिंग लिस्ट 100 होने पर भी सीट मिलने का गणित
रेलवे आरक्षण प्रणाली में अब 100 से अधिक वेटिंग लिस्ट होने के बावजूद टिकट कंफर्म होने के कई उदाहरण सामने आते हैं। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि रेल प्रशासन त्योहारों पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए ट्रेनों में अतिरिक्त डिब्बे जोड़ने लगा है, जिससे बड़ी संख्या में प्रतीक्षा सूची वाले यात्रियों को यात्रा की अनुमति मिल जाती है। हालांकि, इसमें सबसे अहम पहलू यह समझना है कि आपके टिकट पर कौन सा वेटिंग कोटा दर्ज है। यदि टिकट जनरल वेटिंग यानी GNWL श्रेणी में आता है, तो उसके सबसे पहले कंफर्म होने की प्रबल संभावना होती है। इसके विपरीत, रिमोट लोकेशन वेटिंग यानी RLWL के कंफर्म होने में अधिक समय लगता है, जबकि पूल्ड कोटा वेटिंग यानी PQWL को सबसे अंत में सुलझाया जाता है। यही कारण है कि कई बार 100 वेटिंग वाला जनरल टिकट आसानी से कंफर्म हो जाता है, जबकि महज 15 वेटिंग वाला पूल्ड कोटा टिकट अटका रह जाता है।
विकल्प योजना और टिकट पक्का कराने की रणनीति
आरक्षण के रुझानों के मुताबिक, दिल्ली से बिहार जाने वाले मार्गों पर सबसे भयंकर प्रतीक्षा सूची देखी जा रही है और कई ट्रेनों में वेटिंग टिकट जारी होना भी बंद हो चुका है। यदि किसी यात्री का टिकट 100 से ज्यादा वेटिंग पर है, तो भी घबराने के बजाय सही विकल्पों का उपयोग करना चाहिए। टिकट बुक करते समय यात्रियों को हमेशा VIKALP योजना का चयन करना चाहिए। इस व्यवस्था के अंतर्गत यदि आपकी मूल ट्रेन में सीट आरक्षित नहीं हो पाती है, तब भी उसी मार्ग पर जाने वाली किसी अन्य ट्रेन में खाली जगह होने पर सिस्टम द्वारा स्वतः सीट आवंटित कर दी जाती है।
अत्यधिक वेटिंग होने पर यात्रा के अन्य विकल्प
दिल्ली से बिहार या अन्य लंबे मार्गों पर अत्यधिक वेटिंग दिखने पर यात्री यात्रा योजना में थोड़ा लचीलापन ला सकते हैं। यदि सीधी ट्रेन में सीट उपलब्ध नहीं है, तो अपने निर्धारित बड़े स्टेशन के बजाय पास के किसी छोटे स्टेशन तक का टिकट लिया जा सकता है। इसके अलावा, यात्री अपने मुख्य शहर के आसपास स्थित किसी नजदीकी जिले की ट्रेन बुक कर सकते हैं, जहां से स्थानीय पैसेंजर ट्रेनों या अन्य कनेक्टिंग साधनों के जरिए अपने मूल गंतव्य तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। इन व्यावहारिक रणनीतियों को अपनाकर 100 पार वेटिंग के दौर में भी त्योहारों पर बिना रुकावट यात्रा की जा सकती है।











