सावन का पवित्र महीना शुरू हो चुका है और रक्षाबंधन तथा दुर्गा पूजा जैसे बड़े त्योहार नजदीक आ रहे हैं। ऐसे समय में बुंदेलखंड क्षेत्र के रेल यात्रियों के सामने यात्रा की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। हर साल त्योहारों के मौसम में ट्रेनों में यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। इस बार बीना-सागर-दमोह-कटनी रेल मार्ग पर सफर करने वाले यात्रियों की मुश्किलें काफी बढ़ चुकी हैं, क्योंकि छह साल पहले बंद की गई कई प्रमुख ट्रेनें अब तक शुरू नहीं की जा सकी हैं।
छह साल बीतने के बाद भी नहीं बहाल हुईं नौ ट्रेनें
इस पूरे संकट की मुख्य वजह बीना रेलवे जंक्शन से कटनी रेल खंड के बीच बंद पड़ी 9 प्रमुख ट्रेनें हैं। कोरोना महामारी के दौरान सुरक्षा और एहतियात के तौर पर इन ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया था। लगभग 6 साल का समय बीत जाने के बावजूद इन ट्रेनों को वापस पटरी पर नहीं लाया गया है। रेल सुधार संघर्ष समिति के अध्यक्ष रवि सोनी ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका आरोप है कि कोरोना काल में देश के अन्य हिस्सों में भी ट्रेन सेवाएँ बंद की गई थीं, लेकिन हालात सामान्य होने पर उन्हें बहाल कर दिया गया। इसके विपरीत बुंदेलखंड के इस व्यस्त और महत्वपूर्ण रेल मार्ग के साथ पक्षपात किया जा रहा है और यहाँ की पुरानी ट्रेनों को पुनः शुरू करने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
दोगुना बस किराया और खचाखच भरी ट्रेनें
ट्रेन सेवाएँ बंद रहने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी दैनिक यात्रियों, मजदूरी करने वाले लोगों और पढ़ाई करने वाले छात्रों को झेलनी पड़ रही है। इस रूट पर चलने वाली निजी यात्री बसों का किराया लगभग 2 गुना तक बढ़ गया है। बस का बढ़ा हुआ किराया आम लोगों के बजट से बाहर हो चुका है, जिसके कारण लोग बसों की बजाय ट्रेनों में सफर करने को विवश हैं। ट्रेनों की संख्या कम होने से बोगियों में भारी भीड़ हो रही है। कई बार स्थिति इतनी खतरनाक हो जाती है कि यात्रियों को ट्रेन के गेट पर लटककर यात्रा करनी पड़ती है। अगर रेलवे त्योहारों के इस मौसम में इन बंद पड़ी ट्रेनों को शुरू कर दे, तो क्षेत्र के हजारों यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
बीना-कटनी ट्रैक पर बंद पड़ी 9 प्रमुख ट्रेनों का विवरण
बुंदेलखंड को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाली दैनिक, त्रि-साप्ताहिक और साप्ताहिक ट्रेनें लंबे समय से बंद हैं। बंद पड़ी प्रमुख ट्रेनों की सूची इस प्रकार है
- 19809/19810 जबलपुर-कोटा एक्सप्रेस: यह नियमित रूप से चलने वाली दैनिक ट्रेन थी जो छात्रों और व्यवसायियों के लिए काफी उपयोगी थी।
- 04189/04190 जबलपुर-खजुराहो एक्सप्रेस: यह त्रि-साप्ताहिक ट्रेन क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए बेहद जरूरी थी।
- 01707/01708 जबलपुर-अटारी एक्सप्रेस: लंबी दूरी की यह महत्वपूर्ण एक्सप्रेस सेवा भी बंद है।
- 11701/11702 जबलपुर-इंदौर इंटरसिटी एक्सप्रेस: मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों को जोड़ने वाली त्रि-साप्ताहिक ट्रेन।
- 22895/22896 दुर्ग-फिरोजपुर दीनदयाल अंत्योदय एक्सप्रेस: आम यात्रियों के लिए अनारक्षित डिब्बों वाली महत्वपूर्ण ट्रेन।
- 14719/14720 बीकानेर-बिलासपुर साप्ताहिक दीनदयाल अंत्योदय एक्सप्रेस: कम बजट में सफर करने वाले यात्रियों के लिए साप्ताहिक ट्रेन।
- 51603/51604 बीना-कटनी पैसेंजर: नियमित चलने वाली यह पैसेंजर ट्रेन छोटे स्टेशनों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की जीवनरेखा मानी जाती थी।
ग्रामीणों और छोटे स्टेशनों के यात्रियों पर असर
बीना और कटनी के बीच चलने वाली पैसेंजर ट्रेन बंद होने से छोटे रेलवे स्टेशनों से जुड़े ग्रामीण इलाकों के लोगों को सबसे ज्यादा आर्थिक और व्यावहारिक झटका लगा है। नौकरी, छोटा-मोटा व्यवसाय, अस्पताल में इलाज, शिक्षा और रोजाना के कामकाज के लिए शहर आने-जाने वाले लोगों को अब महंगे और असुविधाजनक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों और यात्री संगठनों की मांग है कि इन ट्रेनों को तुरंत बहाल किया जाए ताकि आगामी पर्वों पर यात्रियों को सुरक्षित और सुलभ परिवहन मिल सके।
रेलवे प्रशासन का स्पष्टीकरण और बयान
यात्रियों को हो रही असुविधा और उठ रही मांगों पर पश्चिम मध्य रेलवे के सीपीआरओ हर्षित श्रीवास्तव ने अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि रेल मंडल की अधिकांश ट्रेनों का परिचालन पूर्व में ही शुरू किया जा चुका है। इसके अलावा त्योहारों के समय बढ़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रेलवे द्वारा विशेष फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें भी चलाई जा रही हैं। जहाँ तक वर्तमान में बंद पड़ी ट्रेनों का सवाल है, उनका संचालन रेल मंत्रालय द्वारा लिए जाने वाले फैसले के आधार पर ही किया जाएगा।



















