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उमरिया में स्कूली छात्राओं से गंदी हरकत पर शिक्षक निलंबित, पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्जमध्य प्रदेश
31 अग॰ 2026, 9:58 pm (12 दिन पहले)· 4

उमरिया में स्कूली छात्राओं से गंदी हरकत पर शिक्षक निलंबित, पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज

मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में एक शिक्षक पर छात्राओं के साथ अश्लील हरकत करने का गंभीर आरोप लगा है। शिक्षा विभाग ने आरोपी को निलंबित कर दिया है, जबकि पुलिस ने पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी अधिनियम के तहत केस दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के सुल्तानपुर इलाके में स्थित एक माध्यमिक विद्यालय से जुड़ा शर्मनाक मामला सामने आया है। यहाँ पदस्थ एक सहायक शिक्षक पर स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं के साथ अश्लील हरकतें करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस संवेदनशील घटना के उजागर होते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया और प्रशासनिक हलकों में तेजी से कदम उठाए गए। विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फौरन एक्शन लिया और संबंधित सहायक शिक्षक को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया। इसके साथ ही, स्थानीय पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए प्राथमिकी के लिए आवेदन दिया गया, जिसके आधार पर पुलिस ने भी बिना किसी देरी के कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।

अश्लील हरकतों के खुलासे के बाद शिक्षा विभाग का एक्शन

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुल्तानपुर के इस सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने वाले सहायक शिक्षक पर विद्यालय की छात्राओं के साथ आपत्तिजनक और अश्लील हरकतें करने का आरोप है। जैसे ही इस घिनौनी करतूत की भनक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को लगी, उन्होंने तुरंत मामले की अंदरूनी पड़ताल की और आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाते हुए आरोपी शिक्षक के खिलाफ निलंबन की गाज गिरा दी। विभाग ने इसके बाद तत्काल पुलिस से संपर्क साधा और लिखित आवेदन देकर आरोपी शिक्षक के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की माँग की ताकि मामले में त्वरित और सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज

शिक्षा विभाग से औपचारिक शिकायत और आवेदन मिलने के बाद इदवार थाना पुलिस ने मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। पुलिस ने पीड़िता छात्राओं की सुरक्षा और मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए आरोपी शिक्षक के खिलाफ पॉक्सो एक्ट यानी प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेन्स एक्ट और एससी-एसटी अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला दर्ज होने के बाद से ही आरोपी शिक्षक अपनी जगह से फरार है और पुलिस की पकड़ से बाहर चल रहा है। पुलिस की टीमें उसके संभावित छुपने के ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं और उसे जल्द से जल्द गिरफ्तार करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

छात्राओं की सुरक्षा पर उठे सवाल और निष्पक्ष जाँच की माँग

इस अप्रिय घटना के सामने आने के बाद से ही इलाके के अभिभावकों, परिजनों और आम नागरिकों में भारी रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि यदि शिक्षण संस्थानों में ही इस प्रकार की घटनाएँ होने लगेंगी, तो बच्चों की सुरक्षा पर बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लग जाएगा। स्थानीय लोगों और परिजनों ने प्रशासन से पूरे मामले की पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच कराने की पुरजोर माँग की है, साथ ही दोषी शिक्षक के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई की वकालत की है। पुलिस अब शिकायत में दर्ज गंभीर आरोपों, छात्राओं के गोपनीय बयानों और अन्य तकनीकी व भौतिक साक्ष्यों के आधार पर अपनी जाँच को आगे बढ़ा रही है। फिलहाल आरोपी शिक्षक पुलिस की गिरफ्त से दूर है और मामले की गहनता से जाँच जारी है ताकि सभी तथ्यात्मक पहलू सामने आ सकें।

सवाल-जवाब

यह घटना किस जिले के किस स्कूल में हुई है?
यह घटना मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के सुल्तानपुर स्थित माध्यमिक पाठशाला में हुई है।
आरोपी शिक्षक के खिलाफ कौन-कौन सी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है?
आरोपी शिक्षक के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
शिक्षा विभाग ने इस मामले में क्या शुरुआती कार्रवाई की है?
शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित सहायक आरोपी शिक्षक को निलंबित कर दिया है और पुलिस में शिकायत दी है।
क्या आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया गया है?
फिलहाल आरोपी शिक्षक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है और पुलिस उसके संभावित ठिकानों पर तलाश कर रही है।
इस मामले की जांच कौन सी पुलिस थाना क्षेत्र में दर्ज की गई है?
यह मामला इदवार थाना क्षेत्र के अंतर्गत दर्ज किया गया है और पुलिस आगे की जांच कर रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·11 दिन पहले

उमरिया के इस मामले में प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तो तुरंत हुई है, लेकिन शिक्षण संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक गहरी संस्थागत विफलता सामने आती है। जब तक स्कूलों में आंतरिक शिकायत समितियों को अधिक सक्रिय नहीं किया जाता और शिक्षकों की पृष्ठभूमि का कड़ा सत्यापन अनिवार्य नहीं होता, तब तक ऐसी घटनाओं को रोकना और अभिभावकों का भरोसा बहाल करना मुश्किल रहेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·11 दिन पहले

रविकेश जी ने बिल्कुल सही रेखांकित किया है कि प्रशासनिक तत्परता के बावजूद हमारी व्यवस्था में संस्थागत कमियाँ बनी हुई हैं। इस तरह के अपराधों से निपटने के लिए केवल निलंबन और पॉक्सो के तहत मुकदमे दर्ज करना काफी नहीं है। राज्य स्तर पर नीति निर्माताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि स्कूलों में निगरानी तंत्र मजबूत हो, नियमित मनोवैज्ञानिक परामर्श सत्र हों और ऐसी घटनाओं पर जीरो टॉलरेंस नीति का कड़ाई से पालन किया जाए, अन्यथा छात्राओं की सुरक्षा और अभिभावकों का विश्वास सिर्फ कागजी दावों तक सीमित रह जाएगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·11 दिन पहले

उमरिया के इस मामले में पॉक्सो और एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज होना कानूनी रूप से सही कदम है, लेकिन आरोपी का फरार होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। बाल अधिकारों के मामलों में त्वरित गिरफ्तारी और फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए स्पीडी ट्रायल ही न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रख सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·11 दिन पहले

यह घटना शिक्षण संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा और संस्थागत निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है। प्रशासनिक और पुलिस महकमे की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे केवल निलंबन तक सीमित न रहें, बल्कि फरार आरोपी की जल्द से जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित करें ताकि पीड़िताओं और उनके अभिभावकों का कानून व्यवस्था पर भरोसा कायम रह सके।

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