जोधपुर में एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम की सेहत का मसला मंगलवार को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अंतरिम जमानत पर कोई अंतिम फैसला सुनाने के बजाय शीर्ष अदालत ने एम्स से आसाराम की सेहत की मुकम्मल मेडिकल रिपोर्ट तलब कर ली है, ताकि असल हालात सामने आ सकें। खराब सेहत के आधार पर दाखिल की गई इस याचिका पर सुनवाई अभी जारी रहेगी।
राजस्थान सरकार ने किया याचिका का विरोध
इससे पहले हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को निर्देश दिया था कि वह आसाराम की मौजूदा मेडिकल रिपोर्ट का बारीकी से परीक्षण करे और अदालत को यह बताए कि क्या उनकी सेहत सच में इतनी नाजुक है कि उन्हें कुछ समय के लिए अंतरिम जमानत दी जानी चाहिए। राज्य सरकार ने हालांकि आसाराम की इस याचिका का पुरजोर विरोध किया।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखा सरकार का पक्ष
राजस्थान सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि आसाराम इस वक्त स्वस्थ हालत में हैं। उन्होंने बताया कि तकरीबन तीन माह पूर्व आसाराम अयोध्या और काशी विश्वनाथ मंदिर भी गए थे, जहां उन्होंने पैदल घूमकर भ्रमण भी किया। मेहता के मुताबिक आसाराम को पाचन तंत्र यानी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल दिक्कत से जुड़ा रक्तस्राव की शिकायत जरूर है, मगर यह समस्या फिलहाल अस्थायी नजर आती है और इसका इलाज लगातार चल रहा है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि राज्य सरकार संबंधित अफसरों से ताजा निर्देश हासिल करने के बाद अपनी विस्तृत राय अदालत के सामने रखेगी।
बचाव पक्ष बोला, हालत गंभीर और जोखिम भरी
इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि अगर आसाराम की हालत उतनी गंभीर नहीं है तो मामला अलग है, लेकिन कोर्ट ने आगाह भी किया कि हम नहीं चाहते कि बाद में किसी पर आरोप लगे, अगर स्थिति सच में बिगड़ जाए। वहीं आसाराम की ओर से पेश वकील ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल की सेहत अब भी गंभीर बनी हुई है और उन्हें ज्यादा खतरा बना हुआ है।
पहले राज्य सरकार की राय का इंतजार करेगी अदालत
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि वह पहले राज्य सरकार की मेडिकल रिपोर्ट पर आधारित राय का इंतजार करेगी, उसके बाद ही आगे का रास्ता तय होगा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि अगर जांच में सेहत की स्थिति वाकई गंभीर निकलती है, तो सिर्फ इलाज कराने के मकसद से एक तय, सीमित अवधि के लिए अंतरिम जमानत पर विचार किया जा सकता है। यही वजह है कि अब सारी निगाहें एम्स की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर आगे की सुनवाई की दिशा तय होगी।
2018 में मिली थी उम्रकैद, हाल ही में किया आत्मसमर्पण
गौरतलब है कि जोधपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने साल 2018 में आसाराम को अपने ही आश्रम में एक नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। राजस्थान हाईकोर्ट ने बाद में इस सजा पर मुहर लगा दी। इसके अलावा आसाराम गुजरात में अपनी एक महिला अनुयायी के यौन उत्पीड़न के मामले में भी उम्रकैद की सजा भुगत रहे हैं। हाईकोर्ट का फैसला आने तक आसाराम अंतरिम मेडिकल जमानत पर बाहर थे, लेकिन फैसले के बाद उन्होंने 28 मई को जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण कर दिया था।















