दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के कर्मचारी अंकित शर्मा की निर्मम हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन की अपील पर विचार करने की सहमति व्यक्त की है। उच्च न्यायालय ने ताहिर हुसैन की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली पुलिस से औपचारिक जवाब मांगा है। यह मामला 24 से 26 फरवरी 2020 के दौरान हुई हिंसक झड़पों के सबसे चर्चित आपराधिक मुकदमों में से एक है।
अदालत के निर्देश और अगली सुनवाई की प्रक्रिया
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ ने ताहिर हुसैन द्वारा दायर अपील को औपचारिक रूप से सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। उच्च न्यायालय ने इस याचिका को 02 दिसंबर को अन्य संबंधित मामलों की अपीलों के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश जारी किया है। इसके अतिरिक्त, पीठ ने कारागार अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे दोषी ताहिर हुसैन से संबंधित सभी आवश्यक विवरण और जेल आचरण रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें। साथ ही, मामले की संपूर्ण समीक्षा के लिए निचली अदालत के मूल रिकॉर्ड भी तलब किए गए हैं। ताहिर हुसैन ने अपनी अपील याचिका में तर्क दिया है कि उन्हें जनता के आक्रोश को शांत करने और प्रशासनिक दबाव के कारण इस आपराधिक मामले में गलत तरीके से फंसाया गया था।
हत्याकांड की पृष्ठभूमि और नाले से शव की बरामदगी
अभियोजन पक्ष द्वारा अदालत में पेश किए गए घटनाक्रम के अनुसार, 26 फरवरी 2020 को शिकायतकर्ता रविंदर कुमार ने दयालपुर थाने में अपने पुत्र अंकित शर्मा के लापता होने की औपचारिक रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अंकित शर्मा IB में कार्यरत थे और 25 फरवरी 2020 से लापता चल रहे थे। परिजनों को बाद में स्थानीय निवासियों के माध्यम से सूचना मिली कि उपद्रवियों ने एक व्यक्ति की हत्या कर उसके शव को चांद बाग पुलिया स्थित मस्जिद के समीप खजूरी खास नाले में फेंक दिया है। इस सूचना के आधार पर जब खजूरी खास नाले की तलाशी ली गई, तो वहां से अंकित शर्मा का क्षत-विक्षत शव बरामद किया गया। पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच में अंकित शर्मा के शरीर पर कुल 51 गंभीर चोटों के निशान दर्ज किए गए थे।
निचली अदालत का फैसला और दोषियों की सजा
निचली अदालत ने 31 जुलाई को इस मामले पर अपना फैसला सुनाते हुए ताहिर हुसैन के साथ-साथ चार अन्य सह-अभियुक्तों नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को अंकित शर्मा की हत्या का दोषी करार दिया था। अदालत ने इन पांचों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सजा निर्धारण के समय अदालत ने यह टिप्पणी भी की थी कि हालांकि यह अपराध अत्यधिक क्रूर और गंभीर श्रेणी का है, फिर भी यह न्यायशास्त्र के "दुर्लभतम से दुर्लभ" (rarest of rare) सिद्धांत की परिधि में नहीं आता है, जिसके कारण दोषियों को मृत्युदंड की सजा नहीं दी जा सकती।
2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों का व्यापक संदर्भ
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा का दौर 24 फरवरी 2020 को उस समय प्रारंभ हुआ था जब नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थकों और विरोधियों के मध्य हिंसक झड़पें भड़क उठी थीं। देखते ही देखते यह संघर्ष व्यापक सांप्रदायिक हिंसा में बदल गया और कई दिनों तक खजूरी खास, चांद बाग तथा आसपास के क्षेत्रों में आगजनी, पथराव व हत्याएं होती रहीं। इस सांप्रदायिक हिंसा के परिणामस्वरूप कम से कम 53 व्यक्तियों की मृत्यु हुई थी, जबकि सैकड़ों अन्य नागरिक गंभीर रूप से घायल हुए थे और करोड़ों रुपये की संपत्ति नष्ट हो गई थी।



















