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मुख्य परीक्षा में 187 सीटें क्यों रह गईं खाली, सीजीपीएससी ने बताई वजहछत्तीसगढ़
5 सित॰ 2026, 8:14 am (24 मिनट पहले)· 2

मुख्य परीक्षा में 187 सीटें क्यों रह गईं खाली, सीजीपीएससी ने बताई वजह

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 में 795 की बजाय सिर्फ 608 अभ्यर्थियों के इंटरव्यू के लिए चुने जाने पर सफाई दी है और कहा है कि पुनर्मूल्यांकन या पुनर्गणना का कोई नियम नहीं है, सिर्फ आरटीआई से ओएमआर शीट मिलेगी।

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 के इंटरव्यू के लिए जारी हुई सूची पर मचे बवाल को शांत करने के लिए विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। मामला तब उलझा जब नतीजों में तय संख्या 795 के बजाय केवल 608 अभ्यर्थियों के नाम ही इंटरव्यू के लिए चुने गए दिखे। इसके बाद कई परीक्षार्थियों ने अपनी कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन की मांग शुरू कर दी और सोशल मीडिया पर धांधली तक के आरोप लगने लगे। बढ़ते विवाद को देखते हुए आयोग ने हर सवाल का बिंदुवार जवाब देकर पूरी स्थिति साफ कर दी है।

795 नहीं, 608: मिनिमम मार्क्स के नियम ने बिगाड़ा आंकड़ा

सीजीपीएससी की राज्य सेवा परीक्षा-2025 के जरिए 20 अलग-अलग सेवाओं के कुल 265 पदों पर भर्ती की जानी है। तय नियमों के मुताबिक मुख्य परीक्षा के नतीजों के आधार पर विज्ञापित पदों की संख्या से तीन गुना यानी कुल 795 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू राउंड के लिए बुलाया जाना था। लेकिन जब आधिकारिक रिजल्ट जारी हुआ तो सूची में सिर्फ 608 नाम ही सामने आए, जिसने अभ्यर्थियों और उनके परिजनों के बीच हड़कंप मचा दिया। इस अंतर की वजह बताते हुए आयोग ने विज्ञप्ति के सेक्शन 3(iv) और परीक्षा प्रक्रिया नियमों के खंड 7 का हवाला दिया। इसके मुताबिक मुख्य परीक्षा के हर प्रश्न-पत्र में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को कम से कम 33% अंक और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को 23% अंक हासिल करना अनिवार्य है। जो अभ्यर्थी किसी भी एक पेपर में यह न्यूनतम सीमा पार नहीं कर पाया, उसे नियम के तहत स्वत: दौड़ से बाहर मान लिया गया, भले ही उसके कुल अंक बेहतर क्यों न रहे हों। ठीक इसी वजह से 187 सीटें भर ही नहीं पाईं यानी तय 795 की तुलना में 187 अभ्यर्थी कम शॉर्टलिस्ट हो सके। आयोग ने इसे किसी गड़बड़ी या मूल्यांकन में गलती मानने से साफ इनकार किया और कहा कि यह अंतर पूरी तरह नियमों के सख्त अनुपालन का नतीजा है, न कि किसी प्रशासनिक चूक का।

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पुनर्मूल्यांकन-पुनर्गणना पर पूरी तरह रोक, RTI से मिलेगी OMR शीट

रिजल्ट जारी होने के तुरंत बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच या नंबरों की पुनर्गणना की मांग करने लगे थे। आयोग ने विज्ञापन के खंड 11(V) का सीधा हवाला देते हुए इस मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि उसकी परीक्षा प्रणाली में पुनर्मूल्यांकन या पुनर्गणना जैसा कोई नियम सिरे से है ही नहीं। इसका मतलब है कि किसी भी अभ्यर्थी की कॉपी दोबारा नहीं खोली जाएगी और न ही उसके अंक बदले जाएंगे। हालांकि आयोग ने अभ्यर्थियों के लिए संतुष्टि का एक रास्ता जरूर खुला रखा है। जिस किसी अभ्यर्थी को अपने अंकों पर संदेह है, वह सूचना के अधिकार यानी आरटीआई के तहत आवेदन देकर अपनी ओएमआर शीट और उत्तर पुस्तिका की प्रति हासिल कर सकता है। परिणाम और कट-ऑफ दोनों जारी होने के बाद अभ्यर्थी इन दस्तावेजों का मिलान कर खुद अपने स्तर पर स्थिति की पुष्टि कर सकते हैं, लेकिन इसके आधार पर भी कॉपियां दोबारा जांची नहीं जाएंगी। आयोग ने साफ किया कि पारदर्शिता के लिए दस्तावेज दिखाए जा सकते हैं, लेकिन अंक-निर्धारण की प्रक्रिया को दोबारा खोलने का कोई प्रावधान व्यवस्था में शामिल नहीं है।

कोडिंग सिस्टम से जांच, धांधली के हर आरोप को किया खारिज

सोशल मीडिया पर परीक्षा में गड़बड़ी और धांधली को लेकर उठ रहे दावों को आयोग ने सिरे से नकार दिया है। सीजीपीएससी ने बताया कि मुख्य परीक्षा की हर उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन पूरी तरह पहचान छिपाकर, यानी कोडिंग सिस्टम के जरिए किया जाता है। कॉपी जांचने वाले विषय-विशेषज्ञों को यह बिलकुल पता नहीं होता कि वे किस अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिका जांच रहे हैं, क्योंकि नाम और रोल नंबर की जगह सिर्फ एक कोड दर्ज होता है। हर विषय के मूल्यांकन की जिम्मेदारी अलग-अलग विशेषज्ञों की स्वतंत्र टीम को सौंपी जाती है, ताकि किसी एक व्यक्ति के हाथ में पूरी प्रक्रिया न रहे। आयोग के मुताबिक यह पूरी व्यवस्था सुरक्षित और गोपनीय है, जिसमें किसी भी तरह के पक्षपात, सिफारिश या हेरफेर की कोई गुंजाइश ही नहीं बचती। यही वजह है कि आयोग ने नतीजों पर लग रहे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया नियम और प्रक्रिया के दायरे में ही पूरी हुई है।

इंटरव्यू शेड्यूल: दस्तावेज सत्यापन और पद वरीयता की तैयारी

आयोग के मुताबिक इंटरव्यू 21 सितंबर 2026 से शुरू होने की संभावना है। जिन 608 अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है, उन्हें इंटरव्यू की तय तारीख से ठीक एक दिन पहले नवा रायपुर स्थित आयोग कार्यालय में पहुंचकर अपने मूल प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराना अनिवार्य होगा। इसके अलावा चयनित सभी अभ्यर्थियों को जल्द ही ऑनलाइन पोर्टल के जरिए पदों की अग्रमान्यता यानी प्रिफरेंस भी भरनी होगी, जिसमें वे अपनी पसंद के मुताबिक सेवाओं और पदों को क्रम से चुन सकेंगे। आयोग ने कहा है कि यह प्रक्रिया समय पर पूरी करना जरूरी है ताकि आगे की चयन प्रक्रिया बिना किसी देरी के आगे बढ़ सके।

सोशल मीडिया की अफवाहों को लेकर आयोग इतना सख्त क्यों

आयोग ने सभी परीक्षार्थियों और युवाओं से सीधी अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही मनगढ़ंत बातों और भ्रामक अभियानों पर भरोसा न करें। किसी भी तरह के अपडेट के लिए सिर्फ आयोग की आधिकारिक वेबसाइट www.psc.cg.gov.in पर जारी सूचनाओं पर ही यकीन करने की सलाह दी गई है। दरअसल छत्तीसगढ़ में सीजीपीएससी की पुरानी भर्तियों को लेकर सीबीआई और ईडी की जांच पहले से चर्चा और विवाद का विषय रही है, जिसकी वजह से अभ्यर्थी अब हर छोटी-बड़ी बात को लेकर सतर्क और संवेदनशील हो गए हैं। यही कारण है कि इस बार जैसे ही सूची में अंतर दिखा, आयोग ने बिना देर किए विस्तृत स्पष्टीकरण जारी कर अभ्यर्थियों के मन में उठ रही हर आशंका को दूर करने की कोशिश की है।

सवाल-जवाब

795 की जगह सिर्फ 608 अभ्यर्थी ही इंटरव्यू के लिए क्यों चुने गए?
क्योंकि कई अभ्यर्थी हर पेपर में तय न्यूनतम क्वॉलिफाइंग मार्क्स यानी सामान्य वर्ग के लिए 33% और आरक्षित वर्ग के लिए 23% हासिल नहीं कर पाए, जिससे 187 सीटें खाली रह गईं।
क्या आयोग कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन या पुनर्गणना करेगा?
नहीं, आयोग ने साफ कर दिया है कि उसकी परीक्षा प्रणाली में पुनर्मूल्यांकन या पुनर्गणना का कोई नियम ही नहीं है।
अगर किसी अभ्यर्थी को अपने अंकों पर शक है तो वह क्या कर सकता है?
वह आरटीआई के तहत आवेदन देकर अपनी ओएमआर शीट और उत्तर पुस्तिका की कॉपी हासिल कर सकता है, हालांकि इससे कॉपी दोबारा जांची नहीं जाएगी।
उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कैसे किया गया था?
पूरी तरह पहचान छिपाकर कोडिंग सिस्टम के जरिए, ताकि विषय-विशेषज्ञों को यह पता न चले कि वे किस अभ्यर्थी की कॉपी जांच रहे हैं।
इंटरव्यू कब से शुरू हो सकते हैं?
आयोग के मुताबिक इंटरव्यू 21 सितंबर 2026 से शुरू होने की संभावना है।
दस्तावेज सत्यापन कहां और कब होगा?
इंटरव्यू की तय तारीख से ठीक एक दिन पहले नवा रायपुर स्थित आयोग कार्यालय में मूल प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराना अनिवार्य होगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·2 मिनट पहले

मुख्य परीक्षा में न्यूनतम अर्हता अंकों की अनिवार्यता के कारण 187 सीटों का खाली रहना और पुनर्मूल्यांकन का कोई नियम न होना प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि आयोग ने आरटीआई के जरिए ओएमआर शीट देने की बात कही है, लेकिन इस प्रक्रिया से उपजा असंतोष आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है, जिससे युवाओं का आयोग के प्रति विश्वास प्रभावित होना तय है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 मिनट पहले

एक क्राइम और कानूनी मामलों के संवाददाता के रूप में यह देखना अहम है कि न्यूनतम अर्हता अंकों और पुनर्मूल्यांकन पर रोक जैसे नियम तकनीकी रूप से सही हो सकते हैं, लेकिन जब कानूनी विवाद अदालत की चौखट तक पहुँचते हैं, तो इनसे प्रशासनिक मुकदमेबाजी में भारी उछाल आता है। आरटीआई के जरिए ओएमआर शीट मिलने का प्रावधान भले ही कानूनी रास्ता देता है, पर यदि हताश अभ्यर्थी उच्च न्यायालय या प्रशासनिक न्यायाधिकरण में याचिकाएँ दायर करते हैं, तो इससे पूरी चयन प्रक्रिया और विज्ञापित 265 पदों पर होने वाली नियुक्तियों के महीनों या वर्षों तक कानूनी दाँवपेंच में फंसने का जोखिम पैदा हो जाता है, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

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