कानपुर में गंगा नदी का जलस्तर मानसून के इस मौसम के सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जिससे तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है. गंगा बैराज के अपस्ट्रीम में पानी का स्तर 113.11 मीटर दर्ज किए जाने के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से अटल घाट को आम जनता और श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह बंद कर दिया है. इसके साथ ही नदी के बढ़ते बहाव को देखते हुए आगे प्रयागराज से लेकर वाराणसी तक के तटीय इलाकों के लिए सतर्कता निर्देश जारी कर दिए गए हैं.
बैराज पर रिकॉर्ड जलस्तर और अटल घाट पर पाबंदी
प्रशासन ने एहतियातन अटल घाट के मुख्य द्वार पर मजबूत बैरिकेडिंग लगा दी है और नदी की सीढ़ियों की तरफ जाने वाले सभी रास्तों को रस्सियों से बांधकर सील कर दिया है, ताकि कोई भी व्यक्ति जलधारा के करीब न जा सके. सावन महीने के पहले सोमवार का अवसर होने के कारण बड़ी संख्या में कांवड़िए और श्रद्धालु पवित्र गंगाजल लेने के लिए अटल घाट पहुंचे थे, हालांकि सुरक्षा पाबंदियों की वजह से उन्हें बिना जल लिए ही वापस लौटना पड़ा. स्थिति को नियंत्रित रखने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए घाट परिसर के भीतर महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है. शहर के कई अन्य संवेदनशील घाटों पर भी लोगों की आवाजाही को सीमित कर दिया गया है.
हरिद्वार और नरौरा से भारी जल निकासी
सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर उत्तम पाल के अनुसार ऊपरी पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश की वजह से हरिद्वार और नरौरा बांधों से बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है. इसी कारण कानपुर में नदी का जलस्तर तेजी से ऊपर उठ रहा है. सामान्य दिनों में जहां गंगा बैराज से लगभग एक लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है, वहीं सोमवार को बैराज से 2,46,890 क्यूसेक (2.46 लाख क्यूसेक से अधिक) पानी का भारी डिस्चार्ज दर्ज किया गया. इसके अतिरिक्त हरिद्वार से 96,702 क्यूसेक और नरौरा से 53,173 क्यूसेक पानी गंगा में प्रवाहित किया गया है. सिंचाई विभाग का अनुमान है कि ऊपरी इलाकों से पानी का यह प्रवाह आगामी दिनों में भी जारी रह सकता है, जिससे निचले क्षेत्रों में जलस्तर और बढ़ेगा.
शुक्लागंज में चेतावनी बिंदु के पास पानी और गांवों पर संकट
कानपुर के निकट स्थित शुक्लागंज इलाके में भी गंगा का जलस्तर 111.62 मीटर तक पहुंच गया है, जो आधिकारिक चेतावनी बिंदु से मात्र 1.5 मीटर (डेढ़ मीटर) नीचे है. गंगा बैराज के डाउनस्ट्रीम में जलस्तर 112.88 मीटर दर्ज किया गया है. स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि यदि पानी की आवक इसी गति से जारी रही तो तटीय बस्तियों और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बाढ़ का पानी दाखिल हो सकता है. इस स्थिति को देखते हुए संवेदनशील ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी तंत्र को सक्रिय कर दिया गया है.
प्रशासनिक चौकसी और जनसुरक्षा के निर्देश
कानपुर के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने स्थिति का जायजा लेते हुए बताया कि जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग गंगा के जलस्तर पर पल-पल नजर बनाए हुए हैं. सभी संबंधित आपदा प्रबंधन और राहत विभागों को हाई अलर्ट पर रखा गया है तथा किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. जिलाधिकारी ने नागरिकों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे बंद किए गए घाटों या नदी के खतरनाक किनारों पर न जाएं और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करें.



















