बिहार में गंगा नदी पर निर्माणाधीन 3.16 किलोमीटर लंबे सुल्तानगंज-अगुवानी फोरलेन पुल का काम एक बार फिर पूरी तरह ठप हो गया है। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने और उफान के कारण निर्माण स्थल पर काफी जोखिम पैदा हो गया है, जिसके चलते अगले 4 महीनों के लिए काम रोक दिया गया है। करीब 1,710 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार हो रहे इस महत्त्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का सफर शुरुआत से ही हादसों भरा रहा है, जहां निर्माण के दौरान तीन बार सुपरस्ट्रक्चर ढहकर गंगा में समा चुका है।
तीन बार हादसों का शिकार और नया डिजाइन
साल 2015 में शुरू हुए इस पुल निर्माण का प्रारंभिक लक्ष्य 2020 तक इसे बनाकर तैयार करने का रखा गया था। हालांकि, कभी तेज हवाओं के थपेड़ों तो कभी डिजाइन में गंभीर कमियों की वजह से यह ढांचा तीन बार ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इन लगातार असफलताओं के बाद आईआईटी रुड़की से इसका बिल्कुल नया टेक्निकल डिजाइन तैयार करवाया गया। नए नक्शे के आधार पर हाल ही में काम ने रफ्तार पकड़ी थी और अगुवानी की ओर से एप्रोच रोड व टूटे हुए हिस्सों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा था, लेकिन अब गंगा की उफनती लहरों ने एक बार फिर ब्रेक लगा दिया है।
2027 का नया लक्ष्य और चुनौतियां
परियोजना में तैनात इंजीनियरों और अधिकारियों के मुताबिक, पानी के तेज बहाव के बीच नदी के अंदर काम करना तकनीकी रूप से काफी कठिन और खतरनाक हो गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए 4 महीने के लिए सभी गतिविधियां स्थगित की गई हैं। फिलहाल इस फोरलेन प्रोजेक्ट को पूरा करने की अंतिम समयसीमा 2027 निर्धारित की गई है। हालांकि जिस तरह से बार-बार प्राकृतिक और तकनीकी अड़चनें सामने आ रही हैं, उसे देखते हुए तय समय पर इसे पूरा कर पाना बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
पाया नंबर 10 पर विशेष डॉल्फिन वेधशाला
इस पुल का एक आकर्षक पहलू इसमें बनाया जा रहा विशेष व्यूइंग पॉइंट है। प्रोजेक्ट के तहत पुल के पाया नंबर 10 पर एक 'डॉल्फिन वेधशाला' (ऑब्जर्वेटरी) का निर्माण किया जा रहा है। यहां रुककर राहगीर भारत के राष्ट्रीय जलीय जीव, यानी गांगेय डॉल्फिन को गंगा की लहरों में अठखेलियां करते हुए करीब से देख सकेंगे।
भागलपुर, खगड़िया और झारखंड को सीधा लाभ
सुल्तानगंज-अगुवानी पुल के शुरू होने से भागलपुर और खगड़िया जिले के बीच सीधी कनेक्टिविटी स्थापित हो जाएगी, जिससे दोनों क्षेत्रों के बीच की दूरी काफी घट जाएगी। इसके साथ ही यह पुल उत्तरी बिहार और अंग प्रदेश के यात्रियों के लिए झारखंड आवागमन को बेहद सुगम, सुरक्षित और समय बचाने वाला मार्ग प्रदान करेगा।


















