बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक ऐसा खौफनाक मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र से पिछले तीन महीनों से लापता चल रहे लैपटॉप कारोबारी मनोज भगत (48) और उनकी पत्नी मीनू देवी (45) की हत्या का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। इस दोहरे हत्याकांड के पीछे कोई बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि खुद पीड़ित कारोबारी का छोटा भाई निकला है। संपत्ति के लालच और विवाद के चलते छोटे भाई ने इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया था, जिसका खुलासा पुलिस की कड़ी पूछताछ के बाद हुआ है।
संपत्ति विवाद बना खूनी संघर्ष की वजह
ब्रह्मपुरा इलाके में स्थित बथुआ नर्सिंग होम के सामने मनोज भगत का भगत मार्केट नाम से एक कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स है, जहां उनकी लैपटॉप की दुकान चलती थी और उसी परिसर में उनका परिवार रहता था। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि इसी मार्केट और पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर दोनों भाइयों के बीच काफी समय से मनमुटाव और विवाद चल रहा था। यही पारिवारिक रंजिश धीरे-धीरे इतनी गहरी हो गई कि छोटे भाई अविनाश उर्फ अनुज भगत ने अपने ही बड़े भाई और भाभी को रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रच डाली।
इस तरह हुआ था दंपति का रहस्यमय गायब होना
घटना की शुरुआत 20 मई 2026 की रात हुई थी, जब मनोज भगत और उनकी पत्नी अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में घर से गायब हो गए। उनके मोबाइल फोन भी लगातार स्विच ऑफ आ रहे थे। जब काफी तलाश करने के बाद भी उनका कोई सुता नहीं मिला, तो दंपती की इकलौती बेटी शेफाली ने 22 मई को ब्रह्मपुरा थाने में अपने माता-पिता के अपहरण का मामला दर्ज कराया। पुलिस ने जब मामले की गंभीरता को देखते हुए घर की छानबीन की, तो उन्हें घर के कमरों और छत पर खून के संदिग्ध धब्बे मिले। फॉरेसिक साइंस लैबोरेट और डॉग स्क्वायड की जांच से यह स्पष्ट हो गया कि वह इंसानी खून था, जिसके बाद पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और कॉल डिटेल खंगालते हुए अपनी तफ्तीश तेज कर दी।
बेटी के शक की सुई और पुलिस की दबिश
शुरुआत से ही दंपती की बेटी शेफाली का यह आरोप था कि उसके चाचा अविनाश ने संपत्ति हड़पने के मकसद से उसके माता-पिता को गायब किया है। बेटी की इस आशंका को आधार बनाकर पुलिस ने जब अपनी जांच का दायरा बढ़ाया, तो शक की सुई तेजी से अविनाश की तरफ घूमने लगी। एसडीपीओ विनीता सिन्हा ने इस मामले के खुलासे के लिए एक विशेष टीम का गठन किया था, जो बिहार सहित कई अन्य राज्यों में लगातार छापेमारी कर रही थी। इसी बीच, मुख्य संदिग्ध और मृतक का छोटा भाई अविनाश भी 4 जून से अपने ठिकानों से फरार हो गया था, जिसे पुलिस ने अंततः उत्तर प्रदेश के बनारस से धर दबोचा।
बनारस से पकड़े जाने के बाद जब पुलिस ने आरोपी से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। आरोपी ने पुलिस को बताया कि 20 मई की रात को संपत्ति के विवाद को लेकर उसकी अपने बड़े भाई और भाभी के साथ तीखी बहस हुई थी। बात इतनी बढ़ गई कि उसने आवेश में आकर इस दोहरे हत्याकांड को अंजाम दे डाला। पूछताछ में यह भी सामने आया कि उसने पहले घर के अंदर अपने भाई मनोज भगत की हत्या की। पति की चीख-पुकार सुनकर जब मीनू देवी अपनी जान बचाने के लिए छत की तरफ भागीं, तो आरोपी ने वहां भी उनका पीछा किया और उनकी भी हत्या कर दी।
बेडशीट और कंबल में लपेटकर फेंके थे शव
हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए दोनों शवों को बेडशीट और कंबल में लपेट दिया। इसके बाद वह शवों को अपनी गाड़ी में लादकर बोचहां थाना क्षेत्र में दरभंगा फोरलेन के पास ले गया। वहां मुरादपुर चौक के निकट स्थित राधा स्वामी सत्संग आश्रम के पास बनी घनी झाड़ियों में उसने दोनों शवों को ठिकाने लगा दिया। लंबे समय तक शव वहीं पड़े रहने के कारण पूरी तरह कंकाल में बदल चुके थे। दिलचस्प बात यह है कि जिस भूखंड के पास कंकाल मिले, वहां के मालिक ने पुलिस को बताया कि उसी मई के महीने में किसी ने दो मृत गायों को भी लाकर फेंक दिया था। मृत गायों से उठने वाली भीषण सड़ांध के कारण मानव शवों की दुर्गंध पूरी तरह दब गई थी, जिसकी वजह से आसपास के किसी भी व्यक्ति को वहां इंसानी शव होने का शक तक नहीं हुआ।
कंकालों की डीएनए जांच और आगे की कार्रवाई
पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर बोचहां इलाके की उन झाड़ियों से दोनों कंकाल बरामद कर लिए हैं। पुलिस का कहना है कि बरामद अवशेषों की वैज्ञानिक पुष्टि और पहचान के लिए उनका डीएनए परीक्षण कराया जाएगा। इसके अलावा पुलिस इस पहलू पर भी बारीकी से जांच कर रही है कि इस हत्याकांड की साजिश में अविनाश के साथ कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं, तथा सबूत मिटाने और शवों को ट्रांसपोर्ट करने में किसकी मदद ली गई थी। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद से पूरे ब्रह्मपुरा और बोचहां क्षेत्र में सनसनी फैल गई है और स्थानीय लोग इस बात से पूरी तरह स्तब्ध हैं कि पैसों और संपत्ति के लिए कोई अपने ही सगे भाई का कातिल कैसे बन सकता है।


















