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उत्तराखंड में मानसूनी आफत: देहरादून से नैनीताल तक भारी बारिश का अलर्ट, कई मार्ग ठप और स्कूल बंदउत्तराखंड
5 सित॰ 2026, 5:34 am (17 दिन पहले)· 8

उत्तराखंड में मानसूनी आफत: देहरादून से नैनीताल तक भारी बारिश का अलर्ट, कई मार्ग ठप और स्कूल बंद

उत्तराखंड में मौसम ने फिर करवट ली है, जिससे देहरादून और नैनीताल समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। भूस्खलन के कारण कई मुख्य मार्ग बंद हो गए हैं और एहतियात के तौर पर स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है।

उत्तराखंड में मानसून का मिजाज एक बार फिर आक्रामक हो चुका है, जिसके चलते पहाड़ी इलाकों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक जनजीवन बुरी तरह प्रभावित नजर आ रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने 5 सितंबर को प्रदेश के कई प्रमुख जिलों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की है। लगातार हो रही बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं और पहाड़ों से लगातार मलबा गिरने का सिलसिला जारी है, जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

देहरादून और नैनीताल समेत इन जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 5 सितंबर को देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल, नैनीताल, चंपावत, बागेश्वर, उत्तरकाशी और उधम सिंह नगर जिलों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा राज्य के सभी तेरह जिलों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और तेज बौछारें पड़ने का येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। पिछले तीन दिनों से पहाड़ों पर रुक-रुक कर हो रही बरसात ने तापमान में भी भारी गिरावट ला दी है, जिससे मैदानी और पर्वतीय दोनों ही क्षेत्रों में हल्की ठंडक महसूस की जा रही है।

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चमोली और पिथौरागढ़ में रास्ते बंद, संपर्क कटा

सीमांत जिलों में हालात सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। चमोली जिले में पिछले बहत्तर घंटों से जारी बारिश के कारण बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर नंदप्रयाग के पास पहाड़ी से भारी बोल्डर और मलबा लगातार गिर रहा है, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। हालांकि नेशनल हाईवे अथॉरिटी और लोक निर्माण विभाग की मशीनें मलबा हटाने के काम में जुटी हैं, लेकिन गिरते पत्थरों के कारण राहत कार्यों में बाधा आ रही है। इसके अलावा गोपेश्वर-चोपता मोटर मार्ग और लीसा फैक्ट्री बाईपास पर सड़क धंसने से वाहनों की आवाजाही रुक गई है। कुमाऊं मंडल के पिथौरागढ़ जिले में भी सोलह महत्वपूर्ण सड़कें मलबे की चपेट में आने से बंद हो चुकी हैं, जिससे दर्जनों गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है।

नैनीताल में स्कूल बंद और मैदानी जिलों में सतर्कता

खराब मौसम और संभावित भूस्खलन को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। नैनीताल जिले में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए जिला प्रशासन ने 5 सितंबर को सभी सरकारी, गैर-सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित कर दिया है। संवेदनशील पहाड़ी ढलानों पर सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। उधर, उधम सिंह नगर के रुद्रपुर और काशीपुर जैसे मैदानी इलाकों में तेज बारिश के कारण निचले हिस्सों में जलभराव की आशंका जताई गई है, जिससे प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। राजधानी देहरादून और हरिद्वार में भी आकाशीय बिजली चमकने और तीव्र बौछारें पड़ने की चेतावनी के बीच गंगा नदी के जलस्तर पर पैनी नजर रखी जा रही है।

10 सितंबर तक राहत के कोई आसार नहीं

मौसम विभाग का कहना है कि उत्तराखंड के लोगों को फिलहाल इस मानसूनी आपदा से राहत मिलने वाली नहीं है। छह सितंबर को बागेश्वर, नैनीताल, पौड़ी, चमोली, देहरादून और हरिद्वार में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद सात सितंबर को भी नैनीताल, बागेश्वर, उधम सिंह नगर, पौड़ी, चमोली और पिथौरागढ़ के लिए तेज बारिश का अलर्ट है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक आठ, नौ और दस सितंबर को भी राज्य के अनेक हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और गर्जन के साथ बौछारें पड़ने का सिलसिला लगातार बना रहेगा।

सवाल-जवाब

उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट किन जिलों के लिए जारी किया गया है?
मौसम केंद्र देहरादून ने देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल, नैनीताल, चंपावत, बागेश्वर, उत्तरकाशी और उधम सिंह नगर जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
नैनीताल में स्कूल क्यों बंद किए गए हैं?
भारी बारिश और भूस्खलन के गंभीर खतरों को देखते हुए छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के मद्देनजर नैनीताल जिला प्रशासन ने स्कूलों में अवकाश घोषित किया है।
चमोली में कौन सा राष्ट्रीय राजमार्ग प्रभावित हुआ है?
चमोली जिले में नंदप्रयाग के पास बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पहाड़ी से मलबा गिरने के कारण पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है।
पिथौरागढ़ में खराब मौसम के कारण क्या स्थिति है?
पिथौरागढ़ जिले में भूस्खलन और मलबे के कारण सोलह महत्वपूर्ण सड़कें बंद हो चुकी हैं, जिससे दर्जनों गांवों का संपर्क कट गया है।
बारिश का यह दौर कब तक जारी रहने की संभावना है?
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार उत्तराखंड में 10 सितंबर तक राज्य के पर्वतीय और मैदानी जनपदों में बारिश का यह दौर जारी रह सकता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·17 दिन पहले

उत्तराखंड में मानसून का यह आक्रामक दौर केवल स्थानीय जनजीवन को ही बाधित नहीं कर रहा, बल्कि चारधाम यात्रा और सीमावर्ती क्षेत्रों की सामरिक कनेक्टिविटी पर भी गहरा असर डाल रहा है। लगातार भूस्खलन और सड़कों के ठप होने से पर्वतीय जिलों में रसद आपूर्ति और आपातकालीन सेवाओं के चरमराने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। आगामी दस सितंबर तक मौसम के मिजाज में सुधार न होने के संकेत यह बताते हैं कि प्रशासन को आपदा प्रबंधन और राहत तंत्र को और अधिक चुस्त-दुरुस्त करना होगा, ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में फंसे लोगों तक समय पर मदद पहुंचाई जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·17 दिन पहले

इस मानसूनी आपदा का सबसे गंभीर पहलू यह है कि सड़कों के लगातार बंद होने और मलबा गिरने से कानून-व्यवस्था और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र सीधे प्रभावित हो रहे हैं। सीमावर्ती जिलों में संपर्क कटने से पुलिस और राहत दलों के सामने फंसे हुए नागरिकों तक त्वरित सहायता पहुँचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। यदि 10 सितंबर तक मौसम खराब रहा, तो पर्वतीय क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा बलों की आवाजाही को सुचारू रखना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

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