बागेश्वर जिले में आग की चपेट में आकर भारी नुकसान झेलने वाले बदियाकोट आदिबद्री भगवती मंदिर को फिर से संवारने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल के पुनरुद्धार के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और इसमें आने वाले कुल खर्च का आकलन किया जा रहा है। स्थानीय विधायक सुरेश गढ़िया ने स्पष्ट किया है कि इस प्राचीन मंदिर का भव्य पुनर्निर्माण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
इस संबंध में पहले ही मुख्यमंत्री से आर्थिक मदद की गुहार लगाई गई थी, जिसके बाद सरकार ने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य जल्द से जल्द शुरू करने के स्पष्ट निर्देश दे दिए हैं। सरकार की ओर से यह भरोसा दिलाया गया है कि मंदिर के दोबारा निर्माण के लिए हरसंभव वित्तीय और प्रशासनिक मदद मुहैया कराई जाएगी ताकि इस सांस्कृतिक धरोहर को उसका पुराना स्वरूप वापस मिल सके।
यह दर्दनाक हादसा 16 अक्टूबर 2026 की सुबह तड़के हुआ था, जब अचानक भड़की भीषण आग ने मंदिर को अपनी चपेट में ले लिया। आग की लपटें इतनी तेजी से आगे बढ़ीं कि देखते ही देखते पूरा मुख्य ढांचा जलकर खाक हो गया। इस प्राचीन स्थल पर मौजूद अनमोल कुमाऊंनी काष्ठकला और पारंपरिक लकड़ी की बारीक नक्काशी भी पूरी तरह नष्ट हो गई। इस दुखद घटना के बाद से पूरे इलाके के लोगों में भारी निराशा और शोक का माहौल बना हुआ है। शुरुआती आकलनों के मुताबिक इस भीषण हादसे में लगभग चार करोड़ रुपये की संपत्ति और धरोहर का नुकसान हुआ था।
मंदिर समिति के अध्यक्ष भरत दानू ने इस संबंध में जानकारी दी कि आगजनी की इस दुर्घटना से मंदिर को अपूरणीय क्षति पहुंची है। हालांकि उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि जल्द ही भक्त फिर से मंदिर में दर्शन कर सकेंगे और इसकी तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई हैं। मंदिर के निर्माण का ऐलान तो किया जा चुका है, लेकिन इस पूरे कार्य पर कुल कितना खर्च आएगा, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।
भौगोलिक दृष्टिकोण से यह मंदिर कपकोट तहसील मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर एक बेहद दुर्गम क्षेत्र में स्थित है। इलाके की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सड़क मार्ग की चुनौतियों के कारण दमकल वाहन समय पर घटनास्थल पर नहीं पहुंच पाए थे, जिससे आग ने विकराल रूप ले लिया।
इतिहासकारों और विशेषज्ञों के अनुसार इस मंदिर को पांचवीं से आठवीं शताब्दी के बीच का बेहद प्राचीन धार्मिक स्थल माना जाता है। इसकी ख्याति सदियों पुरानी कुमाऊँनी वास्तुकला और उत्कृष्ट लकड़ी की नक्काशी के कारण दूर-दूर तक थी। आग की इस चपेट ने इस अमूल्य ऐतिहासिक धरोहर को भारी क्षति पहुंचाई है। घटना के तुरंत बाद पुलिस और प्रशासन की टीमों ने मौके का मुआयना कर नुकसान का जायजा लिया था। मुख्यमंत्री ने भी इस दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मंदिर के शीघ्र पुनर्निर्माण के आदेश दिए थे। जानकारों का मानना है कि यह हादसा केवल एक मंदिर के जलने की घटना नहीं है, बल्कि कुमाऊं क्षेत्र की सदियों पुरानी धार्मिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है।


















