घर पर ऐसे बनाएं कैरेमलाइज्ड चाय, अदरक और इलायची से स्वाद होगा दोगुनाशाम की चाय के साथ झटपट बनाएं स्वादिष्ट ब्रेड, घी, गुड़ और शहद का यह हेल्दी स्नैकरामायण में सीता के युद्ध वाले सीन पर बोलीं दीपिका चिखलिया, कहा- मुझे ऐसे दृश्य याद नहींदीपावली पर मनेगा लालकृष्ण आडवाणी का 100वां जन्मदिन, दिल्ली स्थित मुख्यालय में जुटेंगे दिग्गजआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियां खरीद रही हैं प्राइवेट वर्क फाइलें और ईमेल, इंडस्ट्री में मची होड़बच्चों की सर्दी और खांसी को न समझें मामूली, जानिए कब यह बन सकती है निमोनिया जैसी गंभीर बीमारीदीवाली के पटाखों से अपनी कार और बाइक को यूं बचाएं, इन जरूरी बातों का रखें ध्यानचेन्नई से शुरू करें ऊटी और कुन्नूर का सफर, आईआरसीटीसी लेकर आया है किफायती टूर पैकेजघर की शोभा बढ़ाने वाला स्नेक प्लांट, रात में भी देता है ऑक्सीजन और क्या इससे आते हैं सांप?सोनिया गांधी की किताब में अरहर दाल का जिक्र, घर पर ऐसे तैयार करें देसी घी और लहसुन के तड़के वाली स्वादिष्ट रेसिपी
बागेश्वर के वज्यूला में बनेगा पहला वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर, 1.60 करोड़ रुपये हुए मंजूरउत्तराखंड
7 नव॰ 2026, 4:16 pm (7 घंटे पहले)· 0

बागेश्वर के वज्यूला में बनेगा पहला वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर, 1.60 करोड़ रुपये हुए मंजूर

बागेश्वर जिले के वज्यूला में 1.60 करोड़ रुपये की लागत से पहला वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा। इस केंद्र के बनने से लेपर्ड और बंदरों के आतंक से स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

बागेश्वर जिले में लगातार बढ़ रहे मानव और वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर लगाम लगाने तथा वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में वन विभाग ने एक अहम कदम उठाया है। जिले के वज्यूला गांव में क्षेत्र का पहला अत्याधुनिक वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना के लिए शासन की ओर से 1 करोड़ 60 लाख रुपये की राशि स्वीकृत कर दी गई है। लगभग डेढ़ हेक्टेयर के विस्तृत भूभाग में बनने वाले इस रेस्क्यू सेंटर में लेपर्ड यानी तेंदुए, लंगूर, बंदर और अन्य प्रकार के जंगली जानवरों को सुरक्षित रखने तथा उनकी उचित देखरेख का पुख्ता इंतजाम किया जाएगा। इस केंद्र के निर्माण से जिले में ही घायल, भटके हुए या पकड़े गए वन्यजीवों को एक सुरक्षित ठिकाना मिल सकेगा।

मानव और वन्यजीव संघर्ष से ग्रामीण परेशान

पिछले कुछ समय से बागेश्वर के ग्रामीण इलाकों और बस्तियों के आसपास मानव और वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। जंगलों से निकलकर वन्यजीवों के लगातार रिहायशी इलाकों की तरफ रुख करने से स्थानीय निवासियों में हर समय दहशत का माहौल बना रहता है। कई मर्तबा तेंदुओं की आवाजाही बढ़ जाने से ग्रामीणों के साथ-साथ छोटे स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी अभिभावकों की चिंताएं काफी बढ़ जाती हैं। इसके अलावा बंदरों और लंगूरों के उत्पात से पहाड़ी क्षेत्रों में खेतीबाड़ी को भारी नुकसान पहुंच रहा है और आम जनजीवन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ऐसे हालात को देखते हुए वन्यजीवों के सुरक्षित रेस्क्यू और उनके बेहतर प्रबंधन के लिए स्थानीय स्तर पर ही एक विशेष केंद्र की आवश्यकता लंबे अरसे से महसूस की जा रही थी।

ये भी पढ़ें

डेढ़ हेक्टेयर भूमि पर मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

प्रभागीय वंशीय अधिकारी प्रकाश चंद्र आर्या ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि वज्यूला में इस रेस्क्यू सेंटर के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए 1.60 करोड़ रुपये की धनराशि मंजूर हो चुकी है। करीब डेढ़ हेक्टेयर भूमि पर विकसित किए जाने वाले इस विशेष केंद्र के भीतर वन्यजीवों को उनकी प्राकृतिक आदतों और जरूरतों के अनुसार रखने, उन्हें समय पर भरपेट भोजन उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य की देखभाल करने के तमाम इंतजाम किए जाएंगे। इसके साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में रेस्क्यू किए जाने वाले वन्यजीवों को महफूज रखने के लिए सभी आवश्यक और आधुनिक बुनियादी सुविधाएं भी चरणबद्ध तरीके से विकसित की जाएंगी।

अब दूसरे जिलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा

प्रभागीय वंशीय अधिकारी प्रकाश चंद्र आर्या का कहना है कि जिले की सीमा के भीतर ही वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर बन जाने से वन विभाग के कामकाज में काफी सुगमता आएगी। अब तक स्थिति यह थी कि किसी भी वन्यजीव का रेस्क्यू करने के बाद जरूरत पड़ने पर उसे मजबूरी में दूसरे जिलों के रेस्क्यू सेंटरों में लंबी दूरी तय करके भेजना पड़ता था। स्थानीय स्तर पर अपना खुद का केंद्र चालू हो जाने के बाद इस पूरी प्रक्रिया में न सिर्फ भारी आसानी होगी, बल्कि रेस्क्यू किए गए बेजुबान जानवरों की देखरेख और चिकित्सा भी बेहद प्रभावी और बेहतर तरीके से सुनिश्चित की जा सकेगी।

बंदर पकड़ने का अभियान जारी और क्यूआरटी तैनात

जिले के विभिन्न इलाकों में बंदरों की बढ़ती समस्या और उनके आतंक पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से वन विभाग की तरफ से विशेष अभियान भी युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। इस विशेष अभियान के तहत अब तक कुल 568 बंदरों को सुरक्षित पकड़ा जा चुका है। इसके अतिरिक्त, मानव और वन्यजीव संघर्ष से जुड़ी किसी भी आकस्मिक घटना पर तुरंत कार्रवाई करने के खातिर जिले की कुल छह वन रेंजों में विशेष क्विक रिस्पांस टीमें तैनात की गई हैं। वन विभाग की इन सभी टीमों में प्रत्येक के हिसाब से पांच-पांच प्रशिक्षित कर्मचारियों को शामिल किया गया है, जो किसी भी आपात सूचना पर तुरंत मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभालते हैं।

सवाल-जवाब

वज्यूला वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर के निर्माण के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई है?
इस रेस्क्यू सेंटर के निर्माण के लिए 1 करोड़ 60 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
यह रेस्क्यू सेंटर कितने क्षेत्रफल में बनाया जाएगा?
यह वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर लगभग डेढ़ हेक्टेयर के क्षेत्र में विकसित किया जाएगा।
इस केंद्र में किन मुख्य वन्यजीवों को रखा जाएगा?
इस केंद्र में लेपर्ड यानी तेंदुए, लंगूर, बंदर और अन्य रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों को सुरक्षित रखा जाएगा।
जिले में बंदरों को पकड़ने के लिए अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
बंदरों की समस्या से निपटने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत अब तक 568 बंदरों को पकड़ा जा चुका है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए कितनी क्विक रिस्पांस टीमें बनाई गई हैं?
जिले की छह वन रेंजों में क्विक रिस्पांस टीमें गठित की गई हैं, जिनमें प्रत्येक टीम में पांच कर्मचारी शामिल हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp