बागेश्वर जिले में लगातार बढ़ रहे मानव और वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर लगाम लगाने तथा वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में वन विभाग ने एक अहम कदम उठाया है। जिले के वज्यूला गांव में क्षेत्र का पहला अत्याधुनिक वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना के लिए शासन की ओर से 1 करोड़ 60 लाख रुपये की राशि स्वीकृत कर दी गई है। लगभग डेढ़ हेक्टेयर के विस्तृत भूभाग में बनने वाले इस रेस्क्यू सेंटर में लेपर्ड यानी तेंदुए, लंगूर, बंदर और अन्य प्रकार के जंगली जानवरों को सुरक्षित रखने तथा उनकी उचित देखरेख का पुख्ता इंतजाम किया जाएगा। इस केंद्र के निर्माण से जिले में ही घायल, भटके हुए या पकड़े गए वन्यजीवों को एक सुरक्षित ठिकाना मिल सकेगा।
मानव और वन्यजीव संघर्ष से ग्रामीण परेशान
पिछले कुछ समय से बागेश्वर के ग्रामीण इलाकों और बस्तियों के आसपास मानव और वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। जंगलों से निकलकर वन्यजीवों के लगातार रिहायशी इलाकों की तरफ रुख करने से स्थानीय निवासियों में हर समय दहशत का माहौल बना रहता है। कई मर्तबा तेंदुओं की आवाजाही बढ़ जाने से ग्रामीणों के साथ-साथ छोटे स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी अभिभावकों की चिंताएं काफी बढ़ जाती हैं। इसके अलावा बंदरों और लंगूरों के उत्पात से पहाड़ी क्षेत्रों में खेतीबाड़ी को भारी नुकसान पहुंच रहा है और आम जनजीवन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ऐसे हालात को देखते हुए वन्यजीवों के सुरक्षित रेस्क्यू और उनके बेहतर प्रबंधन के लिए स्थानीय स्तर पर ही एक विशेष केंद्र की आवश्यकता लंबे अरसे से महसूस की जा रही थी।
डेढ़ हेक्टेयर भूमि पर मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
प्रभागीय वंशीय अधिकारी प्रकाश चंद्र आर्या ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि वज्यूला में इस रेस्क्यू सेंटर के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए 1.60 करोड़ रुपये की धनराशि मंजूर हो चुकी है। करीब डेढ़ हेक्टेयर भूमि पर विकसित किए जाने वाले इस विशेष केंद्र के भीतर वन्यजीवों को उनकी प्राकृतिक आदतों और जरूरतों के अनुसार रखने, उन्हें समय पर भरपेट भोजन उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य की देखभाल करने के तमाम इंतजाम किए जाएंगे। इसके साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में रेस्क्यू किए जाने वाले वन्यजीवों को महफूज रखने के लिए सभी आवश्यक और आधुनिक बुनियादी सुविधाएं भी चरणबद्ध तरीके से विकसित की जाएंगी।
अब दूसरे जिलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा
प्रभागीय वंशीय अधिकारी प्रकाश चंद्र आर्या का कहना है कि जिले की सीमा के भीतर ही वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर बन जाने से वन विभाग के कामकाज में काफी सुगमता आएगी। अब तक स्थिति यह थी कि किसी भी वन्यजीव का रेस्क्यू करने के बाद जरूरत पड़ने पर उसे मजबूरी में दूसरे जिलों के रेस्क्यू सेंटरों में लंबी दूरी तय करके भेजना पड़ता था। स्थानीय स्तर पर अपना खुद का केंद्र चालू हो जाने के बाद इस पूरी प्रक्रिया में न सिर्फ भारी आसानी होगी, बल्कि रेस्क्यू किए गए बेजुबान जानवरों की देखरेख और चिकित्सा भी बेहद प्रभावी और बेहतर तरीके से सुनिश्चित की जा सकेगी।
बंदर पकड़ने का अभियान जारी और क्यूआरटी तैनात
जिले के विभिन्न इलाकों में बंदरों की बढ़ती समस्या और उनके आतंक पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से वन विभाग की तरफ से विशेष अभियान भी युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। इस विशेष अभियान के तहत अब तक कुल 568 बंदरों को सुरक्षित पकड़ा जा चुका है। इसके अतिरिक्त, मानव और वन्यजीव संघर्ष से जुड़ी किसी भी आकस्मिक घटना पर तुरंत कार्रवाई करने के खातिर जिले की कुल छह वन रेंजों में विशेष क्विक रिस्पांस टीमें तैनात की गई हैं। वन विभाग की इन सभी टीमों में प्रत्येक के हिसाब से पांच-पांच प्रशिक्षित कर्मचारियों को शामिल किया गया है, जो किसी भी आपात सूचना पर तुरंत मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभालते हैं।


















