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वापसी से पहले सक्रिय हुआ मानसून, कई राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनीभारत
20 सित॰ 2026, 6:58 am (11 दिन पहले)· 4

वापसी से पहले सक्रिय हुआ मानसून, कई राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी

बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में बन रही मौसमी हलचल के कारण दक्षिण भारत से लेकर राजस्थान तक भारी बारिश और तेज आंधी के आसार बने हुए हैं.

देश से विदाई की तैयारी के बीच मानसून का असर एक बार फिर कई हिस्सों में गहराने लगा है. 20 सितंबर के ताजा मौसमी बदलावों को देखते हुए देश के तटीय, दक्षिणी, मध्य और पूर्वी भूभागों में जोरदार बारिश और तेज सतही हवाओं की संभावना बनी हुई है. समुद्री वातावरण में बढ़ती सक्रियता के चलते द्वीपों और मुख्य भूमि के तमाम इलाकों में मौसम विभाग ने सतर्कता बरतने की बात कही है. इस मौसमी तंत्र का प्रभाव न केवल समुद्री सीमाओं से सटे राज्यों पर नजर आ रहा है, बल्कि अंदरूनी मैदानी क्षेत्रों में भी आंधी और गरज-चमक के हालात तैयार हो रहे हैं.

दक्षिण भारत और तटीय इलाकों में तेज आंधी के साथ भारी बारिश के आसार

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के आसपास बना वायुमंडलीय दबाव दक्षिण भारतीय राज्यों में बारिश की गतिविधियां बढ़ा रहा है. तटीय आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कर्नाटक और तेलंगाना के विस्तृत इलाकों में मूसलाधार पानी गिरने का अनुमान व्यक्त किया गया है. इन क्षेत्रों में बादलों के घिरने के साथ-साथ हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. तटीय पट्टी पर तेज झोंकों के साथ बादलों की यह सक्रियता सामान्य जनजीवन और दैनिक आवागमन को भी प्रभावित कर सकती है.

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समुद्र के भीतर भी मौसमी उथल-पुथल काफी बढ़ चुकी है. अंडमान सागर तथा बंगाल की खाड़ी के निकटवर्ती क्षेत्रों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चल रही हैं, जिनके झोंके 65 किलोमीटर प्रति घंटे के स्तर को छू सकते हैं. दक्षिण-पश्चिम अरब सागर और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में भी पानी की स्थिति उग्र रहने की चेतावनी दी गई है, जिसके चलते वहां जाने वाले मछुआरों को गहरे पानी से दूर रहने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा पूर्वोत्तर के राज्यों में भी बादलों के बीच आकाशीय बिजली गिरने का जोखिम बना हुआ है.

पूर्वी और मध्य भारत में गहराएगा मौसमी दबाव

पूर्वी राज्यों की बात करें तो झारखंड और पश्चिम बंगाल में मौसमी गतिविधियां काफी व्यापक रहने का अंदेशा है. झारखंड के भीतर 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से सतही हवाएं चलने और बादलों की तीव्र गर्जना के साथ बारिश होने का पूर्वानुमान है. खुले मैदानों में आकाशीय बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए लोगों को पेड़ों के नीचे शरण न लेने तथा खेतों में कामकाज के दौरान चौकन्ना रहने की हिदायत दी गई है.

पश्चिम बंगाल के अनेक जिलों में मौसम का रुख बेहद तल्ख रहने की आशंका जताई गई है. कोलकाता, हावड़ा, मालदा, बीरभूम, दार्जिलिंग, पुरुलिया, कालिम्पोंग, दुर्गापुर, नादिया और मुर्शिदाबाद जैसे शहरों और कस्बों में आंधी और तेज बारिश के आसार हैं. इन जगहों पर हवाओं की चाल 55 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक जा सकती है. इस दौरान कोलकाता शहर का अधिकतम तापमान 31 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज होने की संभावना है. तेज झक्कड़ों की वजह से कमजोर संरचनाओं और पेड़ों को क्षति पहुंचने का खतरा बना रहेगा.

उत्तर और पश्चिमी राज्यों में बादलों की सक्रियता

बिहार के कई जिलों में भी पड़ोसी राज्यों में बने चक्रवाती प्रभाव के चलते घने बादल छा सकते हैं. स्थानीय स्तर पर गरज-चमक के साथ बारिश होने की स्थिति में खुले स्थानों और खेतों में काम कर रहे किसानों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की जरूरत बताई गई है. मध्य प्रदेश के कई संभागों में भी 20 सितंबर को हवा और गरज के साथ बारिश की स्थिति बनी रहने वाली है.

उत्तर प्रदेश के पश्चिमी तथा मध्य इलाकों में आसपास के मौसमी सिस्टम की वजह से बादलों का जमावड़ा बना रहेगा. अचानक उठने वाली तेज हवाओं और आकाशीय बिजली के खतरे को देखते हुए ग्रामीण इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है. दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में किसी भीषण वर्षा का आधिकारिक बुलेटिन नहीं है, लेकिन उत्तरी व मध्य भारत में जारी हलचल के चलते स्थानीय स्तर पर बादलों की मौजूदगी और अचानक मौसमी तब्दीली की उम्मीद की जा सकती है.

राजस्थान के जिलों में 70 किमी की रफ्तार से चल सकती है आंधी

पश्चिमी भारत के राजस्थान में मौसमी विक्षोभ का असर सबसे तीव्र हवाओं के रूप में सामने आ सकता है. जयपुर, सवाई माधोपुर, झुंझुनू, सीकर, अजमेर, टोंक, बीकानेर, जैसलमेर, चूरू, बूंदी, चित्तौड़गढ़, धौलपुर और भरतपुर के जिलों में मूसलाधार बारिश के साथ भीषण आंधी का अलर्ट जारी है. इन क्षेत्रों में हवा की गति 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की सीमा तक पहुंच सकती है. जयपुर शहर का तापमान अधिकतम 33 डिग्री तथा न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है, जहां सड़कों पर तेज धूल भरी आंधी और हवाओं के कारण वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतनी होगी.

सवाल-जवाब

20 सितंबर को किन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है?
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, तटीय आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और तेलंगाना समेत कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है.
समुद्र में हवा की रफ्तार कितनी रहने का अनुमान है?
अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिनके झोंके 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं.
पश्चिम बंगाल के किन प्रमुख इलाकों में आंधी और बारिश का अलर्ट है?
कोलकाता, हावड़ा, मालदा, बीरभूम, दार्जिलिंग, पुरुलिया, कालिम्पोंग, दुर्गापुर, नादिया और मुर्शिदाबाद में 55 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी और भारी बारिश के आसार हैं.
राजस्थान में मौसम को लेकर क्या चेतावनी जारी की गई है?
जयपुर, जैसलमेर, बीकानेर और चूरू समेत 13 जिलों में 60 से 70 किमी प्रति घंटे की तूफानी हवाओं और भारी बारिश की चेतावनी दी गई है.
दिल्ली और एनसीआर में मौसम का मिजाज कैसा रहेगा?
दिल्ली-एनसीआर में किसी भारी बारिश की चेतावनी नहीं है, लेकिन आसपास के राज्यों में बदलाव के चलते बादल छाने और स्थानीय गरज-चमक की संभावना बन सकती है.
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टिप्पणियाँ 5

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·10 दिन पहले

मानसून के इस अंतिम दौर की सक्रियता केवल तटीय राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बन रहे कम दबाव के क्षेत्र भारत के कृषि और आपूर्ति цепо (सप्लाई चेन) को भी प्रभावित कर सकते हैं। झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे पूर्वी राज्यों में तेज हवाओं और बिजली गिरने की आशंका के बीच खेतों में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। यदि यह समुद्री उथल-पुथल ऐसे ही बनी रही, तो कृषि उपज के नुकसान के साथ-साथ त्योहारी सीजन से पहले स्थानीय अर्थव्यवस्था और परिवहन पर भी इसका असर दिख सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·10 दिन पहले

मानसून की इस आखिरी विदाई बेला में मौसमी हलचल का यह दौर केवल मौसम विभाग की चेतावनी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कृषि क्षेत्रों और तटीय अर्थव्यवस्था पर भी सीधा असर पड़ रहा है। झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में धान की फसलों को तेज हवाओं और आकाशीय बिजली से बचाना किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसके अलावा, समुद्री गतिविधियों पर रोक लगने से आजीविका प्रभावित हो सकती है, जिस पर प्रशासन को विशेष नजर रखनी होगी।

Meera Joshi@meera-joshi·10 दिन पहले

अर्जुन की इस बात को आगे बढ़ाते हुए, इस तरह के अचानक और तीव्र मौसमी बदलावों का सीधा असर आम जनजीवन और मानसिक कल्याण पर भी पड़ता है। अनिश्चित मौसम और तटीय इलाकों में सुरक्षा की चिंताएं लोगों के बीच तनाव, अनिद्रा और सामूहिक मानसिक दबाव को बढ़ा सकती हैं। किसानों और मछुआरों के लिए आजीविका का यह संकट उनके परिवारों में गहरी अनिश्चितता पैदा करता है, जिससे उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित होती है। प्रशासनिक स्तर पर केवल भौतिक नुकसान से निपटने के साथ-साथ प्रभावित समुदायों को मनोवैज्ञानिक सहयोग और संबल देना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि वे इस कठिन समय में मानसिक रूप से मजबूत रह सकें।

Karan Malhotra@karan-malhotra·10 दिन पहले

यह मौसमी उथल-पुथल न केवल प्राकृतिक घटना है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए भी एक गंभीर चुनौती है। मौसम विभाग की इन चेतावनियों के बीच आपदा प्रबंधन और पुलिस प्रशासन को निचले और संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरतनी होगी। तेज हवाओं और आकाशीय बिजली के खतरे को देखते हुए तटीय और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन कराना आवश्यक होगा, ताकि किसी भी अनहोनी या जानमाल के नुकसान को टाला जा सके।

Ravikash Gupta@ravikash·10 दिन पहले

मानसून की इस अप्रत्याशित वापसी और समुद्री हलचल का असर केवल जनजीवन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कृषि और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी तात्कालिक प्रभाव पड़ेगा। तटीय क्षेत्रों में मछली पकड़ने के कार्यों पर रोक और पूर्वी भारत के कृषि क्षेत्रों में एहतियाती उपायों से स्थानीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर गतिविधियां कुछ समय के लिए बाधित हो सकती हैं। फसल कटाई के इस दौर में मौसम की यह अनिश्चितता ग्रामीण बाजारों और कमोडिटी आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है, जिस पर वित्तीय विश्लेषकों की नजर रहेगी।

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