भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने 20 अक्टूबर को सेवा के विमान में अपनी आखिरी उड़ान पूरी की। चार दशक से भी अधिक समय तक आसमान छूने के बाद उनका सक्रिय उड़ान सफर एक यादगार मोड़ पर पहुंचा। इस विदाई उड़ान के लिए उन्होंने वायुसेना के एचजेटी-16 किरण एमके-1 प्रशिक्षण विमान को चुना। विमान के कॉकपिट में उनके साथ वही शख्स मौजूद थे जिन्होंने वर्षों पहले उन्हें उड़ना सिखाया था। उनके पहले उड़ान प्रशिक्षक विंग कमांडर वीएस कोचर (रिटायर) इस विशेष मौके पर उनके साथ सह-पायलट के तौर पर सवार हुए। दोनों अधिकारियों ने यू-707 नंबर वाले विमान से 55 मिनट तक आसमान में चक्कर लगाया और इस विदाई पल को हमेशा के लिए खास बना दिया।
चार दशक पुराने सफर का भावनात्मक समापन
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के उड़ान करियर की शुरुआत 28 जनवरी 1984 को हुई थी, जब उन्होंने पहली बार किसी विमान को नियंत्रित किया था। उस पहली उड़ान से लेकर अब तक चार दशकों से ज्यादा वक्त बीत चुका है। इस पूरे दौर में उनका जुड़ाव भारतीय आसमान और लड़ाकू विमानों से अटूट रहा। अपने शानदार करियर के इस अंतिम पड़ाव पर उन्होंने उसी तरह के किरण एमके-1 विमान को चुना, जिससे कभी उन्होंने बुनियादी गुर सीखे थे। एचजेटी-16 किरण विमान भारतीय वायुसेना के बेड़े का एक ऐतिहासिक हिस्सा रहा है, जिसने देश भर के अनगिनत युवा पायलटों को आसमान में उतरने के लिए तैयार किया है।
कॉकपिट में गुरु और शिष्य का दुर्लभ संगम
इस उड़ान की सबसे भावुक बात कॉकपिट में गुरु और शिष्य का एक साथ बैठना रही। विंग कमांडर वीएस कोचर (रिटायर) ने एपी सिंह को उनके करियर के बिल्कुल शुरुआती दौर में उड़ान प्रशिक्षण दिया था। जब किसी युवा कैडेट को पहली बार आसमान में ले जाया जाता है, तो उस समय बना विश्वास जीवन भर कायम रहता है। 20 अक्टूबर को 55 मिनट तक चले इस सफर ने उसी पुराने रिश्ते को दोबारा जीवंत कर दिया। जिस प्रशिक्षक ने कभी एपी सिंह की पहली उड़ान की निगरानी की थी, वही चार दशक बाद वायुसेना प्रमुख के रूप में उनकी अंतिम उड़ान के भी गवाह बने। यह दृश्य वायुसेना के भीतर पीढ़ियों से चले आ रहे अनुशासन, सम्मान और मार्गदर्शन की परंपरा को बयां करता है।
प्रशिक्षण परंपरा और प्रशिक्षकों का अमूल्य योगदान
एचजेटी-16 किरण भारतीय वायुसेना के प्रशिक्षण इतिहास में मील का पत्थर माना जाता है। इस विमान ने कई पीढ़ियों के पायलटों को तकनीकी रूप से सक्षम और अनुशासित बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाई है। वायुसेना में उड़ान प्रशिक्षक केवल नियंत्रण संभालना या तकनीकी कौशल नहीं सिखाते, बल्कि वे एक पायलट के भीतर जिम्मेदारी, सटीक निर्णय लेने की क्षमता और गंभीर परिस्थितियों में शांत रहने का संस्कार भी गढ़ते हैं। यह मार्गदर्शन प्रशिक्षण केंद्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि एक अधिकारी के पूरे सेवाकाल में उसके फैसलों का आधार बना रहता है। एयर चीफ मार्शल की इस विदाई उड़ान ने उसी समृद्ध प्रशिक्षण संस्कृति और प्रशिक्षकों के निस्वार्थ योगदान को एक गरिमापूर्ण सम्मान दिया।
नए नेतृत्व की ओर कदम
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह इसी महीने अपनी लंबी सेवा के बाद सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनके स्थान पर केंद्र सरकार ने एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को भारतीय वायुसेना का नया प्रमुख नियुक्त किया है। वर्तमान में वायुसेना उपप्रमुख की जिम्मेदारी संभाल रहे एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित 31 अक्टूबर को औपचारिक तौर पर वायुसेना प्रमुख का पदभार ग्रहण करेंगे। इस बदलाव से पहले किरण एमके-1 विमान में भरी गई यह 55 मिनट की उड़ान भारतीय वायुसेना के इतिहास में गुरु-शिष्य की निष्ठा और गौरवशाली परंपरा के प्रतीक के रूप में दर्ज हो गई है।



















