भरतपुर स्थित वैश्विक स्तर पर विख्यात केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटन सीजन का आगाज होने के साथ ही वन्यजीवों और पक्षियों की आवाजाही में तेजी दर्ज की जाने लगी है। इस प्रतिष्ठित पार्क में देशी और विदेशी प्रजाति के मेहमान पक्षियों की मौजूदगी सैलानियों के लिए मुख्य केंद्र बिंदु बनी हुई है। इसी सिलसिले के बीच रंगीन सारस यानी पेंटेड स्टॉर्क ने पेड़ों की शाखाओं पर अपने घोंसले बुनने और कॉलोनियों को बसाने की तैयारियां तेज कर दी हैं। इन पक्षियों की सक्रियता से पूरे अभयारण्य का प्राकृतिक परिवेश बेहद जीवंत और मनमोहक प्रतीत होने लगा है।
जैव विविधता का अनूठा केंद्र और प्रवासी पक्षियों की आमद
यह राष्ट्रीय उद्यान अपनी उत्कृष्ट जैव विविधता और अनगिनत पक्षी प्रजातियों के कारण पूरे विश्व में अपनी विशेष पहचान रखता है। प्रत्येक वर्ष शीतकाल की शुरुआत होते ही यहां विशाल संख्या में प्रवासी पक्षी लंबी उड़ान भरकर पहुंचते हैं। जैसे ही पर्यटन सत्र का श्रीगणेश होता है, देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों का तांता भी लगना शुरू हो जाता है। ऐसे में पार्क के भीतर पक्षियों की यह हलचल और यहां के रमणीय प्राकृतिक दृश्य सैलानियों को अपनी ओर खींच रहे हैं। प्रकृति और वन्यजीवों को करीब से देखने की चाह रखने वालों के लिए यह समय बेहद अनुकूल साबित हो रहा है।
पेड़ों पर कॉलोनियां और घोंसले बसाने में जुटे पेंटेड स्टॉर्क
इन दिनों पार्क परिसर में पेंटेड स्टॉर्क पेड़ों की ऊंची डालियों पर बैठकर अपने आशियाने और घोंसले बनाने के काम में तल्लीन नजर आ रहे हैं। इस प्रजाति के पक्षियों की यह विशेषता होती है कि वे झुंड में रहना पसंद करते हैं और एक ही पेड़ पर कई घोंसले तैयार करके अपनी बस्तियां बसा लेते हैं। घोंसलों का यह निर्माण कार्य उनके प्रजनन चक्र का एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। इस अवधि में ये पक्षी सूखे तिनके और अन्य प्राकृतिक सामग्री को एकत्र कर अपने सुरक्षित घोंसले को अंतिम रूप देते हैं। पेंटेड स्टॉर्क के साथ-साथ अन्य पक्षियों की विभिन्न प्रकार की गतिविधियां भी पार्क की रौनक में चार चांद लगा रही हैं। एक साथ बड़ी संख्या में पक्षियों का दिखना और पेड़ों पर उनका घोंसला बनाना बर्ड वॉचर्स और फोटोग्राफरों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है।
साइकिल और रिक्शा से लुत्फ उठा रहे पर्यटक
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में चलने वाले इस पर्यटन सीजन के दौरान विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी सैलानी पहुंच रहे हैं। यहां आने वाले लोग प्रदूषण मुक्त माध्यमों जैसे साइकिल, रिक्शा और पैदल चलकर पार्क का भ्रमण करते हैं और पक्षियों की हरकतों को बहुत करीब से निहारते हैं। पक्षियों की उड़ान, उनके आपसी संवाद और प्राकृतिक गतिविधियों को अपने कैमरों के फ्रेम में कैद करने के लिए देश के कोने-कोने से वन्यजीव फोटोग्राफर भी यहां डेरा डालते हैं। पर्यटन सत्र की शुरुआत के साथ ही इस उद्यान की फिजाओं में गूंजती पक्षियों की चहचहाहट और यहां का नैसर्गिक सौंदर्य सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर रहा है। पेंटेड स्टॉर्क की इस सक्रियता ने अभयारण्य की खोई हुई रौनक को और अधिक बढ़ा दिया है।



















