राजस्थान के स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों की हलचल ने राज्य की सियासत में नया मोड़ ला दिया है। नामांकन प्रक्रिया के आखिरी दिन कई बड़े राजनीतिक परिवारों के सदस्यों ने चुनावी मैदान में उतरकर समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। सीकर जिले से लेकर दौसा तक नेताओं के रिश्तेदारों की उम्मीदवारी इस चुनाव का सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन गई है। सीकर में नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा के पूरे कुनबे ने ही चुनाव में अपनी दावेदारी पेश कर दी है, जिससे राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
सीकर में मंत्री झाबर सिंह खर्रा के परिवार का दबदबा और निर्दलीय दांव
श्रीमाधोपुर पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाले विभिन्न वार्डों में मंत्री झाबर सिंह खर्रा के परिवार के सदस्यों ने पर्चे दाखिल किए हैं। मंत्री की पत्नी शांति देवी ने वार्ड संख्या 17 से भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक टिकट पर अपना नामांकन पत्र भरा है। उनके साथ ही उनके छोटे बेटे अजय सिंह खर्रा ने भी वार्ड संख्या 20 से भाजपा के प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल किया है। हालांकि चुनावी तस्वीर का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि मंत्री के बड़े बेटे दुर्गा सिंह खर्रा इन दोनों से पहले ही वार्ड संख्या 19 से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतर चुके हैं। इस तरह अकेले श्रीमाधोपुर पंचायत समिति के तीन अलग-अलग वार्डों में खर्रा परिवार के तीन सदस्य चुनावी मुकाबले में आमने-सामने की स्थिति बना रहे हैं, जहां पार्टी के टिकट और बगावत दोनों रंग नजर आ रहे हैं।
परिवार के अन्य सदस्यों की जिला परिषद और स्थानीय स्तर पर दावेदारी
केवल सीकर के श्रीमाधोपुर तक ही यह मामला सीमित नहीं है, बल्कि खर्रा परिवार का दायरा जिला परिषद चुनाव तक फैल चुका है। मंत्री झाबर सिंह खर्रा के भाई की पत्नी ने भी जिला परिषद के चुनाव के लिए निर्दलीय रूप से अपना नामांकन दाखिल किया है। एक ही परिवार के भीतर से अलग-अलग वार्डों और निकायों में उतरी इन तमाम दावेदारियों ने स्थानीय स्तर पर सियासी चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। एक तरफ जहां घर के कुछ सदस्य पार्टी के बैनर तले वोट मांग रहे हैं, वहीं परिवार के अन्य सदस्य निर्दलीय ताल ठोककर मुकाबले को और अधिक पेचीदा बना रहे हैं।
दौसा में सिकराय विधायक विक्रम बंशीवाल के परिवार का बड़ा राजनीतिक कदम
सीकर के बाद दौसा जिले में भी पंचायत चुनाव के आखिरी दिन एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। सिकराय विधायक विक्रम बंशीवाल की माता कौशल्या बंशीवाल ने वार्ड संख्या 21 से चुनावी मैदान में उतरते हुए अपना नामांकन दाखिल किया है। निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान इस वार्ड से शुरुआत में ऊषा बैरवा का नाम तय माना जा रहा था, लेकिन नामांकन के बिल्कुल अंतिम समय पर रणनीति बदलते हुए उम्मीदवार का नाम बदल दिया गया और कौशल्या बंशीवाल को मैदान में उतार दिया गया। विक्रम बंशीवाल के परिवार का दौसा की राजनीति से पुराना और गहरा नाता रहा है, क्योंकि उनके पिता जियालाल बंशीवाल इस जिले के पहले जिला प्रमुख रह चुके हैं।
ममता भूपेश और अन्य राजनीतिक दिग्गजों के परिवार भी मैदान में
दौसा जिले में केवल एक ही सियासी घराना सक्रिय नहीं है, बल्कि कई अन्य बड़े राजनीतिक परिवारों के चेहरे भी पंचायत चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी की पूर्व मंत्री ममता भूपेश की बेटी देवांगना ने भी पंचायत चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र भरा है। इसके अलावा विधायक डीसी बैरवा की पत्नी बीना बैरवा ने भी चुनावी रण में उतरने के लिए आधिकारिक रूप से पर्चा दाखिल किया है। इन तमाम नेताओं की माताओं, पत्नियों और बेटियों के मैदान में उतरने से दौसा का चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प और हाई-प्रोफाइल हो गया है, जहां हर वार्ड में दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है।
विपक्ष की ओर से सचिन पायलट का भाजपा पर तीखा राजनीतिक कटाक्ष
इस पूरे चुनावी घटनाक्रम के बीच राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने सत्तारूढ़ भाजपा पर जोरदार हमला बोलते हुए बड़ा कटाक्ष किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जनता पार्टी की सरकार पर भरोसे की बात आती है, तो स्थिति यह है कि पार्टी के एक कद्दावर मंत्री के अपने बेटे को ही इस बात का भरोसा नहीं है कि उन्हें जनता वोट देगी या नहीं। पायलट के इस तीखे बयान का मुख्य निशाना खर्रा परिवार के भीतर चल रहा वह घटनाक्रम है, जिसमें मंत्री के एक बेटे ने पार्टी के खिलाफ जाकर निर्दलीय पर्चा भर दिया है और बाकी परिजन भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं।























