जालोर जिले के खेतों में रबी सीजन की एक बेहद महत्वपूर्ण और फायदेमंद फसल की बुवाई का दौर शुरू हो चुका है। कम पानी के इस्तेमाल से बंपर पैदावार और शानदार मुनाफा देने के लिए मशहूर ईसबगोल की खेती का सीजन आ गया है। स्थानीय किसान अक्टूबर के आखिरी हफ्ते से लेकर नवंबर के शुरुआती दो हफ्तों के बीच इसकी बुवाई कर सकते हैं। कृषि जानकारों के अनुसार करीब 15 नवंबर तक का समय ईसबगोल के बीज बोने के लिए सबसे आदर्श माना जाता है। जालोर इलाके में इस औषधीय फसल की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है, जिससे यहां के किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
इसकी खेती के लिए प्रकृति ने जालोर की जलवायु को काफी अनुकूल बनाया है। हल्की बलुई दोमट मिट्टी और ठंडा व सूखा मौसम ईसबगोल के पौधों के विकास के लिए सबसे सही रहता है। हालांकि किसानों को इस बात का खास ख्याल रखना पड़ता है कि खेत में पानी का जमाव न हो या लगातार बारिश न हो, क्योंकि ऐसी स्थिति में फसल को भारी नुकसान पहुंच सकता है। जालोर के किसान सोहनलाल के मुताबिक ईसबगोल की बेहतरीन पैदावार हासिल करने के लिए खेत की जुताई और तैयारी बहुत ही करीने से की जानी चाहिए ताकि मिट्टी में नमी का संतुलन सही रहे।
तय समय पर बुवाई करने से पौधों का विकास तेजी से और सही दिशा में होता है। बीज डालने के बाद पहली सिंचाई हमेशा फव्वारा विधि के जरिए की जानी चाहिए, ताकि खेत के हर कोने में पानी की मात्रा एक समान पहुंचे। चूंकि यह कम पानी की खपत वाली फसल है, इसलिए इसमें अन्य रबी फसलों की तुलना में पानी की बहुत कम जरूरत पड़ती है। मौसम और मिट्टी की स्थिति के मुताबिक ईसबगोल की पूरी फसल आमतौर पर लगभग 100 से 125 दिनों के भीतर पूरी तरह कटाई के लिए तैयार हो जाती है। फव्वारा सिंचाई के इस्तेमाल से पानी की बचत होती है और पौधे स्वस्थ रहते हैं।
ईसबगोल का महत्व केवल खेती और पैदावार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके बीजों से निकलने वाली भूसी का उपयोग देश-दुनिया में पाचन तंत्र से जुड़े स्वास्थ्य उत्पादों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। खासकर पेट की खराबी और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत पाने के लिए ईसबगोल की भूसी का घरेलू और चिकित्सीय इस्तेमाल बहुत आम है। इसके अलावा कई तरह के खाद्य पदार्थों और तमाम आयुर्वेदिक औषधीय उत्पादों के निर्माण में भी इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। जालोर के किसानों के लिए यह फसल इसलिए भी वरदान साबित होती है क्योंकि यहां की भौगोलिक परिस्थितियां इसके अनुकूल हैं और यह कम लागत में बंपर कमाई का जरिया बनती है।














