पारंपरिक खेती में लगातार हो रहे वित्तीय नुकसान से उबरने के लिए आंध्र प्रदेश के एक युवा किसान ने एक अनूठा कदम उठाया है। वाईएसआर कडपा जिले के लिंगाल मंडल के रहने वाले वरदा रेड्डी ने अपनी मेहनत और सूझबूझ से कृषि के क्षेत्र में एक अलग मुकाम हासिल किया है। कम औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद उन्होंने रायलसीमा के गर्म और शुष्क मौसम में एवोकाडो जैसे विदेशी फल की सफल पैदावार करके सभी को अचंभित कर दिया है।
दिसंबर 2022 का महीना उनके कृषि सफर में एक बड़ा मोड़ साबित हुआ जब उन्होंने लीक से हटकर कुछ अलग करने की ठानी। इससे पहले वे मुख्य रूप से केला और टमाटर जैसी पारंपरिक फसलें ही उगाते थे। हालांकि, कृषि बाजारों में अस्थिरता और फसलों के उचित दाम न मिलने के कारण उन्हें अक्सर बड़े पैमाने पर आर्थिक घाटे का सामना करना पड़ता था।
बाजार की मांग को पहचानकर उठाया कदम
बाजार में पौष्टिक और विदेशी फलों की बढ़ती मांग का आकलन करने के बाद वरदा रेड्डी ने अधिक मुनाफा देने वाली फसल की तलाश शुरू की। चूंकि उन्हें इस विदेशी पौधे के बारे में कोई पूर्व अनुभव नहीं था, इसलिए उन्होंने बागवानी विभाग के अधिकारियों से संपर्क साधा। विभागीय मार्गदर्शन और गहन शोध के माध्यम से उन्हें पता चला कि देश में एवोकाडो की ऐसी प्रजातियां भी उपलब्ध हैं जो रायलसीमा के कड़े तापमान को आसानी से झेल सकती हैं। इसके बाद उन्होंने अपनी करीब चार एकड़ जमीन पर एवोकाडो के पौधे रोपे, जिस पर शुरुआती निवेश लगभग डेढ़ लाख रुपये आया था।
कम लागत और बेहतरीन मुनाफे का मॉडल
इस फसल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके रखरखाव पर बहुत कम खर्च करना पड़ता है। पौधों को नियमित रूप से पानी और जैविक खाद मिलने पर वे प्राकृतिक रूप से तेजी से विकसित होते हैं। इनकी देखभाल करना काफी हद तक आम के पेड़ों की देखभाल करने जैसा ही सरल है। इस सफल प्रयोग के बाद वरदा रेड्डी को काफी अच्छा मुनाफा मिल चुका है और वे आने वाले समय में अपनी आय को और अधिक बढ़ाने की दिशा में योजना बना रहे हैं। कम लागत में तैयार होने वाली इस फसल ने उनकी आर्थिक बुनियाद को बेहद मजबूत कर दिया है।
स्थानीय स्तर पर मिल रही है सीधी बिक्री
इस विदेशी फल की मार्केटिंग के लिए उन्हें दूरदराज की मंडियों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है। स्थानीय स्तर पर जूस की दुकानें चलाने वाले व्यापारी और स्वास्थ्य को लेकर सजग ग्राहक सीधे उनके खेतों का रुख करते हैं और वहीं से फल खरीदकर ले जाते हैं। एवोकाडो में मौजूद औषधीय गुणों और इसकी उच्च गुणवत्ता के कारण इसकी मांग लगातार ऊपर जा रही है। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि किसान पारंपरिक लीक को छोड़कर नई तकनीक अपनाएं, तो प्रतिकूल मौसम में भी शानदार फसल उगाकर अपनी माली हालत सुधारी जा सकती है।



















