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विदेश से नहीं दिल्ली से होगा समस्याओं का हल, श्रीनगर में बुनियादी ढांचा जांचने उतरे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाभारत
19 अग॰ 2026, 1:20 pm (2 घंटे पहले)· 1

विदेश से नहीं दिल्ली से होगा समस्याओं का हल, श्रीनगर में बुनियादी ढांचा जांचने उतरे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर से जम्मू-कश्मीर के हालात पर चर्चा होगी लेकिन शिकायतों का समाधान दिल्ली से ही निकलेगा। उन्होंने श्रीनगर में सुबह 6:30 बजे से 10 से 12 विकास परियोजनाओं का निरीक्षण भी किया।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कूटनीतिक मर्यादा और घरेलू शासन व्यवस्था पर अपनी नीति को स्पष्ट करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की बुधवार को प्रस्तावित कश्मीर यात्रा को लेकर उन्होंने कहा कि वह केंद्र शासित प्रदेश की जमीनी स्थिति पर चर्चा तो करेंगे, लेकिन किसी विदेशी प्रतिनिधि के सामने शिकायतें दर्ज कराना उनके सिद्धांतों के खिलाफ है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर की समस्याओं का समाधान वाशिंगटन में नहीं, बल्कि भारत की केंद्र सरकार के माध्यम से ही संभव है। यह बयान उन्होंने श्रीनगर शहर के व्यापक निरीक्षण दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए दिया, जहां वह अलसुबह बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लेने निकले थे।

विदेशी राजदूतों से वार्ता पर कूटनीतिक रुख और केंद्र की भूमिका

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के बुधवार को प्रस्तावित कश्मीर दौरे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भारत के आंतरिक मामलों और विदेश नीति पर अपना दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि अपने ही देश या प्रशासनिक मुद्दों के बारे में किसी विदेशी देश के राजनयिक से शिकायत करना अनुचित है। उन्होंने कहा, “किसी दूसरे देश के राजदूत से शिकायत करना मेरी आदत कभी नहीं रही।” उन्होंने यह साफ कर दिया कि वाशिंगटन के पास जम्मू-कश्मीर के स्थानिक मुद्दों की कुंजी नहीं है और सभी समाधान केवल नई दिल्ली स्थित केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

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मुख्यमंत्री ने आगे विस्तार से बताते हुए कहा कि वह अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात के दौरान जम्मू-कश्मीर के वर्तमान हालात और यहां की प्राथमिकताओं पर निश्चित रूप से विचार-विमर्श करेंगे। हालांकि, इस बातचीत का उद्देश्य न तो किसी प्रकार की शिकायत दर्ज कराना होगा और न ही उनसे समस्याओं के समाधान की उम्मीद लगाना होगा। उनका मानना है कि एक जिम्मेदार राज्य प्रतिनिधि के रूप में अपनी घरेलू समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों या विदेशी राजनयिकों के समक्ष उठाने के बजाय देश के भीतर ही प्रशासनिक और राजनीतिक संवाद के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए।

श्रीनगर में अलसुबह 6:30 बजे से 10 से 12 विकास परियोजनाओं की समीक्षा

कूटनीतिक चर्चा के साथ-साथ मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर के शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। बुधवार की सुबह 6.30 बजे से ही उन्होंने श्रीनगर शहर का सघन दौरा शुरू कर दिया। इस दौरान उन्होंने डाउनटाउन से लेकर अपटाउन तक के विभिन्न इलाकों में चल रहे नागरिक विकास कार्यों और सार्वजनिक सुविधाओं का स्थल पर जाकर निरीक्षण किया। इस जमीनी दौरे का मुख्य उद्देश्य बुनियादी ढांचे में सुधार लाना और आम नागरिकों को दी जाने वाली सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता का मूल्यांकन करना था।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रीनगर भर में फैली लगभग 10 से 12 महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि समीक्षा की गई अधिकांश परियोजनाओं पर काम की रफ्तार संतोषजनक पाई गई है। हालांकि, एक या दो परियोजनाएं ऐसी चिन्हित की गई हैं जहां काम की गति धीमी है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि इन पिछड़ रही परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए संबंधित विभागों को विशेष निर्देश दिए जाएंगे और उन पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने इस प्रकार के अचानक और व्यापक जमीनी निरीक्षणों के प्रशासनिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे दौरों से विधानसभा के भीतर पेश की जाने वाली रिपोर्टों और वास्तविक जमीनी हकीकत के बीच सीधा तुलनात्मक अध्ययन करने का अवसर मिलता है। इससे कागजी दावों और धरातल पर काम की वास्तविक स्थिति का अंतर स्पष्ट हो जाता है। उन्होंने श्रीनगर के नागरिकों को आश्वस्त किया कि आने वाले दिनों में और भी नई विकास योजनाएं हाथ में ली जाएंगी ताकि शहर की प्रमुख ढांचागत समस्याओं का स्थायी समाधान किया जा सके।

दो राजधानियों की व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और जल-जमाव की चुनौती

जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक और प्रशासनिक विशिष्टता का उल्लेख करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि श्रीनगर इस क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि देश भर में जम्मू-कश्मीर ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहां दो राजधानियों की अनूठी परंपरा कायम है, जिसमें गर्मियों में श्रीनगर और सर्दियों में प्रशासनिक गतिविधियां जम्मू से संचालित होती हैं। इस दोहरी राजधानी व्यवस्था के कारण दोनों शहरों के बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं पर निरंतर और विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता होती है।

शहर की दैनिक समस्याओं का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने मुख्य रूप से अत्यधिक भीड़भाड़, यातायात जाम और पार्किंग स्थल की भारी कमी को गंभीर चिंता का विषय माना। उन्होंने वादा किया कि इन समस्याओं से निपटने के लिए जल्द ही ठोस प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे और पार्किंग के संकट को दूर करने के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, शहर के कई हिस्सों में लंबे समय से चली आ रही जल-जमाव की समस्या पर भी उन्होंने विस्तार से बात की।

जल-जमाव के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह समस्या पिछले दो या पांच वर्षों की पैदावार नहीं है, बल्कि दशकों के अनियोजित शहरीकरण का परिणाम है। उन्होंने बताया कि अतीत में जब विभिन्न आवासीय कॉलोनियां बसाई जा रही थीं, तब विकासकर्ताओं ने उचित जल निकासी (ड्रेनेज) प्रणालियों के निर्माण पर कोई ध्यान नहीं दिया। बिना जल निकासी व्यवस्था के कॉलोनियों को मंजूरी देने और विकसित करने के कारण आज स्थानीय निवासियों को जलभराव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार अब इन उपेक्षित कॉलोनियों में ड्रेनेज सिस्टम स्थापित करने का काम प्राथमिकता पर कर रही है, हालांकि इस व्यापक और जटिल कार्य को पूरा होने में थोड़ा समय लगेगा क्योंकि यह रातों-रात संभव नहीं है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के घोषणापत्र पर 5 साल का रोडमैप और प्रशासनिक जवाबदेही

चुनाव पूर्व किए गए वादों और नेशनल कॉन्फ्रेंस के घोषणापत्र पर उठने वाले सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपनी सरकार के दृष्टिकोण को स्पष्ट किया। उन्होंने विरोधियों और समीक्षकों को याद दिलाया कि उनकी सरकार का कार्यकाल अभी दो साल भी पूरा नहीं कर पाया है। उन्होंने शुरुआत से ही यह रुख बनाए रखा है कि पार्टी का घोषणापत्र किसी एक दिन, एक सप्ताह, एक महीने या केवल एक वर्ष की समयावधि के लिए तैयार नहीं किया गया था, बल्कि यह पूरे पांच वर्षों का एक व्यापक नीतिगत रोडमैप है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद ही सरकार के प्रदर्शन का पूर्ण मूल्यांकन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पांच वर्षों के बाद वह जनता और मीडिया के हर सवाल का विस्तार से जवाब देने के लिए तैयार रहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने इस बात को दृढ़ता से नकारा कि सरकार ने अपने घोषणापत्र के वादों को नजरअंदाज किया है। अब्दुल्ला ने दावा किया कि घोषणापत्र में शामिल प्रत्येक मुद्दे और संकल्प पर किसी न किसी रूप में काम शुरू कर दिया गया है। उन्होंने दोहराया कि जो भी विकास कार्य या कल्याणकारी वादे अभी बाकी हैं, उन्हें आने वाले वर्षों में चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।

सवाल-जवाब

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के दौरे पर उमर अब्दुल्ला ने क्या रुख अपनाया?
उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि वह सर्जियो गोर से जम्मू-कश्मीर के हालात पर बात करेंगे, लेकिन किसी विदेशी राजदूत के सामने अपने देश की शिकायत करना या समाधान मांगना उनकी आदत नहीं है।
मुख्यमंत्री के अनुसार जम्मू-कश्मीर के मुद्दों का समाधान कहां है?
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की समस्याओं का समाधान वाशिंगटन में नहीं, बल्कि भारत की केंद्र सरकार के पास है।
श्रीनगर में सुबह के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने कितनी परियोजनाओं की समीक्षा की?
मुख्यमंत्री ने अलसुबह 6:30 बजे से श्रीनगर के डाउनटाउन और अपटाउन इलाकों में 10 से 12 विकास परियोजनाओं का निरीक्षण किया।
कॉलोनियों में जल-जमाव की समस्या पर उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा?
उन्होंने बताया कि जल-जमाव की समस्या अतीत के अनियोजित विकास और बिना ड्रेनेज सिस्टम के बनी कॉलोनियों के कारण है, जिसे सरकार अब प्राथमिकता पर ड्रेनेज बनाकर ठीक कर रही है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के घोषणापत्र पर मुख्यमंत्री ने क्या स्पष्टीकरण दिया?
उन्होंने कहा कि घोषणापत्र 5 साल का रोडमैप है और अभी कार्यकाल के 2 साल भी पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन हर मुद्दे पर काम शुरू कर दिया गया है।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·31 मिनट पहले

मुख्यमंत्री का यह रुख कूटनीतिक संप्रभुता और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण है। आंतरिक मामलों पर विदेशी राजनयिकों से दूरी और सुबह-सवेरे विकास कार्यों का जमीनी निरीक्षण यह संकेत देता है कि सरकार बाहरी हस्तक्षेप के बजाय आंतरिक सुशासन और बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दे रही है। कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज से यह घरेलू स्तर पर संवाद मजबूत करने की दिशा में एक सख्त और स्पष्ट प्रशासनिक कदम है।

Rohan Verma@rohan-verma·31 मिनट पहले

उमर अब्दुल्ला का यह बयान कि क्षेत्रीय चुनौतियों का हल नई दिल्ली के दायरे में है, एक सधा हुआ राजनीतिक संदेश देता है। जब केंद्र शासित प्रदेश में कूटनीतिक आवाजाही बढ़ रही है, तब सुबह-सवेरे का यह धरातलीय निरीक्षण इस बात की पुष्टि करता है कि प्रशासन बाहरी प्राथमिकताओं के बजाय शहरी बुनियादी ढांचे और नागरिक सेवाओं को दुरुस्त करने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है।

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