प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच उच्चस्तरीय संवाद हुआ है, जिसमें दोनों देशों के आपसी रिश्तों को और अधिक मजबूत बनाने पर सहमति बनी। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस संवाद के बारे में विस्तार से विवरण साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ यह बातचीत बेहद सार्थक रही, जिसके अंतर्गत रक्षा, व्यापार, ऊर्जा और अत्याधुनिक महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी जैसे अहम सेक्टर्स में द्विपक्षीय भागीदारी की वर्तमान स्थिति का बारीकी से मूल्यांकन किया गया। दोनों वैश्विक नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि द्विपक्षीय हितों को साधने के साथ-साथ दुनिया भर में शांति और स्थिरता कायम रखने के लिए निरंतर संवाद बेहद आवश्यक है।
व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को विस्तार देने की रणनीति
इस बातचीत के मुख्य निष्कर्षों को सामने रखते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देश अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से लगातार संपर्क में बने रहने पर पूरी तरह सहमत हैं। बातचीत में केवल आपसी रिश्ते ही नहीं, बल्कि कई गंभीर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी विचारों का गहन आदान-प्रदान हुआ। दोनों नेताओं ने विश्व स्तर पर शांति, स्थिरता और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए चल रही सामूहिक पहलों की समीक्षा की। इस संवाद से यह साफ संदेश गया कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समन्वय और ज्यादा सघन होने वाला है।
जी7 शिखर बैठक और क्षेत्रीय शांति के कूटनीतिक प्रयास
इस संवाद की मजबूत पृष्ठभूमि फ्रांस के एवियन में संपन्न हुए जी7 शिखर सम्मेलन से जुड़ी है, जहां दोनों नेताओं की आमने-सामने द्विपक्षीय मुलाकात हुई थी। उस महत्वपूर्ण सम्मेलन के दौरान भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों, व्यापारिक मुद्दों तथा पश्चिम एशिया में चल रही शांति प्रक्रियाओं पर विस्तृत मंथन हुआ था। उस समय प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के साथ शांति स्थापित करने के संदर्भ में राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा उठाए गए कदमों की खुलकर सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि पश्चिम एशिया में शांति स्थापना की दिशा में हो रही प्रगति से पूरे क्षेत्र में उम्मीद की एक नई किरण दिखाई देने लगी है, और इस स्थिरता को दीर्घकाल तक बनाए रखना आवश्यक है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और भारतीय सी-फेरर्स की सुरक्षा
अंतरराष्ट्रीय व्यापार के समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की रणनीतिक अहमियत को रेखांकित किया था। उन्होंने कहा था कि इस प्रमुख समुद्री मार्ग का बिना किसी रुकावट के खुला रहना पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए अनिवार्य है, क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा और गहरा असर पड़ता है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ने भारतीय जहाजों और उन पर कार्यरत कर्मियों की सुरक्षा का सवाल भी मजबूती से उठाया था। उन्होंने इस तथ्य की ओर ध्यान दिलाया था कि भारत के लाखों सी-फेरर दुनिया भर के अलग-अलग समुद्री मार्गों में काम करते हुए वैश्विक व्यापार को गति देते हैं। ऐसे में उनकी जान-माल की हिफाजत सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, और ईरान से जुड़े समझौतों में भी इन समुद्री जहाजों तथा कर्मियों की सुरक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
वाशिंगटन बैठक की निरंतरता और द्विपक्षीय व्यापार समझौता
दोनों देशों के संबंधों की दिशा स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री ने याद दिलाया था कि पिछले वर्ष वाशिंगटन में हुई उनकी बैठक के बाद से भारत और अमेरिका के संबंधों में एक नई गति और सक्रियता देखने को मिली है। दोनों देश अपने तय किए गए कूटनीतिक और आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए लगातार मिल-जुलकर काम कर रहे हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस संवाद पर बेहद सकारात्मक रुख प्रकट करते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बहुत अच्छी और उपयोगी बातचीत हुई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया था कि दोनों पक्षों के बीच एक समग्र ट्रेड डील को अंतिम रूप देने पर तेजी से काम जारी है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और अधिक विस्तार मिलेगा।













