टाटा संस की अर्जी रिजर्व बैंक ने की खारिज, अब शेयर बाजार में दस्तक देने के अलावा नहीं बचा कोई रास्ताराजस्थान में डिजिटल स्क्रीन और उम्मीदों के भारी दबाव से घट रही बच्चों की एकाग्रता, मानसिक तनाव पर विशेषज्ञों की रायदेवघर में धान की बंपर पैदावार के लिए रोपाई के 20 से 25 दिनों बाद क्यों जरूरी है सही खाद का इस्तेमालअश्लेशा नक्षत्र में गुरु का प्रवेश: अगले 49 दिनों तक मेष, मिथुन समेत इन 7 राशियों की चमकेगी किस्मतकिचन के चिपचिपे पंखे को नए जैसा चमकाने के लिए अपनाएं ये तीन बेहद आसान घरेलू नुस्खेगणेशोत्सव पर पाना है पारंपरिक और शाही लुक, तो आजमाएं पैठणी साड़ी के ये 5 बेहद खूबसूरत डिजाइनफरीदाबाद में मिट्टी की गणेश मूर्तियां पानी में मिनटों में घुलती हैं और 70 प्रतिशत तक सस्ती मिल रही हैंस्वाद ने पाली की करीब 70 साल पुरानी बिना नाम वाली दुकान को मिर्चीबड़े का ठिकाना बना दियारसोई की काली और चिकनी छन्नी को चमकाने के 4 आसान घरेलू नुस्खे, ऐसे करें साफबाढ़ प्रभावित नेपाल के लिए मसीहा बनी अंबाला की मेडिकल टीम, मुफ्त इलाज पाकर भावुक हुए पीड़ित
पश्चिम बंगाल के स्कूलों में अब स्कर्ट की जगह फुल ड्रेस पहनने की हिदायत, डेंगू के मामले बढ़ने पर मंत्री ने दी सलाहपश्चिम बंगाल
6 सित॰ 2026, 12:19 am (7 दिन पहले)· 2

पश्चिम बंगाल के स्कूलों में अब स्कर्ट की जगह फुल ड्रेस पहनने की हिदायत, डेंगू के मामले बढ़ने पर मंत्री ने दी सलाह

पश्चिम बंगाल में डेंगू के मामले 4 हजार के पार पहुंचने और 7 मौतों के बाद स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर शरदवत मुखर्जी ने स्कूलों से बच्चों को फुल आस्तीन ड्रेस पहनाने की अपील की है।

पश्चिम बंगाल में डेंगू के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और इसी वजह से राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर शरदवत मुखर्जी ने स्कूलों से बच्चों की ड्रेस को लेकर एक खास अपील की है। उन्होंने कहा कि मच्छर के काटने से डेंगू और मलेरिया फैल रहा है, इसलिए जितना हो सके शरीर को ढककर रखा जाए, ताकि बच्चे मच्छरों के काटने से बच सकें।

लड़कों के लिए फुल पैंट-शर्ट, लड़कियों के लिए सलवार सूट

डॉक्टर शरदवत मुखर्जी ने स्कूलों के हेडमास्टर्स से आग्रह किया है कि अगले तीन महीनों में बच्चों को स्कूल में पूरी ड्रेस पहनाई जाए, चाहे स्कूल की यूनिफॉर्म कुछ भी हो। उन्होंने साफ कहा कि लड़कियों को स्कर्ट पहनाकर स्कूल न भेजा जाए, बल्कि ऐसी सलवार पहनाई जाए जो पैरों को पूरी तरह ढके रखे। मंत्री ने यह भी बताया कि बहुत से लोग बच्चों को घुटनों तक के मोजे पहनाते हैं, लेकिन इससे पूरी तरह बचाव नहीं होता, क्योंकि ये मोजे पतले होते हैं और त्वचा से चिपक जाते हैं, जिससे मच्छर आसानी से काट सकते हैं। लड़कों के लिए उन्होंने फुल पैंट और फुल आस्तीन की शर्ट पहनने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यह कदम बहुत जरूरी है और कोशिश की जानी चाहिए कि सितंबर, अक्टूबर और नवंबर, इन तीन महीनों में डेंगू के मामलों को कम किया जा सके।

ये भी पढ़ें

4 हजार से ज्यादा मामले, अब तक 7 मौतें

पश्चिम बंगाल में मॉनसून के मौसम में डेंगू का प्रकोप हर साल गंभीर रूप ले लेता है। 2026 में अब तक राज्य में 4 हजार से अधिक डेंगू के मामले सामने आ चुके हैं। सबसे ज्यादा असर कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना में देखने को मिला है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक राज्य में अब तक डेंगू से 7 लोगों की मौत दर्ज की जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग की चिंता इसी बात को लेकर है कि आने वाले हफ्तों में मामले और न बढ़ें, इसलिए स्कूलों के स्तर पर बचाव की यह पहल शुरू की गई है।

डेंगू के यह लक्षण दिखें तो हो जाएं सतर्क

  • 2 से 7 दिनों तक 101 से 105 डिग्री फारेनहाइट तक तेज बुखार
  • जी मिचलाना और उल्टी आना
  • तेज सिरदर्द और आंखों के पीछे दर्द
  • त्वचा पर चकत्ते पड़ना
  • मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
  • प्लेटलेट काउंट में गिरावट
  • नाक या मसूड़ों से रक्तस्राव
  • बेचैनी और सांस लेने में दिक्कत
  • 24 घंटे में कम से कम 3 बार लगातार उल्टी होना

डेंगू से बचने के लिए क्या करें

  • शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहनें।
  • घर में कहीं भी पानी जमा न होने दें, खासकर कूलर, गमले, टायर, टंकी या बाल्टी में, और इन्हें हर हफ्ते साफ करते रहें।
  • दिन में सोते समय भी मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
  • मच्छरों को घर के अंदर आने से रोकने के लिए खिड़कियों पर जाली लगवाएं।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इन छोटी-छोटी सावधानियों से भी डेंगू के मामलों में बड़ी कमी लाई जा सकती है, बशर्ते स्कूल और अभिभावक दोनों इस अपील को गंभीरता से लें।

सवाल-जवाब

पश्चिम बंगाल में अब तक डेंगू के कितने मामले सामने आए हैं?
2026 में अब तक राज्य में 4 हजार से अधिक डेंगू के मामले सामने आ चुके हैं।
डेंगू से अब तक कितनी मौतें हुई हैं?
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में डेंगू से अब तक 7 लोगों की मौत दर्ज की गई है।
स्वास्थ्य मंत्री ने स्कूलों से क्या अपील की है?
डॉक्टर शरदवत मुखर्जी ने कहा है कि लड़कों को फुल पैंट-शर्ट और लड़कियों को स्कर्ट की जगह पैर ढकने वाली सलवार पहनाकर स्कूल भेजा जाए।
यह अपील कितने महीनों के लिए है?
यह अपील सितंबर, अक्टूबर और नवंबर, इन तीन महीनों के लिए की गई है।
डेंगू का सबसे ज्यादा असर किन इलाकों में देखा गया है?
कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना में डेंगू का सबसे अधिक प्रकोप देखा गया है।
घुटनों तक के मोजे पहनने से बचाव क्यों नहीं होता?
स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक ये मोजे पतले होते हैं और त्वचा से चिपक जाते हैं, जिससे मच्छर आसानी से काट सकते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rohan Gupta@rohan-gupta·6 दिन पहले

यह स्वास्थ्य संकट केवल नीतिगत बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल स्वास्थ्य निगरानी और स्मार्ट वियरेबल्स की भूमिका को भी रेखांकित करता है। आने वाले महीनों में इस तरह के मौसमी प्रकोपों से निपटने के लिए डेटा-संचालित प्रेडिक्टिव एनालिसिस और एआई आधारित अर्ली वॉर्निंग सिस्टम्स का उपयोग अनिवार्य हो जाएगा, ताकि संक्रमण की रोकथाम सटीक तरीके से की जा सके।

Arjun Mehta@arjun-mehta·6 दिन पहले

स्वास्थ्य मंत्री की यह सलाह प्रशासनिक स्तर पर एक त्वरित और आवश्यक निवारक कदम है, विशेषकर तब जब राज्य में 4 हजार से अधिक मामले और 7 मौतें दर्ज हो चुकी हैं। मानसून के बाद के इन तीन महीनों (सितंबर से नवंबर) में कोलकाता, हावड़ा और उत्तर 24 परगना जैसे प्रभावित जिलों के स्कूलों में इसे लागू करना सीधे तौर पर सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देता है। हालांकि, दीर्घकालिक समाधान के लिए केवल यूनिफॉर्म बदलने के बजाय जल जमाव रोकने और स्थानीय निकायों के स्तर पर वेक्टर कंट्रोल मैकेनिज्म को अधिक मजबूत करने की आवश्यकता होगी, अन्यथा यह नीति केवल एक मौसमी उपाय बनकर रह जाएगी।

Ravikash Gupta@ravikash·6 दिन पहले

यह प्रशासनिक कदम तात्कालिक राहत के लिए ठीक है, लेकिन आर्थिक और कॉर्पोरेट नजरिए से यह देखना अहम होगा कि क्या शहरी स्थानीय निकाय फॉगिंग और वेक्टर कंट्रोल पर पर्याप्त बजट खर्च कर रहे हैं। यदि बुनियादी स्वच्छता और जल निकासी के ढांचे को नहीं सुधारा गया, तो इस तरह के मौसमी निर्देश बार-बार देने पड़ेंगे और जनजीवन के साथ शैक्षणिक व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

राज्य में चार हजार से अधिक मामले और सात मौतें यह दर्शाती हैं कि स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ प्रशासनिक चौकसी कितनी जरूरी है। जब बीमारी बच्चों तक पहुंचती है, तो संस्थागत स्तर पर उठाए गए कदम जैसे यूनिफॉर्म में बदलाव केवल एक सलाह नहीं, बल्कि महामारी नियंत्रण का एक अहम हिस्सा बन जाते हैं। हालांकि, स्कूलों के स्तर पर अपील के साथ-साथ यह भी देखना होगा कि नगर निकायों द्वारा जल जमाव रोकने के लिए जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी कार्रवाई की जा रही है, क्योंकि असली रोकथाम स्रोत के खात्मे से ही संभव है।

Rohan Verma@rohan-verma·6 दिन पहले

यह प्रशासनिक निर्णय केवल बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश जैसे सघन आबादी वाले राज्यों के लिए भी एक बड़ा सबक है जहाँ मानसून के बाद वेक्टर जनित बीमारियाँ विकराल रूप ले लेती हैं। जब तक स्थानीय निकाय फॉगिंग और लार्वा रोधी रसायनों के छिड़काव को स्कूलों के बाहर और रिहायशी इलाकों में युद्ध स्तर पर सुनिश्चित नहीं करेंगे, तब तक केवल बच्चों के कपड़ों में बदलाव से महामारी की रफ्तार पर स्थायी लगाम नहीं लगाई जा सकती।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR