पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी तेज हो गई है क्योंकि राज्य की दो महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों, नंदीग्राम और रेजिनगर पर उपचुनावों की घोषणा कर दी गई है। चुनाव आयोग के तय कार्यक्रम के मुताबिक इन दोनों ही निर्वाचन क्षेत्रों में आगामी छह अक्टूबर को मतदान संपन्न होगा, जबकि मतों की गिनती और चुनाव परिणाम नौ अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा काफी तेज है कि शुभेंदु अधिकारी द्वारा छोड़ी गई हाई-प्रोफाइल नंदीग्राम विधानसभा सीट से राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद चुनावी मैदान में उतर सकती हैं। इस संभावित मुकाबले को लेकर राजनीतिक पारा काफी ऊपर चला गया है।
शुभेंदु अधिकारी का तीखा बयान
इन आगामी उपचुनावों की घोषणा के बाद राजनीतिक बयानों का दौर शुरू हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए शुभेंदु अधिकारी ने एक बड़ा और कड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि रेजिनगर और नंदीग्राम दोनों ही सीटों पर होने वाले उपचुनाव में बेहद कड़ा और दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने चेतावनी भरे और सख्त लहजे में कहा कि इस उपचुनाव के दौरान देखने वाली बात यह होगी कि भगवाधारी उनके खिलाफ क्या सियासी रुख अपनाते हैं और उनका क्या हाल करते हैं। उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है।
टीएमसी के भीतर से आया बड़ा समर्थन
इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के भीतर से भी बयानों के समीकरण सामने आने लगे हैं। टीएमसी के बागी रीताब्रत बनर्जी गुट के नेता मदन मित्रा ने इस संदर्भ में एक अहम घोषणा की है। उनका कहना है कि यदि नंदीग्राम विधानसभा सीट से ममता बनर्जी पार्टी की आधिकारिक उम्मीदवार बनती हैं, तो उनकी ओर से उस सीट पर कोई भी दूसरा प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा जाएगा। उन्होंने साफ किया कि इस बात की घोषणा पहले ही कर दी गई थी कि पार्टी सुप्रीमो के खड़े होने पर समर्थन पूरी तरह से उनके साथ रहेगा।
कानून व्यवस्था और पुलिस को निर्देश
राजनीतिक बयानबाजी के बीच हाल ही में एक धार्मिक और सामाजिक प्रसंग पर भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। एक घटना का जिक्र करते हुए नेताओं ने बताया कि लिलुआ क्षेत्र में एक संत आए थे जिन्होंने देश प्रेम, राष्ट्रवाद, अखंड भारत और सांस्कृतिक परंपराओं पर अपने विचार रखे थे। इसे स्वीकार करना या न करना पूरी तरह से हर व्यक्ति की अपनी व्यक्तिगत इच्छा पर निर्भर करता है और इस पर किसी भी प्रकार का कोई दबाव नहीं डाला जा सकता है।
हालांकि, इस बात पर गहरी नाराजगी जताई गई कि कुछ लोगों ने इसके विरोध में भवानीपुर थाने के सामने जाकर तस्वीरों को आग के हवाले कर दिया। इस विरोध प्रदर्शन के बाद कोलकाता पुलिस के कमिश्नर को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं कि तुरंत प्रभाव से ऐसे लोगों की गिरफ्तारी की जाए। प्रशासन को चेतावनी दी गई है कि राज्य के भीतर इस तरह की अराजकता बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके साथ ही तुष्टिकरण की राजनीति पर भी कड़ा विरोध जताते हुए कहा गया है कि अब बहुत हो चुका है और इस परिपाटी को अब और आगे नहीं चलने दिया जाएगा।



















