शारदीय नवरात्र से पूर्व उत्तराभाद्रपद में शनि का प्रवेश, सप्तम भाव के गोचर से साझेदारी और कारोबार पर असरबिना जानकारी बेंच से केस हटाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, रजिस्ट्री और सरकारी वकील की कार्यशैली पर सवालगुजरात हाईकोर्ट ने खारिज की अपील, पीएम नरेंद्र मोदी डिग्री विवाद में अरविंद केजरीवाल को चुकाने होंगे 25 हजार रुपयेउदयपुर के ऐतिहासिक गंगू कुंड पर श्राद्ध में उमड़ते हैं श्रद्धालु, मेवाड़ के इस पवित्र स्थल से जुड़ी है गंगा मैया के प्रकट होने की मान्यतालखीमपुर खीरी में मचान तकनीक से खीरे की सफल बागवानी, कानपुर और दिल्ली के बाजारों तक पहुंच रही उपजमंगलुरु स्थित एमआरपीएल परिसर में भीषण विस्फोट से दहशत, एयरपोर्ट इमारत और घरों के शीशे टूटे, 8 लोग जख्मीपश्चिम चंपारण में गंडक का तांडव, आशियाने उजड़ने के बाद श्मशान किनारे शरण लेने को मजबूर हुए ग्रामीणआस्था कुंज पार्क रेप मामले पर फूटा दिल्ली की छात्राओं का गुस्सा, जमानत और सुरक्षा पर उठाए तीखे सवालवोटर लिस्ट से किसी का नाम हटाना क्यों नहीं है एक क्लिक का खेल, समझिए इरोनेट और ईसीआईनेट की हकीकतदीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की नई पहल से पूर्वांचल के किसानों को मिलेंगे विदेशी सब्जियों के बीज और आधुनिक प्रशिक्षण
पश्चिम चंपारण में गंडक का तांडव, आशियाने उजड़ने के बाद श्मशान किनारे शरण लेने को मजबूर हुए ग्रामीणभारत
30 सित॰ 2026, 8:49 pm (4 मिनट पहले)· 0

पश्चिम चंपारण में गंडक का तांडव, आशियाने उजड़ने के बाद श्मशान किनारे शरण लेने को मजबूर हुए ग्रामीण

नेपाल में भारी बारिश के बाद गंडक नदी में आए उफान और चंपारण तटबंध टूटने से पश्चिम चंपारण के नौतन, बैरिया और बगहा में भीषण तबाही मची है, जहां बेघर ग्रामीण अब श्मशान और सड़कों पर दिन काट रहे हैं।

नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हुई मूसलाधार बारिश ने बिहार के सीमावर्ती इलाकों में जल प्रलय जैसी स्थिति पैदा कर दी है। गंडक नदी के विकराल रूप धारण करने की वजह से राज्य के कई जिले गंभीर जलभराव और कटाव की चपेट में आ गए हैं। इस प्राकृतिक आपदा में सबसे भारी नुकसान पश्चिम चंपारण जिले को उठाना पड़ा है, जहां के नौतन, बैरिया, योगापट्टी और बगहा 02 प्रखंडों में नदी की तेज लहरों ने व्यापक तबाही मचाई है। गंडक के प्रचंड बहाव के सामने दर्जनों बस्तियां पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं, जिससे हजारों जिंदगियां अचानक बेसहारा हो गई हैं। प्रभावित ग्रामीण जहां इस आपदा को कुदरत का प्रकोप मान रहे हैं, वहीं प्रशासनिक तंत्र की सुस्ती और समय पर मदद न मिलने से उनके भीतर भारी रोष और निराशा देखने को मिल रही है।

श्मशान घाट और नहर की पटरियों पर जहरीले जीवों के बीच रातें

बाढ़ के पानी के कारण नौतन प्रखंड के मंगलपुर कला, विशम्भरपुर और फुलियाखंड जैसे तमाम गांवों का अस्तित्व पानी में समा चुका है। अपने आशियाने और घरेलू सामान गंवाने के बाद विस्थापित परिवारों को सड़कों की पटरियों और श्मशान घाटों जैसी खुली जगहों पर डेरा डालना पड़ा है। कई परिवार नहरों के किनारे अस्थाई तंबू तानकर रहने को मजबूर हैं, जहां सांप, बिच्छू और अन्य विषैले कीट-पतंगों का निरंतर खतरा बना हुआ है। संकट इसलिए भी गंभीर हो गया है क्योंकि वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज से लगातार भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। बैराज से पानी के भारी डिस्चार्ज के चलते इन नहरों का जलस्तर भी खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है, जिससे नहर किनारे शरण लिए लोगों पर फिर से डूबने की आशंका मंडराने लगी है।

ये भी पढ़ें

तटबंध ध्वस्त होने से बहाव तेज, जान बचाकर भागे ग्रामीण

फुलियाखंड गांव की रहने वाली सरिता देवी अपनी व्यथा बताते हुए कहती हैं कि जहां पहले पूरा भरा-पूरा परिवार शांति से रहता था, वहां अब केवल चारों तरफ पानी का रौद्र रूप दिखाई दे रहा है। मंगलपुर के समीप चंपारण तटबंध के टूट जाने से पानी का दबाव अचानक गांवों की तरफ मुड़ गया, जिसने देखते ही देखते कई मकानों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। जब घर-बार पानी में बहने लगा तो लोग अपने छोटे बच्चों को गोद में लेकर जान बचाने के लिए ऊंची जगहों की ओर भागे। अब ये परिवार खुले आसमान के नीचे सड़क किनारे गुजर-बसर कर रहे हैं, लेकिन लगातार बढ़ रहे जलस्तर ने उन्हें यहां भी सुरक्षित महसूस नहीं होने दिया है।

प्रशासनिक देरी पर स्थानीय बाशिंदों का गुस्सा

आपदा से जूझ रहे स्थानीय नागरिक श्रीकांत के अनुसार जब सब कुछ तबाह हो चुका, तब जाकर बचाव दलों की हलचल दिखाई दी है। उनका कहना है कि जब बगहा इलाके में चंपारण बांध में दरार आई और वह टूटा, तभी नौतन प्रखंड के लोगों ने खतरे को भांपते हुए राहत और सुरक्षा की गुहार लगाई थी। उस शुरुआती समय में जिम्मेदार अमले ने जमीनी हकीकत पर ध्यान नहीं दिया और किसी प्रकार की एहतियाती तैयारी नहीं की। अब जब बस्तियां पानी में समा चुकी हैं और लोगों का सब कुछ तबाह हो चुका है, तब जाकर जिला प्रशासन हरकत में आया है और मुस्तैदी का दावा कर रहा है।

श्मशान पर खाना पकाने और मवेशियों के चारे का भारी संकट

बाढ़ में अपना सब कुछ गंवा चुकी चंदा देवी की स्थिति भी बेहद दयनीय है। वे अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ जलमग्न खेतों के बिल्कुल छोर पर वक्त काट रही हैं, जहां उनके साथ गांव के सैकड़ों अन्य पीड़ित भी टिके हैं। जिस स्थान पर ग्रामीण शरण लिए हुए हैं, उसके ठीक बगल में श्मशान घाट मौजूद है जहां दो दिन पहले ही शवदाह किया गया था। गांव में कोई सूखी जगह न बचने के कारण विस्थापित लोग अब उसी श्मशान स्थल के पास अपना खाना पकाने और रात बिताने को लाचार हैं। इसके अलावा ग्रामीणों ने अपने मवेशियों को भी सड़क किनारे खूंटे गाड़कर बांध रखा है, जहां उनके लिए हरे या सूखे चारे का कोई बंदोबस्त नहीं है, जिससे पशुओं के सामने भी भुखमरी का खतरा खड़ा हो गया है।

सवाल-जवाब

पश्चिम चंपारण के कौन से प्रखंड बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं?
गंडक नदी की बाढ़ से जिले के नौतन, बैरिया, योगापट्टी और बगहा 02 प्रखंड सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
नौतन प्रखंड के कौन से गांव पानी में डूब चुके हैं?
नौतन प्रखंड के मंगलपुर कला, विशम्भरपुर और फुलियाखंड जैसे गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं।
गांवों में अचानक इतना पानी कैसे भर गया?
नेपाल में लगातार बारिश के बाद वाल्मीकिनगर बैराज से पानी छोड़ा गया और मंगलपुर के पास चंपारण तटबंध टूटने से पानी तेजी से गांवों में घुस गया।
बेघर हुए लोग कहां शरण लेने को मजबूर हैं?
बाढ़ पीड़ित परिवार सड़कों के किनारे, नहर की पटरियों और स्थानीय श्मशान घाट के पास तंबू लगाकर रहने को मजबूर हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन पर क्या आरोप लगाए हैं?
ग्रामीणों का आरोप है कि बगहा में बांध टूटने के समय मदद मांगने पर भी प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया और बर्बादी होने के बाद ही राहत कार्य शुरू किया गया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp