रेलवे यात्रियों को सफर के दौरान स्वच्छ और कीटाणुरहित पानी उपलब्ध कराने के लिए पूर्वी रेलवे ने एक बड़ा कदम उठाया है। इस बड़ी पहल के तहत स्टेशनों पर साफ-सुथरे पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 131 नए क्लोरीनेशन प्लांट लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही, स्टेशनों पर खाने-पीने की चीजों की स्वच्छता और पानी की गुणवत्ता को सुधारने के लिए एक विशेष और व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, जिससे लाखों यात्रियों को सीधा फायदा पहुंचेगा।
131 नए क्लोरीनेशन प्लांट और टंकियों की सफाई का महाअभियान
पूर्वी रेलवे के तहत आने वाले विभिन्न स्टेशनों पर यात्रियों की सेहत को ध्यान में रखते हुए पानी के शुद्धिकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी सिलसिले में 131 नए क्लोरीनेशन प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं, जो पानी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और अशुद्धियों को खत्म करेंगे। इस अभियान के तहत न केवल नए प्लांट लगाए जा रहे हैं, बल्कि मौजूदा जल भंडारण प्रणालियों की भी सघन सफाई की जा रही है। पूर्वी रेलवे के सभी मंडलों और रेलवे कार्यशालाओं में पानी की टंकियों की सफाई का एक व्यापक ढांचा तैयार किया गया है। अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, 20 अगस्त से 23 सितंबर 2026 के बीच एक बड़ा स्वच्छता अभियान चलाया गया, जिसके तहत कुल 6,955 पानी की टंकियों की पूरी तरह से सफाई की गई। इस बड़े आंकड़े में स्टेशनों पर लगी ओवरहेड टंकियां, जमीन के नीचे बने भूमिगत जलाशय और पीवीसी टंकियां भी शामिल हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पानी के भंडारण के स्तर पर किसी भी तरह की गंदगी जमा न हो सके।
विभिन्न मंडलों में सफाई अभियान के आंकड़े
इस महाअभियान के दौरान पूर्वी रेलवे के अलग-अलग मंडलों में योजनाबद्ध तरीके से काम किया गया। आंकड़ों के अनुसार, आसनसोल मंडल में सबसे अधिक कुल 2,449 पानी की टंकियों की सफाई पूरी की गई। इसके बाद हावड़ा मंडल का नंबर आता है, जहां 2,123 टंकियों को साफ और कीटाणुरहित बनाया गया। सियालदह मंडल में भी इस दिशा में तेजी से काम करते हुए 1,464 टंकियों की सफाई की गई, जबकि मालदा मंडल में 919 पानी की टंकियों को इस प्रक्रिया के तहत पूरी तरह से साफ किया गया। इन सभी टंकियों की केवल ऊपरी सफाई नहीं की गई, बल्कि पानी का उचित रासायनिक उपचार भी किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य जल स्रोतों को हर तरह के बाहरी प्रदूषण और जीवाणुओं से मुक्त रखना है, ताकि जब यह पानी यात्रियों तक पहुंचे, तो वह पूरी तरह से सुरक्षित और पीने योग्य हो।
नल से लेकर स्रोत तक निगरानी का नया नियम
पानी की शुद्धता की नियमित जांच के लिए पूर्वी रेलवे ने स्टेशनों के नलों से पानी के सैंपल लेकर उनकी क्लीनिकल जांच कराने की एक विशेष व्यवस्था शुरू की है। यह जांच नियमित अंतराल पर की जाएगी ताकि पानी की गुणवत्ता में थोड़ी भी गिरावट होने पर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। रेलवे बोर्ड द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, पानी की जांच केवल अंतिम छोर यानी यात्रियों के पीने के स्थान पर ही नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसके पूरे सफर पर नजर रखी जानी चाहिए। इस नई रणनीति के तहत पानी के मूल स्रोत, वाटर ट्रीटमेंट और फिल्ट्रेशन प्लांट, भूमिगत और ओवरहेड टंकियों, पीवीसी टंकियों, वाटर बूथ, नलों और पानी वितरण केंद्रों का नियमित रूप से निरीक्षण किया जाएगा। इस तरह स्रोत से लेकर यात्री के गिलास तक पहुंचने वाले पानी के हर चरण की कड़ाई से निगरानी की जा सकेगी।
गाद हटाने और लीकेज रोकने की सख्त कार्रवाई
इस व्यापक अभियान के दौरान सभी जल भंडारण टंकियों को पूरी तरह खाली करके उनके तल में जमा गाद और कीचड़ को हटाने की सख्त प्रक्रिया अपनाई जा रही है। टंकियों को रगड़कर साफ करने के बाद उन्हें विशेष रसायनों से कीटाणुरहित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, टंकियों के ढक्कनों को सुरक्षित और सील रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उनमें कोई बाहरी तत्व प्रवेश न कर सके। टंकियों के वेंट और ओवरफ्लो पाइप को भी जालीदार ढक्कनों से सुरक्षित किया जा रहा है ताकि पक्षी, छोटे जानवर और शैवाल उनमें जमा न हो सकें। रेलवे ने यह भी साफ किया है कि जहां भी टंकियां, पाइपलाइन या फिल्टर खराब हालत में हैं, उन्हें तुरंत सुधारा जाए या जरूरत पड़ने पर बदला जाए। पीने के साफ पानी और गैर-पेयजल की पाइपलाइनों के बीच किसी भी प्रकार के क्रॉस-कनेक्शन को रोकने पर कड़ा रुख अपनाया गया है, ताकि दूषित पानी साफ पानी में न मिल सके। लीकेज की जांच करके उसे दुरुस्त किया जा रहा है ताकि कीमती पानी की बर्बादी भी रोकी जा सके। जिन स्टेशनों पर हैंडपंप या बोरवेल के माध्यम से पानी की आपूर्ति होती है, वहां भी पानी की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
स्टेशनवार रिपोर्ट और समस्याओं का समाधान
रेलवे इस पूरे अभियान की व्यवस्थित तरीके से निगरानी कर रहा है। इसके लिए हर स्टेशन पर पाई जाने वाली कमियों और अशुद्धियों का एक विस्तृत ब्योरा तैयार किया जा रहा है। इस रिपोर्ट में न केवल समस्याओं को दर्ज किया जाएगा, बल्कि उनके समाधान के लिए की गई कार्रवाई का भी पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। इस स्टेशनवार डेटाबेस की मदद से भविष्य में पानी की व्यवस्था में आने वाली किसी भी समस्या का तुरंत पता लगाया जा सकेगा और एक निश्चित समयसीमा के भीतर उसका समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा। इस प्रकार पूर्वी रेलवे अपने यात्रियों को स्टेशनों पर हर समय स्वच्छ, शीतल और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में एक ठोस और दीर्घकालिक प्रणाली विकसित कर रहा है।



















