समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया मंच X पर एक तीखी पोस्ट के ज़रिये अयोध्या से जुड़े धन और संसाधनों के लेन-देन पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया है। अपने हैंडल (@yadavakhilesh) से की गई इस पोस्ट में उन्होंने पूरे मामले को एक कड़ी से दूसरी कड़ी तक जोड़ते हुए इसे गंभीर अनियमितता के रूप में पेश किया।
पोस्ट में क्या कहा गया
Akhilesh Yadav ने अपनी टिप्पणी की शुरुआत 'आगे-आगे देखिए होता है क्या' जैसे चेतावनी भरे अंदाज़ से की। उन्होंने इशारों में एक पूरी श्रृंखला गिनाई, जिसमें उनके मुताबिक बात चढ़ावे से शुरू होकर चंदे तक पहुँची, चंदे से होते हुए ज़मीन तक और फिर ज़मीन से होते हुए अति बहुमूल्य अरबों रुपयों की श्रीराम शिलाओं के कथित रूप से गायब होने तक जा पहुँची। इसी क्रम के ज़रिये उन्होंने यह जताने की कोशिश की कि मामला किसी एक बिंदु तक सीमित नहीं, बल्कि एक के बाद एक जुड़ी हुई घटनाओं की कड़ी है।
अपनी इसी पोस्ट में उन्होंने यह भी माँग रखी कि भाजपा से जुड़े उन 'अनरजिस्टर्ड और अंडरग्राउंड' संगी-साथियों की केवाईसी कराई जाए, जिनका ज़िक्र वे इस पूरे प्रकरण के संदर्भ में कर रहे हैं। पोस्ट के आखिर में उन्होंने सवाल उठाया कि अयोध्या के इस 'महापाप-महाघोटाले' के पीछे आख़िर कौन-सा 'सनातन' है, यानी कौन लोग इसके लिए ज़िम्मेदार हैं।
Akhilesh के अपने शब्द
आगे-आगे देखिए होता है क्या… चढ़ावे से बात चंदे तक पहुँची और चंदे से ज़मीन तक और ज़मीन से अति बहुमूल्य अरबों रूपयों की श्रीराम शिलाओं के गायब होने तक। भाजपाइयों के अनरजिस्टर्ड-अंडरग्राउंड संगी-साथियों की केवाईसी करवाई जाए। अयोध्या के इस 'महापाप-महाघोटाले' के पीछे कौन-सा सनातन।
राजनीतिक संदेश
इस पोस्ट के ज़रिये Akhilesh Yadav ने एक साथ कई स्तरों पर निशाना साधा है। एक तरफ़ उन्होंने अयोध्या से जुड़े आर्थिक लेन-देन की पारदर्शिता पर सवाल उठाया, तो दूसरी तरफ़ केवाईसी जैसी माँग रखकर इसे जवाबदेही और जाँच के दायरे में लाने की कोशिश की। 'महापाप' और 'महाघोटाला' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर उन्होंने मामले को भावनात्मक और नैतिक दोनों ही रंग दिए, ताकि उनका संदेश व्यापक जनसमूह तक पहुँचे।
जनता की प्रतिक्रिया
पोस्ट सामने आते ही इस पर तीखी और बँटी हुई प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। कुछ उपयोगकर्ताओं ने आरोपों को गंभीर बताते हुए पारदर्शिता और जाँच की माँग का समर्थन किया, जबकि कई लोगों ने आस्था से जुड़े विषय पर इस तरह के सवाल उठाने को लेकर Akhilesh Yadav की आलोचना की और उनकी मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए।













