आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने स्वतंत्रता सेनानी सरदार उधम सिंह के बलिदान दिवस पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। सामाजिक मंच एक्स पर एक विशेष संदेश जारी करते हुए उन्होंने देश की आजादी के संग्राम में उधम सिंह के अप्रतिम योगदान, उनके अदम्य साहस और मातृभूमि के प्रति अटूट निष्ठा को नमन किया। अरविंद केजरीवाल ने रेखांकित किया कि जलियांवाला बाग के भीषण नरसंहार का प्रतिशोध लेकर मां भारती के इस सच्चे सपूत ने हर भारतीय का मस्तक गर्व से ऊंचा किया था। उनका यह संकल्प आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
जलियांवाला बाग का प्रतिशोध और सरदार उधम सिंह का बलिदान
सरदार उधम सिंह का नाम भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के इतिहास में अमर है। 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में निहत्थे और मासूम भारतीयों पर ब्रिटिश हुकूमत ने अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं। इस बर्बर हत्याकांड ने युवा उधम सिंह के मन पर गहरा प्रभाव डाला। उन्होंने उसी क्षण इस नरसंहार के मुख्य जिम्मेदार तत्कालीन पंजाब के गवर्नर माइकल ओ ड्वायर को उसके किए की सजा देने का कठोर संकल्प लिया।
अपने इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए सरदार उधम सिंह ने वर्षों तक महाद्वीपों की यात्रा की और कई कठिनाइयों का सामना किया। आखिरकार 13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में उन्होंने माइकल ओ ड्वायर को गोली मारकर जलियांवाला बाग के शहीदों के खून का बदला लिया। इस ऐतिहासिक घटना के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 31 जुलाई 1940 को लंदन की पेंटनविले जेल में फांसी दे दी गई। उनका यह अमर बलिदान देश की भावी पीढ़ियों के मन में राष्ट्रभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित करता आ रहा है।
अरविंद केजरीवाल के संदेश की मुख्य बातें
अरविंद केजरीवाल ने अपने सामाजिक मंच पोस्ट के जरिए सरदार उधम सिंह के जीवन मूल्यों को याद करते हुए युवाओं से उनसे सीख लेने का आह्वान किया। उन्होंने लिखा कि मातृभूमि के प्रति सरदार उधम सिंह का समर्पण और अटूट इच्छाशक्ति हर नागरिक को देशहित में कार्य करने की प्रेरणा देती है। ऐसे अमर शहीदों के बलिदान के कारण ही आज भारत एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में स्थापित है।
कौन थे बाड़मेर के वीर सरदार हेमसिंह भील
इतिहास के पन्नों में देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले कई ऐसे गुमनाम नायक भी दर्ज हैं, जिनकी वीरता अनुकरणीय रही है। इनमें से एक प्रमुख नाम राजस्थान के बाड़मेर क्षेत्र के सरदार हेमसिंह भील का है। हेम सिंह भील बाड़मेर के एक अत्यंत प्रभावशली और स्वाभिमानी सरदार थे। सीमावर्ती पहाड़ी इलाके में निवास करने वाले स्थानीय समुदाय और अपने लोगों के बीच उनकी बहुत मजबूत पकड़ और प्रतिष्ठा थी।
भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा तनाव के दौरान जब बाड़मेर के कठिन पहाड़ी और सीमावर्ती इलाकों में शत्रु तत्वों और घुसपैठियों ने गतिविधियां तेज कर दी थीं, तब पूरे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल व्याप्त हो गया था। भौगोलिक विषमताओं और दुर्गम रास्तों के कारण भारतीय सैन्य बलों के लिए भी उन पहाड़ी इलाकों तक तुरंत पहुंचना एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। ऐसे गंभीर और नाजुक समय में सरदार हेमसिंह भील ने अपनी रणनीतिक सूझबूझ और असीम देशभक्ति का परिचय दिया।
सरदार हेमसिंह भील ने स्थानीय निवासियों को एकजुट किया और दुर्गम पहाड़ियों की भौगोलिक जानकारी का उपयोग करते हुए सीमाओं पर अभेद्य पहरा बैठाया। उन्होंने न केवल घुसपैठियों के मंसूबों को नाकाम किया बल्कि भारतीय सेना के लिए एक मजबूत सुरक्षा ढाल का कार्य भी किया। उनकी इस अभूतपूर्व वीरता और देशप्रेम ने बाड़मेर की सीमा को सुरक्षित रखने में निर्णायक भूमिका निभाई, जिसे आज भी आदर के साथ याद किया जाता है।
जनता की प्रतिक्रिया
सामाजिक मंचों पर अरविंद केजरीवाल के इस संदेश के बाद आम जनता की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। अधिकांश उपयोगकर्ताओं ने अमर शहीद सरदार उधम सिंह को नमन करते हुए उनके प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। वहीं कुछ लोगों ने राजनीतिक संदर्भों को लेकर अपनी राय रखी और जनप्रतिनिधियों से शहीदों के आदर्शों पर चलते हुए जनसेवा पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।


























