भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने और प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए संसद ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 को पूरी तरह पारित कर दिया है। लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी इस विधेयक को मंजूरी मिलने से देशभर के लाखों अभ्यर्थियों के हितों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार हो गया है। इस नए कानून के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली करने वालों और संगठित गिरोहों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
विधेयक के मुख्य प्रावधान और कड़े नियम
नए संशोधन विधेयक में परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी रोकने के लिए कई बड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके अंतर्गत अनुचित साधनों का प्रयोग करने, प्रश्नपत्र लीक करने तथा परीक्षा केंद्रों में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी में लिप्त पाए जाने वाले दोषियों के लिए न्यूनतम 5 वर्ष के कारावास की सजा तय की गई है। इसके अतिरिक्त, गंभीर मामलों में भारी जुर्माने और संपत्ति कुर्क करने जैसे कड़े कदम उठाने का भी प्रावधान है।
कानून को प्रभावकारी बनाने के लिए मामलों की समयबद्ध जांच पूरी करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। जांच प्रक्रियाओं को तेजी से निपटाने और मुकदमों की जल्द सुनवाई के लिए विशेष तंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे न केवल फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी, बल्कि निर्दोष अभ्यर्थियों को बिना किसी देरी के त्वरित न्याय भी मिल सकेगा।
संसद के दोनों सदनों में पारित होने का घटनाक्रम
संसदीय कार्यवाही के दौरान इस कानून को पारित कराने के लिए विशेष तत्परता देखी गई। लोकसभा ने 29 जुलाई 2026 को गहन चर्चा के बाद लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 को अपनी सहमति प्रदान की थी। इसके ठीक अगले दिन, 30 जुलाई 2026 को राज्यसभा ने भी विपक्ष के वाकआउट के बीच ध्वनि मत से इस विधेयक को मंजूरी दे दी।
सदन में विधेयक पर बहस के दौरान सरकार ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखना देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा एक अति संवेदनशील विषय है। विपक्ष के विरोध और वाकआउट के बावजूद राज्यसभा में ध्वनि मत द्वारा इस महत्वपूर्ण विधेयक को स्वीकृत कर लिया गया।
विदेश मंत्री एस जयशंकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वक्तव्य
संसद के दोनों सदनों से विधेयक के सफलतापूर्वक पारित होने पर केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए लिखा, "दोनों सदनों द्वारा लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 का पारित होना भारत की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।"
इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस विधायी कदम का स्वागत करते हुए कहा कि "यह कानून हमारी परीक्षा प्रणाली को अत्यधिक मजबूत बनाएगा और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।" सरकारी पक्ष का मानना है कि इस कानून से देश के योग्य और मेधावी छात्रों का परीक्षा प्रणाली में विश्वास फिर से कायम होगा।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर इस कानून को लेकर नागरिकों और परीक्षार्थियों की मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली है। एक ओर जहां अधिकांश छात्रों और अभिभावकों ने कड़ी सजा के प्रावधानों का स्वागत करते हुए इसे पेपर लीक माफिया के खिलाफ आवश्यक कदम माना है, वहीं दूसरी ओर कई अभ्यर्थियों ने पूर्व में रुकी हुई भर्ती प्रक्रियाओं को जल्द से जल्द पूरा करने तथा जमीनी स्तर पर इसका सख्त क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।



























