नीट पेपर लीक विवाद और दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जब सरकार युवाओं और बच्चों की आवाज नहीं सुनेगी, तो विपक्ष को मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ेगा। संसद से लेकर सोशल मीडिया तक, विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री की चुप्पी और प्रशासन के कड़े रवैये पर तीखे सवाल खड़े किए हैं, जिससे यह पूरा मुद्दा अब एक बड़े राजनीतिक आंदोलन का रूप लेता जा रहा है।
सरकार के रवैये पर अखिलेश यादव का प्रहार
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए सरकार की कार्यशैली पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि जब सत्ता में बैठे लोग छात्रों की जायज मांगों को अनसुना कर देंगे, तो विपक्ष के पास सड़कों पर उतरने और सीधे देश के मुखिया के दरवाजे तक जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। अपने बयान में उन्होंने पुलिस की कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि जब बच्चों पर बेरहमी से वार किया जाएगा और सरेआम बच्चियों के कपड़े फाड़े जाएंगे, तो विपक्ष खामोश नहीं बैठ सकता। उनका यह सख्त रुख उस समय आया है जब प्रशासन ने अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों को जबरन हटाया और उन पर बल प्रयोग किया।
लोकसभा में गूंजा नीट और छात्रों का मुद्दा
यह विरोध केवल सड़कों या सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि संसद के भीतर भी इस मुद्दे पर भारी हंगामा देखने को मिला है। हाल ही में लोकसभा में विपक्षी नेताओं ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर सरकार को पूरी तरह से घेर लिया। विपक्ष का सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने बड़े और गंभीर मुद्दे पर प्रधानमंत्री आखिर चुप क्यों हैं। अखिलेश यादव ने भी सदन में बेहद सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि यह किसी राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य का सवाल है। उन्होंने सदन में सरकार से सीधा जवाब मांगते हुए पूछा कि जब बच्चियों के साथ ऐसी बर्बरता हो रही है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने कहा कि मजबूरी में ही विपक्ष को प्रधानमंत्री आवास की ओर कूच करना पड़ा है।
जंतर मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई
इस पूरे राजनीतिक उबाल के केंद्र में वे हजारों छात्र हैं जो नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में हुई धांधली के खिलाफ न्याय की गुहार लगा रहे हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से आए छात्र जंतर मंतर पर इकट्ठा होकर अपना विरोध दर्ज करा रहे थे। छात्रों का आरोप है कि उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने के बजाय उनके आंदोलन को कुचलने का प्रयास कर रही है। प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज और प्रशासन के सख्त रवैये ने आग में घी डालने का काम किया है, जिससे छात्रों का गुस्सा और भड़क गया है। इसी पुलिसिया कार्रवाई के दौरान छात्रों के साथ हुई बदसलूकी ने विपक्ष को सरकार पर वार करने का एक बड़ा मौका दे दिया है।
जनता और समर्थकों की प्रतिक्रिया
अखिलेश यादव के इस मुखर रुख के बाद आम जनता और उनके समर्थकों की ओर से भारी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। लोग छात्रों के भविष्य को लेकर सरकार की उदासीनता पर कड़ी नाराजगी जता रहे हैं और इस कार्रवाई को तानाशाही करार दे रहे हैं। कई लोगों ने सपा प्रमुख के समर्थन में आवाज उठाते हुए कहा है कि युवाओं के हक की इस लड़ाई में वे पूरी तरह से उनके साथ हैं। वहीं कुछ लोगों ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे नारों की जमीनी हकीकत पर सवाल उठाते हुए सरकार की कड़ी आलोचना की है।


























