अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे की कथित चोरी के मामले पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मंदिर में मिले दान और चढ़ावे में हुई अनियमितताओं को लेकर सत्ता पक्ष की नीयत और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
चंदा चोरी के आरोपों पर अखिलेश यादव का हमला
अखिलेश यादव ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में तंज कसते हुए लिखा कि चढ़ावा, चंदा और दान चुराने वाले कहां मिलेंगे। इसका जवाब खुद ही देते हुए उन्होंने लिखा कि वे बीजेपी के दफ़्तर में मिलेंगे। इसके आगे उन्होंने पूछा कि इस चोरी का हिसाब कहां दर्ज है, तो कहा कि अनरजिस्टर्ड के रजिस्टर में इसका हिसाब रखा गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख ने इस मुद्दे के बहाने बीजेपी और मंदिर ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय को निशाने पर लेते हुए कहा कि जनता अब ऐसे लोगों को न तो चंदा देगी और न ही वोट।
एसआईटी जांच और 3 आरोपियों की रिमांड
राम मंदिर में दान और चढ़ावे की रसीदें न मिलने के दावों के बाद मामला पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक पहुंच गया था। इस मामले की गहराई से जांच के लिए एक विशेष जांच टीम यानी एसआईटी का गठन किया गया, जिसने अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर छापेमारी और गिरफ्तारियां की हैं। इस मामले में पकड़े गए तीन मुख्य आरोपियों की 7 दिनों की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी गई, ताकि चोरी के पूरे नेटवर्क और गायब रसीदों की कड़ियों को जोड़ा जा सके।
ट्रस्ट ने सार्वजनिक किया 3264 करोड़ रुपये का हिसाब
मंदिरों में श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था और दान के बीच इस विवाद ने पूरे देश में पारदर्शिता को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। विवाद बढ़ने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर में आए कुल चंदे का आधिकारिक विवरण सार्वजनिक किया है। ट्रस्ट द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार राम मंदिर निर्माण और व्यवस्था के लिए कुल 3264 करोड़ रुपये का दान प्राप्त हुआ है। ट्रस्ट का दावा है कि सभी वित्तीय लेनदेन और दान का हिसाब पूरी पारदर्शिता के साथ रखा गया है।
संसद परिसर में प्रदर्शन और राजनीतिक संग्राम
इस मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने इसे सड़क और संसद तक पहुंचा दिया है। सपा कार्यकर्ताओं और सांसदों ने संसद परिसर में सांकेतिक रूप से चंदा इकट्ठा कर चढ़ावा चोरी के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। विपक्ष का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर मिलने वाले दान में वित्तीय अनियमितता श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ है, इसलिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
जनता की प्रतिक्रिया
अखिलेश यादव की इस टिप्पणी पर सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की ओर से मिला-जुला और तीखा रुख देखने को मिला। जहां एक ओर समर्थकों ने मंदिर के वित्तीय प्रबंधन में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की, वहीं दूसरी ओर आलोचकों ने इसे राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास बताते हुए पूर्ववर्ती घटनाओं का हवाला दिया।



























