उत्तर प्रदेश के प्रमुख विपक्षी नेता अखिलेश यादव ने बारिश के बाद नए नवेले नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में हुए जलभराव को लेकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी सरकार पर जोरदार निशाना साधा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट शेयर करते हुए उन्होंने बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता पर सवाल उठाए और तंज कसा कि क्या अब हवाई अड्डे पर विमानों की जगह नाव चलानी पड़ेगी।
सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव का तंज और भ्रष्टाचार के आरोप
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक अकाउंट से X पर लिखा कि जहां भी भाजपा सरकार है, वहां भारी भ्रष्टाचार देखने को मिल रहा है। उन्होंने बारिश के पानी से लबालब भरे एयरपोर्ट परिसर की तस्वीरें और वीडियो संदर्भ के रूप में साझा करते हुए कहा कि इतने बड़े प्रोजेक्ट की यह हालत शासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।
₹29,560 करोड़ के महाप्रोजेक्ट की लागत और उद्घाटन का संदर्भ
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट राज्य के सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में से एक है। इस प्रोजेक्ट के पहले चरण को तैयार करने में लगभग ₹11,282 करोड़ की लागत आई है। वहीं, सभी चरणों को मिलाकर इस पूरे इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत ₹29,560 करोड़ तय की गई है। इस अत्याधुनिक हवाई अड्डे का औपचारिक उद्घाटन हाल ही में 28 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। हालांकि, उद्घाटन के कुछ समय बाद ही पहली बड़ी बारिश में जल निकासी व्यवस्था ठप हो जाने से एयरपोर्ट के संचालन और निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर बहस छिड़ गई है।
चीन-अमेरिका से तुलना बनाम पुरानी सरकारों का रिकॉर्ड
इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छिड़ गई है। आलोचकों ने भारत के बुनियादी ढांचे की तुलना चीन, अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे विकसित देशों से करते हुए कहा कि इतनी भारी भरकम लागत के बावजूद पहली ही बारिश में पुलों और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों का यह हाल होना चिंताजनक है। दूसरी ओर, सरकार के समर्थकों और इंजीनियरों के पक्षकारों का कहना है कि भारी बारिश के दौरान पानी की निकासी में कुछ तकनीकी समस्याएं आ सकती हैं, जिन्हें तुरंत सुधारा जा सकता है। उन्होंने विपक्ष पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए देश के तकनीशियनों और अभियंताओं की मेहनत को नजरअंदाज कर हर प्रशासनिक खामी को राजनीति से जोड़ना सही नहीं है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर आम यूजर्स की प्रतिक्रियाएं दो धड़ों में बंटी नजर आईं। कई लोगों ने अरबों रुपये के प्रोजेक्ट में हुए जलभराव की उच्च स्तरीय जांच की मांग की, जबकि अन्य लोगों ने इसे मौसमी समस्या बताते हुए राजनीतिक बयानबाजी से दूर रहने की सलाह दी।



























