प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोशल मीडिया मंच X पर अपनी स्लोवाकिया यात्रा से जुड़ा एक खास अनुभव साझा किया है, जो भारत और स्लोवाकिया के बीच गहराते सांस्कृतिक रिश्ते की ओर इशारा करता है। उन्होंने बताया कि गंगा के तट पर बसे वाराणसी यानी बनारस की आत्मा अब हजारों किलोमीटर दूर यूरोप के एक शहर में भी महसूस की जा सकती है।
ब्राटिस्लावा में बनारस की प्रदर्शनी
मोदी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उन्होंने एक दिन पहले ब्राटिस्लावा के प्रेसिडेंशियल पैलेस में President Pellegrini के साथ मिलकर वाराणसी को समर्पित एक आकर्षक प्रदर्शनी देखी। इस प्रदर्शनी की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इसमें उन स्लोवाक कलाकारों की कलाकृतियां भी शामिल थीं, जिन्होंने हाल ही में इस प्राचीन भारतीय शहर का दौरा किया था। यानी विदेशी कलाकारों ने बनारस को अपनी आंखों से देखा, उसे महसूस किया और फिर उसे अपने कैनवस पर उतारा।
कला और संस्कृति की साझी भाषा
प्रधानमंत्री ने इस मौके को कला और संस्कृति के अनूठे जुड़ाव के रूप में रेखांकित किया। उनका संदेश साफ था कि कला किसी सीमा या भाषा की मोहताज नहीं होती। एक ओर जहां बनारस अपनी घाटों, परंपराओं और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए जाना जाता है, वहीं अब वही पहचान स्लोवाक कलाकारों के नजरिए से ब्राटिस्लावा की दीवारों पर सजी नजर आई। दो देशों की संस्कृतियों को जोड़ने वाला यह आयोजन इस बात का उदाहरण है कि कैसे एक भारतीय शहर की कहानी यूरोप तक पहुंच रही है।
जनता की प्रतिक्रिया
मोदी की इस पोस्ट पर लोगों ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर मिलती पहचान और दोनों देशों के बीच कला के जरिए बने रिश्ते की खूब सराहना की, जबकि कुछ लोगों ने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणियां कीं और कुछ ने सरकार की नीतियों से जुड़े सवाल भी उठाए।













