यूएस-कनाडा टैरिफ पर रोक और फेड ब्याज दर की घटती उम्मीदों से गिरा USD/CAD, 1.3790 के करीब पहुंचाकोलंबो में 23 अगस्त से भिड़ेंगे भारत और श्रीलंका, सीरीज 2-0 से कब्जाने पर टीम इंडिया की नजरगैस पर बार-बार उबलकर गिरता है दूध? इन 5 आसान उपायों से बचाएं समय और पोषणबोट ने भारत में लॉन्च किए 8 नए पार्टीपाल स्पीकर्स, ₹9,499 से शुरू होती है कीमतदरभंगा दिल्ली बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस का कर्पूरी ग्राम पर ठहराव शुरू, चेक करें नया टाइम टेबलनैनीताल में मतदाता सूची के नोटिस पर घबराएं नहीं, एडीएम विवेक राय ने बताया नियम और प्रक्रियाविभा शर्मा और डायना बॉमराइंड के शोध के आइने में समझें अत्यधिक सख्त पेरेंटिंग के 4 गंभीर प्रभावबोर्ड के निलंबन और भ्रष्टाचार जांच के बीच मोंटी देसाई ने 3 महीने बाद छोड़ा कनाडाई टीम के हेड कोच का पदइंस्टामार्ट से मंगवाई एनर्जी ड्रिंक के साथ निकले जिंदा कॉकरोच, अभिनेत्री श्वेता तिवारी पूछने लगीं तुकाराम मुंढे का पताउत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों की संख्या 120 तक पहुंचने का अनुमान, डोनाल्ड ट्रंप का दावा निकला काफी कम
त्रिपुरा में पुलिसकर्मियों पर बढ़ते आरोपों से हड़कंप, विपक्ष के नेता जितेंद्र चौधरी ने जताई गहरी चिंतात्रिपुरा
20 अग॰ 2026, 12:20 pm (57 मिनट पहले)· 3

त्रिपुरा में पुलिसकर्मियों पर बढ़ते आरोपों से हड़कंप, विपक्ष के नेता जितेंद्र चौधरी ने जताई गहरी चिंता

त्रिपुरा के विपक्ष के नेता जितेंद्र चौधरी ने पुलिसकर्मियों पर लगे सोने की चोरी और छेड़छाड़ के गंभीर आरोपों पर चिंता जताई है, साथ ही डीजीपी अनुराग धनखड़ की मौत की जांच की रफ्तार पर भी सवाल खड़े किए हैं।

त्रिपुरा में पुलिस विभाग के अधिकारियों पर लग रहे आपराधिक और दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर राज्य की राजनीति में बहस तेज हो गई है। विधानसभा में विपक्ष के नेता और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता जितेंद्र चौधरी ने हाल ही में सामने आई घटनाओं का हवाला देते हुए कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पुलिस बल से राजनीतिक दबाव से परे रहकर संवैधानिक मर्यादा का पालन करने का आह्वान किया है।

विशालगढ़ और कंचनपुर थानों के अधिकारियों पर गंभीर आरोप

राज्य के अलग-अलग जिलों में तैनात थाना प्रभारियों पर लगे आरोपों के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। सिपाहीजाला जिले के विशालगढ़ पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी पर सोने के आभूषण चोरी करने का आरोप लगा है। इस मामले में मंगलवार को त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप करते हुए संबंधित अधिकारियों को थाना प्रभारी के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने का आदेश दिया।

ये भी पढ़ें

इसी तरह की एक अन्य घटना उत्तर त्रिपुरा जिले से सामने आई है। वहां एक महिला कार्यकर्ता ने सोमवार को जिले के पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, कंचनपुर पुलिस थाने के अंदर ही थाना प्रभारी ने उसके साथ छेड़छाड़ करने का प्रयास किया। इन लगातार घटी घटनाओं ने पुलिस स्टेशनों के प्रमुखों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच प्रक्रिया की धीमी गति और नशीले पदार्थों के मामलों पर सवाल

पुलिस प्रशासन पर बढ़ते जनता के अविश्वास को लेकर जितेंद्र चौधरी ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि "मैं यह नहीं कह रहा कि सभी आरोप सौ फीसदी सच हैं, लेकिन जिस तरह पुलिस के खिलाफ शिकायतें सामने आ रही हैं, वह राज्य के नागरिकों के लिए बेहद गंभीर चिंता का विषय है।"

इसके साथ ही सीपीआई(एम) के राज्य सचिव जितेंद्र चौधरी ने त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग धनखड़ की मौत के मामले में जारी जांच की प्रगति पर भी सवाल उठाए। 20 जुलाई को अगरतला स्थित पुलिस मुख्यालय के शौचालय में डीजीपी का शव फंदे से लटका मिला था। चौधरी ने इस मामले की जांच में हो रही देरी पर असंतोष जताते हुए पारदर्शी कार्रवाई की मांग की।

चौधरी ने राज्य में करोड़ों रुपये मूल्य के नशीले पदार्थों की जब्ती के बावजूद दोषियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई न होने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ पकड़े जाने के बाद भी ठोस कार्रवाई का अभाव पुलिस बल की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा करता है।

त्रिपुरा पुलिस के गौरवशाली इतिहास और निष्पक्षता की याद दिलाई

विपक्ष के नेता ने राज्य पुलिस के गौरवशाली इतिहास का स्मरण कराते हुए कहा कि त्रिपुरा पुलिस को राष्ट्रपति के रंग (प्रेसिडेंट्स कलर) से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने याद दिलाया कि इस बल ने अतीत में त्रिपुरा नेशनल वॉलंटियर्स (टीएनवी), नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (एनएलएफटी) और ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स (एटीटीएफ) जैसे उग्रवादी संगठनों का मुकाबला करते हुए राज्य में शांति स्थापित की थी।

चौधरी ने सभी रैंकों के पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों से अपनी जिम्मेदारी निष्पक्षता से निभाने की अपील की। उन्होंने पुलिसकर्मियों का आह्वान किया कि वे सत्ताधारी दल के नेताओं के किसी भी गैरकानूनी निर्देश को मानने से इनकार करें और संविधान के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखें, ताकि त्रिपुरा पुलिस की साख और विश्वसनीयता बनी रहे।

सवाल-जवाब

विपक्ष के नेता जितेंद्र चौधरी ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए हैं?
उन्होंने पुलिस अधिकारियों पर सोने की चोरी और थाने के भीतर महिला कार्यकर्ता से छेड़छाड़ के आरोपों पर चिंता जताई है।
त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने किस मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया?
उच्च न्यायालय ने सेपाहिजला जिले के विशालगढ़ थाने के प्रभारी के खिलाफ सोने के गहने चोरी करने के आरोप में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया।
उत्तर त्रिपुरा जिले के कंचनपुर थाने से क्या मामला सामने आया है?
एक महिला कार्यकर्ता ने आरोप लगाया है कि कंचनपुर थाने के प्रभारी अधिकारी ने थाने के अंदर उसके साथ छेड़छाड़ की कोशिश की।
पूर्व डीजीपी अनुराग धनखड़ से जुड़ा मामला क्या है?
20 जुलाई को अगरतला पुलिस मुख्यालय में डीजीपी अनुराग धनखड़ का शव मिला था, जिसकी जांच की धीमी रफ्तार पर जितेंद्र चौधरी ने सवाल उठाए हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·42 मिनट पहले

त्रिपुरा में कानून-व्यवस्था के रखवालों पर ही गंभीर आपराधिक आरोप लगना और उच्च न्यायालय को दखल देकर एफआईआर का आदेश देना प्रशासनिक व्यवस्था पर एक गहरा सवालिया निशान है। ऐसे मामलों में जब तक त्वरित और पारदर्शी जांच नहीं होती, तब तक जनता का पुलिस से विश्वास उठना तय है। खासकर, एक डीजीपी की संदिग्‍ध मौत के मामले में जांच की सुस्त रफ्तार और नशीले पदार्थों के बड़े रैकेट पर ठोस कार्रवाई का अभाव यह संकेत देता है कि शासन और आंतरिक निगरानी तंत्र में सुधार की सख्त जरूरत है। विपक्ष के इन तेवरों से आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में प्रशासनिक तंत्र और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर बड़ा टकराव देखने को मिल सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·42 मिनट पहले

त्रिपुरा के विशालगढ़ और कंचनपुर थानों में सामने आए मामले और डीजीपी की मौत की जांच में देरी यह दर्शाती है कि राज्य में संस्थागत जवाबदेही गंभीर संकट में है। यदि उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद ही एफआईआर दर्ज होती है और विपक्ष नशीले मामलों में ढिलाई पर सवाल उठाता है, तो यह स्पष्ट है कि आंतरिक निगरानी प्रणाली कमजोर हो चुकी है। आगामी विधानसभा सत्र में कानून-व्यवस्था का यह मुद्दा सरकार के लिए राजनीतिक रूप से भारी पड़ सकता है और ब्यूरोक्रेसी पर से जनता का भरोसा कम हो सकता है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR