त्रिपुरा में पुलिस विभाग के अधिकारियों पर लग रहे आपराधिक और दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर राज्य की राजनीति में बहस तेज हो गई है। विधानसभा में विपक्ष के नेता और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता जितेंद्र चौधरी ने हाल ही में सामने आई घटनाओं का हवाला देते हुए कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पुलिस बल से राजनीतिक दबाव से परे रहकर संवैधानिक मर्यादा का पालन करने का आह्वान किया है।
विशालगढ़ और कंचनपुर थानों के अधिकारियों पर गंभीर आरोप
राज्य के अलग-अलग जिलों में तैनात थाना प्रभारियों पर लगे आरोपों के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। सिपाहीजाला जिले के विशालगढ़ पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी पर सोने के आभूषण चोरी करने का आरोप लगा है। इस मामले में मंगलवार को त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप करते हुए संबंधित अधिकारियों को थाना प्रभारी के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने का आदेश दिया।
इसी तरह की एक अन्य घटना उत्तर त्रिपुरा जिले से सामने आई है। वहां एक महिला कार्यकर्ता ने सोमवार को जिले के पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, कंचनपुर पुलिस थाने के अंदर ही थाना प्रभारी ने उसके साथ छेड़छाड़ करने का प्रयास किया। इन लगातार घटी घटनाओं ने पुलिस स्टेशनों के प्रमुखों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच प्रक्रिया की धीमी गति और नशीले पदार्थों के मामलों पर सवाल
पुलिस प्रशासन पर बढ़ते जनता के अविश्वास को लेकर जितेंद्र चौधरी ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि "मैं यह नहीं कह रहा कि सभी आरोप सौ फीसदी सच हैं, लेकिन जिस तरह पुलिस के खिलाफ शिकायतें सामने आ रही हैं, वह राज्य के नागरिकों के लिए बेहद गंभीर चिंता का विषय है।"
इसके साथ ही सीपीआई(एम) के राज्य सचिव जितेंद्र चौधरी ने त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग धनखड़ की मौत के मामले में जारी जांच की प्रगति पर भी सवाल उठाए। 20 जुलाई को अगरतला स्थित पुलिस मुख्यालय के शौचालय में डीजीपी का शव फंदे से लटका मिला था। चौधरी ने इस मामले की जांच में हो रही देरी पर असंतोष जताते हुए पारदर्शी कार्रवाई की मांग की।
चौधरी ने राज्य में करोड़ों रुपये मूल्य के नशीले पदार्थों की जब्ती के बावजूद दोषियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई न होने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ पकड़े जाने के बाद भी ठोस कार्रवाई का अभाव पुलिस बल की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा करता है।
त्रिपुरा पुलिस के गौरवशाली इतिहास और निष्पक्षता की याद दिलाई
विपक्ष के नेता ने राज्य पुलिस के गौरवशाली इतिहास का स्मरण कराते हुए कहा कि त्रिपुरा पुलिस को राष्ट्रपति के रंग (प्रेसिडेंट्स कलर) से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने याद दिलाया कि इस बल ने अतीत में त्रिपुरा नेशनल वॉलंटियर्स (टीएनवी), नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (एनएलएफटी) और ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स (एटीटीएफ) जैसे उग्रवादी संगठनों का मुकाबला करते हुए राज्य में शांति स्थापित की थी।
चौधरी ने सभी रैंकों के पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों से अपनी जिम्मेदारी निष्पक्षता से निभाने की अपील की। उन्होंने पुलिसकर्मियों का आह्वान किया कि वे सत्ताधारी दल के नेताओं के किसी भी गैरकानूनी निर्देश को मानने से इनकार करें और संविधान के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखें, ताकि त्रिपुरा पुलिस की साख और विश्वसनीयता बनी रहे।



















