प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर गुजरात के सानंद में सीजी सेमी के आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट, यानी OSAT, प्लांट के उद्घाटन के दौरान का एक निजी अनुभव साझा किया।
मोदी ने क्या लिखा
अपने @narendramodi हैंडल से किए गए पोस्ट में मोदी ने बताया कि उद्घाटन कार्यक्रम के सबसे खास पलों में से एक वहां काम कर रहे युवाओं से सीधे बातचीत करने का मौका था। उन्होंने बताया कि इस कार्यबल का बड़ा हिस्सा महिलाओं का है, जिनमें से कई देश के दूरदराज इलाकों से आकर इस प्लांट में नौकरी कर रही हैं।
सानंद का यह प्लांट क्यों अहम है
OSAT का मतलब है आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट, यानी चिप बनाने की उस प्रक्रिया का वह चरण जो सेमीकंडक्टर वेफर तैयार होने के बाद आता है। इस चरण में अलग-अलग चिप्स को पैकेज किया जाता है, उनकी जांच की जाती है और फिर उन्हें स्मार्टफोन से लेकर कार तक जैसे उपकरणों में लगाने लायक बनाया जाता है। भारत की धरती पर ऐसा प्लांट लगने का मतलब है कि चिप असेंबली और टेस्टिंग का यह विशेष काम, जो अभी लगभग पूरी तरह विदेशों में होता है, अब देश के भीतर भी हो सकेगा। सानंद का चुनाव भी खास है क्योंकि गुजरात का यह शहर लंबे समय से ऑटोमोबाइल और औद्योगिक विनिर्माण के केंद्र के तौर पर जाना जाता रहा है, और अब यहां भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं से जुड़ा एक प्लांट भी मौजूद है।
युवाओं, खासकर महिलाओं के लिए रोजगार
मोदी के पोस्ट में खास तौर पर इस बात पर जोर दिया गया कि इस प्लांट के कार्यबल में महिलाओं की संख्या काफी बड़ी है और इनमें से कई दूरदराज इलाकों से यहां काम करने आई हैं। इतने उच्च तकनीक वाले विनिर्माण प्लांट के लिए यह बात इसलिए मायने रखती है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि यहां बन रही नौकरियां सिर्फ बड़े औद्योगिक शहरों के कामगारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि छोटे शहरों और गांवों की युवा महिलाओं तक भी पहुंच रही हैं, जिन्हें अक्सर ऐसे मौके आसानी से नहीं मिल पाते।
जनता की प्रतिक्रिया
मोदी के इस पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं मिलीजुली रहीं। कई यूजर्स ने गर्व और खुशी जताते हुए युवाओं के लिए बने रोजगार के मौकों की तारीफ की और इसे देश के लिए गर्व का पल बताया। कुछ लोगों ने सवाल भी उठाए कि जब पुर्जे विदेशों से मंगाए जा रहे हैं तो इसे कितना आत्मनिर्भर विनिर्माण कहा जा सकता है। वहीं कुछ टिप्पणियां पूरी तरह अलग विषयों पर चली गईं, जिनमें अन्य नेताओं को श्रद्धांजलि देने से लेकर ईंधन नीति जैसी असंबंधित शिकायतें तक शामिल थीं, जो दिखाता है कि ऐसे पोस्ट अक्सर विषय से हटकर भी तरह-तरह की राय का मंच बन जाते हैं।




















