प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट X के माध्यम से एक महत्वपूर्ण संदेश साझा किया है। उन्होंने आगामी गणेश उत्सव की तैयारियों के संदर्भ में देश के शिल्पकारों और त्यौहार मनाने वाले श्रद्धालुओं के लिए अपना आग्रह रखा है। यह संदेश उनके चर्चित कार्यक्रम 'मन की बात' से जुड़ा हुआ है। प्रधानमंत्री ने इस दौरान मुख्य रूप से पर्यावरण की सुरक्षा और उत्सव को प्रकृति के अनुरूप मनाने पर अपना जोर दिया है।
पर्यावरण और उत्सव का संतुलन
गणेश उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में मूर्तियों का निर्माण और विसर्जन किया जाता है। प्रधानमंत्री का यह आग्रह इस बात को रेखांकित करता है कि मिट्टी की मूर्तियों और पर्यावरण के अनुकूल सामग्रियों का उपयोग करना समय की मांग है। अक्सर उत्सव के आयोजनों के दौरान नदियों की स्वच्छता और बढ़ते प्रदूषण को लेकर चिंता जताई जाती है, जिसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह अपील की है। उनका उद्देश्य उत्सव की पवित्रता को बनाए रखते हुए प्रकृति को होने वाले नुकसान को कम करना है।
पृष्ठभूमि
खबरों के मुताबिक, गणेश उत्सव भारत में आस्था का एक प्रमुख केंद्र है। यह त्यौहार न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इतिहास के पन्नों में इसे एक सार्वजनिक उत्सव के रूप में संगठित करने की शुरुआत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हुई थी, जिसे आज पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।
जनता की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री की इस अपील पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली है। जहाँ एक ओर कई लोग पर्यावरण के प्रति उनकी इस सोच का समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों ने नदियों की सफाई और प्रदूषण जैसे मुद्दों पर सवाल खड़े करते हुए अन्य प्रशासनिक विषयों पर ध्यान केंद्रित करने की मांग की है।




















