जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची मंगलवार को नई दिल्ली पहुंचीं और उनका तीन दिवसीय आधिकारिक भारत दौरा शुरू हुआ। अक्टूबर 2025 में जापान की प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है, जिसके दौरान 16वां भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
मोदी का स्वागत संदेश और बैठक का एजेंडा
मोदी ने एक्स पर लिखा कि भारत ताकाइची की इस पहली यात्रा पर उन्हें पाकर बेहद प्रसन्न है और वे अगले दिन होने वाली व्यापक बातचीत के लिए उत्सुक हैं। उनका कहना था कि यह चर्चा भारत-जापान विशेष सामरिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करेगी। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा सहयोग और बुनियादी ढांचे सहित तमाम अहम विषयों पर बातचीत होने की उम्मीद है, जो दोनों देशों की साझेदारी के अहम स्तंभ हैं।
इतिहास रचने वाली प्रधानमंत्री
सानाए ताकाइची अक्टूबर 2025 में जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं, जो देश के इतिहास में एक बड़ा पड़ाव था। उनके पदभार संभालते ही जापानी शेयर बाजारों ने सकारात्मक रुख दिखाया, जो निवेशकों के भरोसे का संकेत था। ताकाइची ने तेजी से अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई। जून 2026 में मलेशिया में आसियान शिखर सम्मेलन में उनका जोरदार स्वागत हुआ। इससे पहले मार्च 2026 में उन्होंने व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी, जिसमें मध्य पूर्व में बिगड़ते हालात पर भी चर्चा हुई।
जापान की बदलती और मुखर विदेश नीति
ताकाइची के नेतृत्व में जापान द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अपनी सबसे मुखर विदेश नीति की राह पर है। दशकों की सतर्क और रक्षात्मक कूटनीति से हटकर नया जापान अब क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रख रहा है, मजबूत द्विपक्षीय संबंध बना रहा है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है। इस बदलाव ने पूरे एशिया और उससे परे की सरकारों का ध्यान खींचा है।
भारत-जापान साझेदारी की बुनियाद
भारत और जापान के बीच की विशेष सामरिक और वैश्विक साझेदारी रक्षा सहयोग, द्विपक्षीय व्यापार, बुनियादी ढांचे में निवेश और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे कई आयामों को समेटती है। वार्षिक शिखर सम्मेलन वह केंद्रीय मंच है जहां दोनों देश इस साझेदारी की प्रगति का जायजा लेते हैं और आगे के लक्ष्य तय करते हैं। 16वां शिखर सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब पूरी दुनिया में बड़े भू-राजनीतिक बदलाव देखे जा रहे हैं, जिससे यह बैठक दोनों देशों के लिए और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
जनता की प्रतिक्रिया
मोदी की स्वागत पोस्ट पर सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिक्रिया दी और इसे दो महान सभ्यताओं के बीच गहराते रिश्तों का प्रतीक बताया। कई लोगों ने पूर्व जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे की याद ताजा करते हुए उम्मीद जताई कि ताकाइची के साथ यह मित्रता उसी जज्बे के साथ नई ऊंचाइयां छुएगी।




















