भारत ने पड़ोसी देशों के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता देते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में श्रीलंका को बड़ी मदद पहुंचाई है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि श्रीलंका की स्वास्थ्य प्रणाली को निरंतर सहयोग देने के लिए भारत पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में लगभग तीन टन टीबी यानी तपेदिक की जरूरी दवाइयां विशेष तौर पर कोलंबो भेजी गई हैं।
भारतीय वायु सेना के विमान से भेजी गई राहत सामग्री
इस पूरी सहायता सामग्री को भारतीय वायु सेना के सी130जे विमान के जरिए कोलंबो पहुंचाया गया है। भारत इस प्रकार के अभियानों के जरिए संकट की घड़ी में अपने पड़ोसी देशों की मदद के लिए हमेशा आगे रहता है। स्वास्थ्य मंत्रालय की सहभागिता से यह पूरी खेप तय समय पर रवाना की गई, जिससे वहां के जरूरतमंद मरीजों को समय पर इलाज मिल सके। यह कदम भारत की नेबरहुड फर्स्ट और विजन महासागर नीतियों के तहत उठाया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ाना है।
श्रीलंका के साथ द्विपक्षीय और मानवीय सहयोग का दायरा
भारत और श्रीलंका के बीच का संबंध केवल कूटनीतिक दायरे तक सीमित नहीं है, बल्कि समय-समय पर मानवीय आधार पर भी इसे मजबूत किया गया है। इससे पहले भी भारत ने चक्रवात डिटवाह के दौरान राहत सामग्री और वित्तीय सहायता के रूप में महत्वपूर्ण पैकेज उपलब्ध कराए थे। इसके अलावा ऊर्जा संकट के समय भी नई दिल्ली ने कोलंबो के एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में अपनी भूमिका निभाई है, जिसकी वहां की सरकार ने खुलकर सराहना की है।
स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में निरंतर सहायता
श्रीलंका के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र को बेहतर बनाने के लिए भारत और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन लगातार काम कर रहे हैं। हाल के दिनों में विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से वहां प्रयोगशाला क्षमताओं को बढ़ाने और ट्रांस-फैट के नियमों को लागू करने की दिशा में भी प्रयास किए गए हैं। इसके अलावा एआई सुविधाओं के विकास और तकनीकी मदद के मोर्चे पर भी दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है, जिससे आम नागरिकों को सीधा लाभ मिल सके।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस सहायता की घोषणा के बाद आम जनता ने भारत की इस मानवीय पहल की सराहना की और इसे पड़ोसी देशों के साथ मधुर संबंधों को बनाए रखने के लिए एक सकारात्मक कदम बताया।


























