राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नई बनी सड़क की गुणवत्ता और निर्माण कार्य में कथित गड़बड़ियों को लेकर सियासी विवाद अचानक गहरा गया है। विकासपुरी में रिंग रोड के पास सड़क की बदहाली और हाथों से उखड़ती परत दिखाने के दौरान हुए विवाद में मंत्री प्रवेश वर्मा द्वारा एक युवक को थप्पड़ जड़ने का मामला सामने आया। इस घटना के बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने तिलक नगर पहुंचकर खुद उस उखड़ती सड़क का मुआयना किया और केंद्र सरकार से मंत्री के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करने का सीधा आह्वान किया।
सड़क की गुणवत्ता पर सवाल और मौके पर थप्पड़ की घटना
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब विकासपुरी क्षेत्र में रिंग रोड की नई बनी सड़क के निर्माण स्तर पर स्थानीय स्तर पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गईं। आम आदमी पार्टी के एक विधायक ने मौके पर पहुंचकर सड़क की ऊपरी परत को हाथों से उखाड़कर दिखाया और दावा किया कि तारकोल की परत बिल्कुल टिक नहीं रही है। इसी दौरान वहां वीडियो बना रहे एक युवक के साथ तीखी बहस हुई, जिसके बाद मौके पर मौजूद मंत्री प्रवेश वर्मा ने अपना आपा खो दिया और उस युवक को थप्पड़ जड़ दिया। युवक ने बताया कि वह केवल सड़क के खराब निर्माण कार्य की रिकॉर्डिंग कर रहा था और उसने सवाल किया कि क्या नागरिक समस्याओं को उजागर करने पर आम लोगों के साथ ऐसा हिंसक व्यवहार किया जाएगा।
तिलक नगर पहुंचे केजरीवाल और मंत्री की बर्खास्तगी का मुद्दा
घटना की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद अरविंद केजरीवाल खुद हालात का जायजा लेने तिलक नगर पहुंचे। सड़क की खराब स्थिति को सीधे तौर पर भ्रष्टाचार का नतीजा बताते हुए उन्होंने कहा कि राजधानी में पहले कभी ऐसी घटिया किस्म की सड़क नहीं देखी गई। उन्होंने सार्वजनिक मंच और सोशल मीडिया पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि प्रवेश वर्मा को तत्काल पद से बर्खास्त किया जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। उनका कहना था कि निर्माण कार्यों में हो रहे भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए आम नागरिकों और युवा पीढ़ी की आवाज को ताकत के बल पर दबाया नहीं जा सकता।
प्रवेश वर्मा की सफाई और दोनों पक्षों के आरोप
विवाद बढ़ने पर मंत्री प्रवेश वर्मा ने भी एक वीडियो जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि सड़क निर्माण की प्रक्रिया में ताजा परत को जमने के लिए निश्चित समय की जरूरत होती है और पूरी तकनीकी प्रक्रिया को समझे बिना जानबूझकर विवाद खड़ा करने की कोशिश की जा रही थी। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस सफाई के बावजूद विरोध थमता नजर नहीं आ रहा है। आम आदमी पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए इसे सत्ता का अहंकार करार दिया और मामले में कानूनी जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।
जनता की प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम पर आम लोगों की तरफ से भी मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई नागरिकों ने सार्वजनिक जीवन में नेताओं द्वारा संयम खोने और हिंसा का सहारा लेने की कड़ी निंदा की, जबकि कई अन्य लोगों ने पुरानी समस्याओं और अन्य राज्यों में प्रशासनिक कार्रवाइयों का हवाला देते हुए इसे केवल सियासी माइलेज लेने का हथकंडा बताया।



























