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कैप्टन विक्रम बत्रा के 'ये दिल मांगे मोर' नारे पर बोले राजनाथ सिंह, रक्षा नीति में दिख रहा है वही साहसनेता जी
26 जुल॰ 2026, 12:36 pm (22 दिन पहले)· 0

कैप्टन विक्रम बत्रा के 'ये दिल मांगे मोर' नारे पर बोले राजनाथ सिंह, रक्षा नीति में दिख रहा है वही साहस

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कारगिल युद्ध के नायक कैप्टन विक्रम बत्रा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका प्रसिद्ध नारा आज भारत की आधुनिक रक्षा नीति का आधार बन चुका है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कारगिल युद्ध के महानायक कैप्टन विक्रम बत्रा को याद करते हुए उनके प्रसिद्ध नारे 'ये दिल मांगे मोर' को भारतीय सेना के अदम्य साहस का प्रतीक बताया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि यह केवल एक नारा नहीं था, बल्कि देश की सीमा पर तैनात हर सैनिक के कर्तव्य और समर्पण को दर्शाता है। उनके अनुसार, आज यही भावना भारत सरकार की आधुनिक रक्षा नीति और सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था में भी साफ दिखाई देती है।

कैप्टन विक्रम बत्रा का अदम्य साहस और बलिदान

कैप्टन विक्रम बत्रा को कारगिल युद्ध के दौरान उनके असाधारण और अदम्य साहस के लिए मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। मात्र 25 वर्ष की आयु में उन्होंने पाकिस्तानी घुसपैठियों के छक्के छुड़ाते हुए कई रणनीतिक चोटियों को वापस देश के नियंत्रण में लिया था। युद्ध पर जाने से पहले उनका यह संकल्प कि वे या तो तिरंगा लहराकर वापस आएंगे या फिर उसमें लिपटकर आएंगे लेकिन वापस जरूर आएंगे, आज भी करोड़ों भारतीयों को प्रेरित करता है। उनके जुड़वां भाई विशाल बत्रा भी अक्सर पहाड़ों में उनकी उपस्थिति महसूस करने की बात कहते हैं। उनकी वीरता का प्रभाव इतना गहरा है कि स्कॉटलैंड जैसी अंतरराष्ट्रीय जगहों पर भी लोग उनके बारे में जानने के लिए उत्सुक रहते हैं।

आधुनिक रक्षा नीति और आत्मनिर्भरता पर जोर

राजनाथ सिंह ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इस बात पर विशेष बल दिया कि कैप्टन बत्रा की यही अदम्य भावना वर्तमान रक्षा ढांचे का आधार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सेनाएं लगातार आधुनिक तकनीकों को अपना रही हैं। सरकार का मुख्य ध्यान रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भारत को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने पर है, ताकि देश की रक्षा प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और मजबूत बनाया जा सके।

सांस्कृतिक धरोहर और स्मृति

कैप्टन विक्रम बत्रा के जीवन पर बॉलीवुड फिल्म 'शेरशाह' भी बनाई जा चुकी है, जिसने उनके शौर्य की गाथा को घर-घर तक पहुंचाया। कैप्टन बत्रा के परिवार और उनके पिता का मानना है कि उनका यह महान बलिदान केवल इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसी उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश में उनके नाम पर एक विशेष स्मृति स्थल का निर्माण भी किया गया है ताकि आने वाली पीढ़ियां देश सेवा के इस सर्वोच्च उदाहरण से प्रेरणा ले सकें।

जनता की प्रतिक्रिया

इस सोशल मीडिया संदेश पर देश की जनता ने मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दी हैं। जहां एक ओर बड़ी संख्या में लोगों ने कैप्टन विक्रम बत्रा की वीरता को नमन करते हुए देशभक्ति की भावना प्रकट की, वहीं दूसरी ओर कुछ उपयोगकर्ताओं ने वर्तमान सैन्य नीतियों और 'अग्निवीर' जैसी भर्ती योजनाओं को लेकर सरकार के निर्णयों पर सवाल भी उठाए।

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सवाल-जवाब

राजनाथ सिंह ने कैप्टन विक्रम बत्रा के नारे के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि 'ये दिल मांगे मोर' केवल एक नारा नहीं था, बल्कि यह भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस का प्रतीक था, जो आज देश की रक्षा नीति में भी दिखता है।
कैप्टन विक्रम बत्रा कौन थे?
वे 1999 के कारगिल युद्ध के महानायक थे, जिन्हें अपनी अदम्य वीरता के लिए मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
क्या कैप्टन विक्रम बत्रा के जीवन पर कोई फिल्म बनी है?
हां, उनके जीवन और कारगिल युद्ध के योगदान पर आधारित बॉलीवुड फिल्म 'शेरशाह' बनी है, जिसमें सिद्धार्थ मल्होत्रा ने मुख्य भूमिका निभाई थी।
रक्षा मंत्री के अनुसार भारतीय सेना में क्या सुधार हो रहे हैं?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेनाओं को लगातार आधुनिक तकनीक दी जा रही है और घरेलू स्तर पर रक्षा उत्पादन बढ़ाया जा रहा है।
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