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डॉ. विक्रम साराभाई की जयंती पर राजनाथ सिंह ने दी श्रद्धांजलि, कहा- वैज्ञानिक सोच ने भारत को दी नई दिशानेता जी
12 अग॰ 2026, 10:18 am (3 घंटे पहले)· 2

डॉ. विक्रम साराभाई की जयंती पर राजनाथ सिंह ने दी श्रद्धांजलि, कहा- वैज्ञानिक सोच ने भारत को दी नई दिशा

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए देश के वैज्ञानिक विकास में उनके अतुलनीय योगदान को याद किया।

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 12 अगस्त को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई की जयंती पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए अपने संदेश में रक्षा मंत्री ने डॉ. साराभाई की दूरदर्शी वैज्ञानिक दृष्टि और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि किस तरह डॉ. साराभाई के विचारों ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा की मजबूत नींव रखी और देश को एक नई दिशा में आगे बढ़ाया।

राजनाथ सिंह का संदेश और मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संदेश में कहा कि डॉ. विक्रम साराभाई की वैज्ञानिक कल्पनाशीलता ने भारत के अंतरिक्ष सफर को आकार देने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने उल्लेख किया कि डॉ. साराभाई का यह अटूट विश्वास था कि विज्ञान का मुख्य उद्देश्य देश की सेवा करना और आम नागरिकों के जीवन में सुधार लाना होना चाहिए। राजनाथ सिंह ने कहा, "उनकी इस निष्ठा ने भारत के वैज्ञानिक प्रयासों को एक नई दिशा प्रदान की।"

रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत आज अंतरिक्ष अनुसंधान में जिस मुकाम पर पहुंचा है, उसका श्रेय डॉ. साराभाई जैसे महान दूरदर्शियों के विचारों को जाता है। उन्होंने देश के युवाओं से डॉ. साराभाई के आदर्शों को अपनाने और नवाचार के रास्ते पर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

कौन थे डॉ. विक्रम साराभाई

डॉ. विक्रम साराभाई का जन्म 12 अगस्त 1919 को अहमदाबाद में एक प्रतिष्ठित उद्योगपति परिवार में हुआ था। उन्हें व्यापक रूप से भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक माना जाता है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से भौतिकी में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे भारत लौटे और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाए। 30 दिसंबर 1971 को उनका असामयिक निधन हो गया था, लेकिन अपने अल्पकालिक जीवनकाल में उन्होंने देश के विज्ञान और उद्योग जगत को एक नया आकार दे दिया।

डॉ. साराभाई केवल एक महान वैज्ञानिक ही नहीं थे, बल्कि वे एक कुशल संस्थान निर्माता भी थे। उनका मानना था कि एक विकासशील राष्ट्र के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी विलासिता नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक प्रगति का एक अनिवार्य साधन है। उन्होंने यह साबित कर दिखाया कि भारत जैसे विकासशील देश में सीमित संसाधनों के बावजूद उन्नत तकनीक विकसित की जा सकती है।

इसरो की स्थापना और प्रमुख संस्थान

डॉ. विक्रम साराभाई ने 1962 में भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (इनकोस्पार) के गठन में केंद्रीय भूमिका निभाई, जिसे बाद में 1969 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का रूप दिया गया। उन्होंने केरल के थुम्बा में तिरुवनंतपुरम के पास पहली रॉकेट लॉन्चिंग साइट थुम्बा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन स्थापित करने का ऐतिहासिक काम किया।

अंतरिक्ष क्षेत्र के अलावा डॉ. साराभाई ने कई विश्वस्तरीय शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों की स्थापना की। अहमदाबाद में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल), भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम अहमदाबाद), दर्पण एकेडमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स और अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र जैसे 10 से अधिक प्रमुख संस्थान उनके प्रयासों का परिणाम हैं। उन्होंने कम्युनिटी साइंस सेंटर की नींव रखी ताकि आम जनता और बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि पैदा की जा सके।

भारत की अंतरिक्ष यात्रा और सामाजिक प्रभाव

डॉ. साराभाई के नेतृत्व में शुरू हुए उपग्रह अनुदेशात्मक टेलीविजन प्रयोग (साइट) ने 1970 के दशक में भारत के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा और कृषि संबंधी जानकारी पहुंचाने का काम किया। यह प्रयोग उपग्रह संचार तकनीक से आम जनता को जोड़ने की दिशा में दुनिया के सबसे बड़े सामाजिक प्रयोगों में से एक माना गया।

आज भारत चंद्रयान, मंगलयान और आदित्य एल1 जैसे जटिल अंतरिक्ष अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दे रहा है, जिसकी नींव डॉ. साराभाई ने दशकों पहले रखी थी। मौसम पूर्वानुमान, संचार व्यवस्था, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन, दूरस्थ शिक्षा और उपग्रह मानचित्रण में भारत की आत्मनिर्भरता डॉ. साराभाई की दूरदर्शिता का प्रत्यक्ष परिणाम है।

जनता की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर रक्षा मंत्री के इस संदेश के बाद नागरिकों और विभिन्न हस्तियों ने डॉ. विक्रम साराभाई को नमन किया। उपयोगकर्ताओं ने उनके योगदान की सराहना करते हुए लिखा कि आधुनिक भारत के निर्माण और इसरो की सफलताओं के पीछे डॉ. साराभाई का विजन हमेशा प्रेरणास्रोत रहेगा। लोगों ने उनके वैज्ञानिक जीवन को युवा पीढ़ी के लिए एक महान मार्गदर्शक बताया।

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सवाल-जवाब

डॉ. विक्रम साराभाई कौन थे?
डॉ. विक्रम साराभाई प्रसिद्ध भारतीय भौतिक वैज्ञानिक थे जिन्हें 'भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक' कहा जाता है। उन्होंने इसरो सहित कई प्रमुख वैज्ञानिक और शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की।
राजनाथ सिंह ने अपने संदेश में क्या कहा?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि डॉ. साराभाई की वैज्ञानिक सोच ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा की नींव रखी और उनका यह मानना था कि विज्ञान को देश की सेवा और नागरिकों के जीवन में सुधार के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
डॉ. विक्रम साराभाई की जयंती कब मनाई जाती है?
डॉ. विक्रम साराभाई का जन्म 12 अगस्त 1919 को हुआ था, इसलिए हर साल 12 अगस्त को उनकी जयंती मनाई जाती है।
डॉ. विक्रम साराभाई ने किन प्रमुख संस्थानों की स्थापना की?
उन्होंने इसरो (ISRO), भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL), और भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIMA Ahmedabad) जैसे प्रमुख संस्थानों की स्थापना में केंद्रीय भूमिका निभाई।
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टिप्पणियाँ 2

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·32 मिनट पहले

रक्षा मंत्री का यह स्मरण उस बुनियादी नीतिगत सोच को रेखांकित करता है जिसके तहत भारत ने सीमित संसाधनों के बावजूद अंतरिक्ष को विलासिता के बजाय सामाजिक-आर्थिक विकास का साधन माना। वर्तमान में जब अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी निवेश और अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के लिए खोला जा रहा है, तब साराभाई की संस्थागत दृष्टि और आत्मनिर्भरता का यह मॉडल भारत के भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों और वैश्विक कूटनीति के लिए सबसे बड़ा मार्गदर्शक साबित हो रहा है।

Priya Sharma@priya-sharma·31 मिनट पहले

डॉ. विक्रम साराभाई की यह दृष्टि केवल वैज्ञानिक उन्नति तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह आधुनिक भारतीय समाज की जीवनशैली और संस्कृति में नवाचार को पिरोने का एक माध्यम थी। आज जब हम युवाओं में स्टार्टअप संस्कृति और स्पेस टूरिज्म जैसे आधुनिक रुझानों को देखते हैं, तो इसकी जड़ें साराभाई द्वारा स्थापित संस्थानों और उनकी उस सोच में मिलती हैं जो विज्ञान को आम जनजीवन और सामाजिक प्रगति से जोड़ती है। यह सांस्कृतिक बदलाव भारत के आधुनिक व्यक्तित्व और वैश्विक पहचान को नई ऊंचाइयां दे रहा है।

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