विदेश मंत्री एस जयशंकर कतर में भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से मिले और इस मुलाकात की जानकारी उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर साझा की। उन्होंने बताया कि शाम को हुई यह बातचीत बेहद सार्थक रही और इसमें क्षेत्र के साथ भारत के जुड़ाव में सामुदायिक कल्याण की भूमिका पर खास जोर दिया गया।
पोस्ट में क्या लिखा
अपने पोस्ट में एस जयशंकर ने बताया कि कतर में भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ हुई यह मुलाकात अच्छी रही। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के साथ भारत के जुड़ाव में सामुदायिक कल्याण कितना अहम है, यह बात उन्होंने बातचीत के दौरान रेखांकित की। साथ ही उन्होंने कहा कि मौजूदा मुश्किल हालात में कतरी समाज के लिए भारतीय समुदाय की प्रतिबद्धता और योगदान वाकई सराहनीय हैं।
मुश्किल समय के पीछे की वजह
पोस्ट में जिन मुश्किल हालात का जिक्र है, उसे हाल की घटनाओं से जोड़कर देखा जा सकता है। कतर में एक औद्योगिक दुर्घटना के बाद वहां काम कर रहे भारतीय नागरिकों को वापस लाने का सिलसिला चला, जिसमें आठ और भारतीय नागरिकों की स्वदेश वापसी हुई। इससे पहले भी कतर एयरवेज की उड़ानों के जरिए 500 से ज्यादा फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए समन्वित कूटनीतिक प्रयास किए गए थे। ऐसे हालात में भारतीय समुदाय ने कतरी समाज के साथ मिलकर जिस तरह काम किया, उसी की सराहना विदेश मंत्री ने की।
कतर में भारतीय समुदाय से जुड़ी अन्य गतिविधियां
पिछले कुछ समय से कतर में भारतीय दूतावास और समुदाय के बीच लगातार संवाद बना हुआ है। दूतावास ने हाल ही में एक ओपन हाउस कार्यक्रम आयोजित कर लोगों से जुड़े कांसुलर और सामुदायिक मुद्दों पर बात की। भारतीय राजदूत विपुल ने आईसीसी लाइब्रेरी का उद्घाटन भी किया, जबकि आईबीपीसी कतर ने पीएचडी चैंबर से आए एक भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी की। इससे पहले भारतीय समुदाय ने वायनाड बाढ़ पीड़ितों के लिए मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में पांच करोड़ रुपये का योगदान भी दिया था, जो समुदाय की सक्रियता को दिखाता है।
जनता की प्रतिक्रिया
एस जयशंकर के इस पोस्ट पर लोगों की राय बंटी नजर आई। कई यूजर्स ने प्रवासी भारतीयों से सीधे संवाद की इस पहल को सराहा और इसे कूटनीति का असली आधार बताया, तो कुछ ने सवाल उठाते हुए और व्यंग्यात्मक अंदाज में प्रतिक्रिया दी।





















