समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने लखनऊ के केसरबाग इलाके में बन रहे एक भवन को लेकर एक्स पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया कि यह निर्माण बिना नक्शा पास कराए किया जा रहा है और यह भाजपा का कार्यालय है, इसलिए इसे अवैध बताया गया।
क्या लिखा अखिलेश यादव ने
अपने एक्स हैंडल से किए गए पोस्ट में अखिलेश यादव ने इस निर्माण को "नक्शाविहीन-निर्माणाधीन अवैध भाजपा कार्यालय" बताया। उन्होंने आगे लिखा कि यह जानकारी लखनऊ विकास प्राधिकरण यानी एलडीए और लखनऊ नगर निगम के सूचनार्थ व संज्ञानार्थ दी जा रही है। इसका सीधा मतलब है कि अखिलेश यादव चाहते हैं कि ये दोनों संस्थाएं इस मामले पर ध्यान दें और अपने स्तर से जांच व जरूरी कार्रवाई करें। पोस्ट में उन्होंने #केसरबाग_लखनऊ हैशटैग का इस्तेमाल किया, जिससे साफ है कि यह मामला शहर के केसरबाग इलाके से जुड़ा है।
एलडीए और नगर निगम क्यों निशाने पर
किसी भी नए निर्माण के लिए संबंधित विकास प्राधिकरण से नक्शा पास कराना जरूरी होता है, और उसके बाद निर्माण नियमों के मुताबिक हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी नगर निगम जैसी स्थानीय संस्थाएं करती हैं। अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में सीधे इन्हीं दोनों संस्थाओं यानी एलडीए और लखनऊ नगर निगम को टैग करते हुए मामले की जानकारी दी है। अखिलेश यादव के इस दावे से यह भी साफ होता है कि इस तरह के मामलों में इन्हीं दो नागरिक संस्थाओं के पास साइट का निरीक्षण कराने, नोटिस जारी करने या अवैध निर्माण को सील करने का अधिकार होता है, इसलिए सार्वजनिक तौर पर सामने आने के बाद कार्रवाई की जिम्मेदारी भी इन्हीं पर आ जाती है। ऐसे में अब देखना यह है कि एलडीए और नगर निगम इस दावे पर जांच बैठाते हैं या नहीं, और अगर निर्माण वाकई बिना पास नक्शे के हो रहा है तो उस पर क्या कार्रवाई होती है।
लखनऊ के बारे में
लखनऊ उत्तर प्रदेश राज्य की राजधानी है और प्रशासनिक रूप से लखनऊ जिले के अंतर्गत आता है। राज्य की राजधानी होने के चलते यहां एलडीए और लखनऊ नगर निगम जैसी बड़ी प्रशासनिक संस्थाएं मौजूद हैं, जो शहर में निर्माण कार्यों की मंजूरी और उनकी निगरानी का जिम्मा संभालती हैं। केसरबाग इलाका इसी शहर का हिस्सा है, जहां यह कथित निर्माण हो रहा है और जिसे लेकर अब विवाद खड़ा हुआ है।
जनता की प्रतिक्रिया
अखिलेश यादव के इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं बंटी हुई नजर आईं। एक तबके ने अवैध निर्माण के दावे पर तुरंत कार्रवाई की मांग करते हुए समर्थन जताया, तो दूसरी ओर कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या इस मामले में वाकई कोई कार्रवाई होगी और अखिलेश यादव से इस दावे के समर्थन में ठोस दस्तावेज या सबूत मांगे। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि इस तरह के मामलों में कार्रवाई को लेकर दोहरा रवैया अपनाया जाता है, जबकि कुछ अन्य ने इसे विपक्षी राजनीति का हिस्सा बताया। कुल मिलाकर, पोस्ट को लेकर समर्थन, आलोचना और सवाल तीनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।




























