नई दिल्ली: हिंदी फिल्मों में विलेन की भूमिका से अपने करियर की शुरुआत करने वाले शत्रुघ्न सिन्हा आज एक वरिष्ठ राजनेता के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए हैं। वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस के सांसद के तौर पर सक्रिय शत्रुघ्न सिन्हा ने उन कठिन परिस्थितियों के बारे में खुलकर बात की, जिनका सामना बंगाल विधानसभा चुनावों के परिणामों के बाद टीएमसी को करना पड़ा। चुनाव में भाजपा से मिली हार के बाद, जब पार्टी के कई सदस्य साथ छोड़कर अलग हो गए, तब भी शत्रुघ्न सिन्हा ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ा।
ममता बनर्जी के प्रति अटूट भावनात्मक जुड़ाव
शत्रुघ्न सिन्हा के अनुसार, ममता बनर्जी के साथ उनका खड़ा रहना किसी भी तरह की राजनीतिक रणनीति नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से एक भावनात्मक फैसला है। उन्होंने बताया कि जब वे स्वयं अपने जीवन के सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहे थे, तब ममता बनर्जी ने उनका भरपूर सहयोग किया था। ऐसे में उनका कहना है कि जो व्यक्ति मुश्किल वक्त में साथ दे, उनका साथ छोड़ना उनके सिद्धांतों के खिलाफ है।
बच्चों की राजनीतिक रुचि और सोनाक्षी का नजरिया
जब शत्रुघ्न सिन्हा से उनके परिवार और बच्चों की राजनीति में भागीदारी पर सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बच्चों की प्राथमिकताएं अलग हैं। उन्होंने बताया कि उनके बेटे लव सिन्हा की रुचि भाजपा की विचारधारा में है और वे इसमें सक्रियता दिखाते हैं। वहीं, उनके दूसरे बेटे कुश सिन्हा ने डायरेक्शन (निर्देशन) के क्षेत्र में काम किया है। उनकी हालिया फिल्म 'निकिता रॉय' ओटीटी प्लेटफॉर्म पर काफी चर्चा में रही और नंबर 1 पर ट्रेंड भी हुई थी। कुश भाजपा नेताओं के बच्चों के साथ भी जुड़ाव रखते हैं। दूसरी ओर, उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सोनाक्षी सिन्हा का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।
सोनाक्षी सिन्हा के शब्दों ने कर दिया भावुक
शत्रुघ्न सिन्हा ने खुलासा किया कि कई लोग चाहते थे कि सोनाक्षी राजनीति में कदम रखें, लेकिन बेटी की इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने एक भावुक वाकया साझा करते हुए कहा, 'मैंने सोचा था कि सोनाक्षी मुझसे सवाल करेगी कि मैं उन लोगों के साथ क्यों नहीं गया जिन्होंने पाला बदल लिया, लेकिन हुआ इसके उलट।' सोनाक्षी ने उनके फैसले की प्रशंसा की और कहा कि उन्हें अपने पिता पर गर्व है कि वे इस मुश्किल समय में, जब लोग खरीद-फरोख्त का हिस्सा बन रहे हैं, तब भी अपने स्टैंड पर अडिग रहे। सोनाक्षी की यह बात सुनकर शत्रुघ्न सिन्हा न केवल तसल्ली महसूस की, बल्कि उनकी आंखों में आंसू भी आ गए।
राजेश खन्ना के खिलाफ चुनाव और फिल्मी शुरुआत
अपने राजनीतिक अतीत को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने सफर की शुरुआत भाजपा से की थी। तब पार्टी के एक बड़े नेता के कहने पर उन्होंने सुपरस्टार राजेश खन्ना के खिलाफ चुनाव लड़ा था, जिसका उन्हें बाद में काफी अफसोस हुआ क्योंकि राजेश खन्ना उनके अच्छे मित्र थे। अपने फिल्मी करियर की शुरुआत पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने देवानंद की फिल्म 'प्रेम पुजारी' से सिनेमा की दुनिया में कदम रखा था। अपने दामाद जहीर इकबाल के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि जहीर बहुत ही नेक इंसान हैं और सोनाक्षी के साथ उनकी जोड़ी एक-दूसरे के लिए एकदम सही है।













