उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के महान योद्धा बाबू बंधू सिंह के बलिदान दिवस पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। सामाजिक मंच X पर पोस्ट करते हुए उन्होंने देश की स्वतंत्रता और अखंडता के लिए बंधू सिंह के अतुलनीय साहस और समर्पण को याद किया।
कौन थे क्रांतिकारी बाबू बंधू सिंह
बाबू बंधू सिंह गोरखपुर की पावन धरती के ऐसे वीर सेनानी थे, जिन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अत्याचारों के खिलाफ बिगुल फूंका था। उन्होंने अंग्रेजों की ताकतवर सेना के सामने घुटने टेकने के बजाय जंगल क्षेत्र को अपना ठिकाना बनाया और ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध का सफल नेतृत्व किया। वे ब्रिटिश हुकूमत के लिए एक बड़ा खौफ बन चुके थे। आखिरकार अंग्रेजों ने उन्हें बंदी बना लिया और 12 अगस्त 1858 को गोरखपुर के अली नगर चौराहे पर सार्वजनिक रूप से फांसी देने का फरमान सुनाया।
7 बार टूटा फांसी का फंदा और तरकुलहा देवी का चमत्कार
बाबू बंधू सिंह मां तरकुलहा देवी के अनन्य भक्त थे। पौराणिक मान्यताओं और ऐतिहासिक आख्यानों के अनुसार, जब ब्रिटिश जल्लादों ने अली नगर चौराहे पर उन्हें फांसी देने की कोशिश की, तो तरकुलहा देवी की कृपा से लगातार सात बार फांसी का फंदा टूट गया। इस अलौकिक घटना से ब्रिटिश अधिकारी भी दंग रह गए थे। इसके बाद बंधू सिंह ने स्वयं मां तरकुलहा देवी से अपनी देह त्यागने की प्रार्थना की, जिसके बाद आठवीं बार में 12 अगस्त 1858 को वे वीरगति को प्राप्त हुए। आज भी गोरखपुर में तरकुलहा देवी मंदिर लोगों की अगाध आस्था और देशभक्ति का प्रमुख केंद्र है।
योगी आदित्यनाथ का संदेश
स्वाधीनता सेनानी को नमन करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए बाबू बंधू सिंह का बलिदान हमेशा राष्ट्र चेतना को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा, "उन्होंने वीरतापूर्वक अंग्रेजों का प्रतिकार किया।" उनका अद्वितीय शौर्य आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव मार्गदर्शक बना रहेगा।
जनता की प्रतिक्रिया
इस श्रद्धांजलि संदेश के बाद आम नागरिकों ने भी सोशल मीडिया पर बाबू बंधू सिंह को नमन किया। लोगों ने गोरखपुर के इस महान क्रांतिकारी की शहादत को नमन करते हुए उनके इतिहास को पाठ्यपुस्तकों और जन-जन तक पहुंचाने की बात कही।


























